There should be a CBI inquiry in the CTH case | CTH मामले में CBI जांच हो: पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा – सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से असलियत सामने आई – Alwar News

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पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह।

सरिस्का के जंगल में CTH की सीमाओं में किए गए बदलाव पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकारा। उसके अगले दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने केंद्र व राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इस मामले में CBI से जांच होनी चाहिए। असलियत सामने आएग

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पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को खुद के आवास फूल बाग में मीडियाकर्मियों से बातचीत की। इससे पहले दिन बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सीटीएच मामले में सुनवाई हुई थी। जिसमें कोर्ट ने सन वाल खड़े किए थे कि इतनी जल्दबाजी में सीटीएच बदलाव कैसे कर दिया। आमजन से आपत्तियां तक नहीं मांगी गई।

अब कोर्ट के बयान के बाद पूर्व मंत्री ने कहा कि इसके पीछे एक संगठित माफिया नेटवर्क काम में लगा है। उसे उजागर करने की जरूरत है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने ही सरिस्का के जंगल में खनन पर रोक लगाई थी। लेकिन अब सरकार ने अचानक सीमाएं बदलने की प्रक्रिया अमल में ला दी। न कोई वैज्ञानिक सर्वे कराया गया न सार्वजनिक आपत्ति ली गई।

पूर्व मंत्री ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को धमकाकर उनके हस्ताक्षर कराए गए। सिंह ने कहा कि राजस्थान वाइल्डलाइफ बोर्ड के अधिकारियों को एक पेनड्राइव दी गई। जिसमें पहले से तय नक्शा दिया गया। जिस पर अधिकारियों पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराए गए। सरकार के नाम पर एक बडृा माफिया काम करने में लगा है।

अडानी जैसों को लाभ देने पर नजर

सिंह ने कहा कि सरकार बहुमूल्य खनिज अडानी जैसे उद्यमियों को देने की फिराक में है। उसी के तहत यह सब किया गया है। इसलिए सीबीआई से जांच होने की जरूरत है। ताकि उस माफिया का असली चेहरा सामने आ सके। अब सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती है और माफी नहीं मांगती है तो लड़ाई आगे तक जाएगी।

इतनी जल्दबाजी में कैसे हुआ

सीटीएच का दायरा बदलने के लिए 23 जून को स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड ने सिफारिश भेजी। 24 जून को NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) की प्रक्रिया में आ गया। 26 जून को नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ ने मुहर लगा दी। यह बताता है कि पूरी प्रक्रिया बेहद जल्दबाजी में और एक ‘पूर्वनिर्धारित योजना’ के तहत हुई है।”

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