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राइट टू एजुकेशन (आरटीई) में जोधपुर प्रारंभिक शिक्षा विभाग मुख्यालय के जरिए घोटाला सामने आया है। तिंवरी पंचायत समिति स्थित दो निजी स्कूलों को 56 लाख रु. तक का भुगतान किया गया, जबकि ये दोनों निजी स्कूल अस्तित्व में ही नहीं हैं।
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ऐसे में शिक्षा विभाग के फिजिकल वेरिफिकेशन सहित अनेक कार्यों पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। इस मामले में निदेशालय ने संयुक्त निदेशक सीमा शर्मा को 3 दिन में जांच कराने को कहा है। प्रारंभिक तौर पर डीईओ प्रारंभिक मुख्यालय व संबंधित लिपिकीय भी संदेह के दायरे में हैं। तिंवरी ब्लॉक की ज्ञानशाला तिंवरी व गहलोत पब्लिक स्कूल तिंवरी को लगभग 56 लाख रु. भुगतान किया गया।
शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच में पाया कि इस नाम के विद्यालय तिंवरी, जोधपुर या कहीं और हैं ही नहीं। विद्यालय के पीएसपी पोर्टल पर दर्ज सूचनाएं भी कूटरचित मिलीं। विद्यालय ने कूटरचित भौतिक सत्यापन रिपोर्ट के साथ जाली मान्यता की कॉपी अपलोड कर रखी है। बिलों का जेनरेशन भी ऊपर स्तर से स्वतः किया गया। इतने बड़े फर्जी भुगतान में नीचे से ऊपर तक कार्मिकों पर संदेह है। शिकायत उजागर होने के बाद पीएसपी पोर्टल से रिकार्ड भी गायब होने की सूचना है।
राशि वसूलकर जमा करवाना संदेहास्पद
उच्चस्तर पर माना है कि गड़बड़ी डीईओ प्राशि मुख्यालय से हुई। ये राशि भी डीईओ प्राशि मुख्यालय से वापस कोषालय में जमा करा दी गई है। संदेह है कि एकदम से 56 लाख रु. स्कूल से वसूलना व जमा कराना संदेह के दायरे में है। इस मामले में डीईओ प्राशि मुख्यालय कमलेश कुमार त्रिपाठी से संपर्क करना चाहा लेकिन बातचीत नहीं हुई।
बैंक से हुई बातचीत से खुला पूरा मामला
कोषाधिकारी जोधपुर शहर दिनेश कुमार ने डीईओ प्राशि मुख्यालय कमलेश कुमार त्रिपाठी को 5 अगस्त को पत्र भेजा। इसमें लिखा था कि 24 मई को तिंवरी ज्ञानशाला को 14,76,533 रु. का भुगतान हुआ है। 4 अगस्त को बैंक ऑफ बड़ौदा से हुई दूरभाष वार्ता अनुसार भुगतान संबंधित खाता संख्या तिंवरी शाखा में होने के बाद खाताधारक द्वारा राशि को अन्य बचत खातों में स्थानान्तरित कर भुगतान आहरित किया जा रहा है। यह भुगतान की स्थिति में संदेह उत्पन्न करता है। इस पर उन्होंने स्कूल की सत्यता पूछी। डीईओ प्राशि ने भुगतान रुकवाए जाने को कोषाधिकारी को लिखा।
प्रदेश में ऐसे और भी मामले होने का संदेह: इस मामले के बाद शिक्षा विभाग के कान खड़े हो गए हैं। जोधपुर में और भी स्कूलों की जांच कराई जाएगी। ऐसी जांच प्रदेश के अन्य जिलों में भी चलेगी। जबकि पूर्व में भी आरटीई घोटाला हुआ था। उस वक्त सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का भुगतान निजी स्कूलों को कर दिया गया था।
मामला हमारे प्रसंज्ञान में आया है। जांच होगी। जो दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। – सीमा शर्मा, कार्यवाहक संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, जोधपुर संभाग मुख्यालय