3 students from Surat designed AI super bike | सूरत के 3 स्टूडेंट्स ने बनाई AI सुपर बाइक: 50% पुर्जे कबाड़ से और बाकी के खुद ही तैयार किए, 1.80 लाख रुपए आई लागत

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सूरत59 मिनट पहले

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यह सुपर बाइक सूरत की भगवान महावीर यूनिवर्सिटी के 3 स्टूडेंड्स ने डिजाइन की है। - Dainik Bhaskar

यह सुपर बाइक सूरत की भगवान महावीर यूनिवर्सिटी के 3 स्टूडेंड्स ने डिजाइन की है।

गुजरात के सूरत में तीन स्टूडेंड्स ने एआई ऑपरेटेड बाइक बनाई है। इस बाइक के 50% पुर्जे कबाड़ से और बाकी 50% खुद स्टूडेंट्स ने ही तैयार किए हैं। बाइक तैयार करने में 1.80 लाख रुपए की लागत आई है।

भगवान महावीर यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच के शिवम मौर्य, गुरप्रीत अरोड़ा और गणेश पाटिल ने इस बाइक को ‘गरुड़’ नाम दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसे डिजाइन करने में उन्हें करीब एक साल का समय लगा है।

कमांड देते ही रुक जाएगी बाइक शिवम मौर्य ने बताया कि बाइक वाईफाई और सेल्फ-ड्रिवन सिस्टम पर काम करेगी। इसमें दो अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। इन सेंसर की मदद से बाइक खुद ही सड़क पर स्थिति का आकलन कर लेती है। अगर कोई दूसरा वाहन इसके 12 फीट के दायरे में आता है, तो बाइक की स्पीड अपने आप स्लो हो जाती है।

अगर कोई वाहन 3 फीट के दायरे में आता है तो बाइक पूरी तरह रुक जाती है। बाइक सवार को बस ‘3 फीट दूर रुकें’ कमांड देना होगा और बाइक बिना ब्रेक लगाए रुक जाएगी। यह फीचर हादसों जैसी स्थिति से बचने में काफी मददगार साबित होगा। इस बाइक के दिमाग को ‘रासबेरीपाय’ के नाम से जाना जाता है, जो एक छोटा कंप्यूटर है। यह सिस्टम कमांड मिलने के बाद अपना काम करना शुरू कर देता है।

वायरलेस मोबाइल चार्जिंग सिस्टम भी उपलब्ध बाइक के दूसरे फंक्शन भी पूरी तरह से टचस्क्रीन डिस्प्ले पर आधारित है। इसमें डिस्प्ले पर जीपीएस, फोन कॉलिंग और म्यूजिक जैसे फीचर्स भी इस्तेमाल किए गए हैं। राइडर को आगे-पीछे की गाड़ियों को देखने के लिए कैमरे भी लगाए गए हैं। इसके अलावा, इसमें वायरलेस मोबाइल चार्जिंग सिस्टम भी उपलब्ध है।

इको मोड पर 220 किलोमीटर की रेंज यह बाइक इको मोड पर 220 किलोमीटर और स्पोर्ट मोड पर 160 किलोमीटर की रेंज देती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बाइक की लिथियम बैटरी सिर्फ दो घंटे में पूरी तरह चार्ज हो जाती है, जो कि एक सामान्य बाइक से कहीं ज्यादा फास्ट है।

बाइक वाईफाई और सेल्फ ड्राइव सिस्टम पर काम करेगी शिवम मौर्य ने बताया कि हमें बाइक बनाने में एक साल का समय लगा। हमारी टीम में तीन छात्र हैं। बाइक में आगे और पीछे कैमरे लगे हैं, जिससे डिस्प्ले पर आगे और पीछे के वाहन दिख सकते हैं। जीपीएस, ब्लूटूथ कूलिंग, म्यूजिक सुनने जैसी सुविधाएं हैं। डिस्प्ले को राइडर कंट्रोल कर सकता है।

बाइक में आगे और पीछे सेंसर लगे हैं, इसलिए बाइक अपने आप रुक जाएगी। राइडर जो कमांड देगा, उतनी दूरी तय करने के बाद बाइक अपने आप रुक जाएगी, उदाहरण के लिए अगर आगे वाला वाहन बाइक से तीन फीट दूर है और कमांड दिया जाए कि बाइक रुकनी चाहिए, तो ब्रेक लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे हादसों से बचा जा सकेगा। इस बाइक को ड्राइवरलेस बनाने की भी तैयारी की जा रही है।

भविष्य में इसे ड्राइवरलेस बनाना भी संभव इस बारे में ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े विनोद देसाई ने बताया कि भविष्य को ध्यान में रखकर इस तरह की बाइक बनना संभव है। इस बाइक की बात करें तो इसकी बैटरी हल्की है, जिससे ये जल्दी चार्ज हो जाती है।

भविष्य की डिमांड भी यही है। साथ ही इसके फंक्शंस को देखते हुए भविष्य में इसे ड्राइवरलेस बाइक में कन्वर्ट करना भी संभव है।

भारतीय युवाओं की वैज्ञानिक दृष्टि का उदाहरण है बाइक: देसाई विनोद देसाई ने आगे कहा कि इन तीनों छात्रों ने एक साल की कड़ी मेहनत के बाद यह अद्भुत बाइक तैयार की है। उनकी यह उपलब्धि सूरत और गुजरात के लिए गर्व की बात है। ‘गरुड़’ महज एक बाइक नहीं है, बल्कि भारत के युवाओं की वैज्ञानिक दृष्टि और तकनीक के प्रति उनकी उत्सुकता को भी दर्शाती है।

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