Lord Krishna’s teachings to the Pandavas before the Mahabharata war, Lesson of lord krishna to pandvas, how to get targets in life | महाभारत युद्ध से पहले श्रीकृष्ण की पांडवों को सीख: जब तक सब साथ मिलकर नहीं चलेंगे, तब तक कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं हो सकता

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8 घंटे पहले

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महाभारत में जब पांडव जुए में हार गए, तो उन्हें बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास भुगतना पड़ा। कौरव और पांडवों ने ये नियम तय किया था कि जब पांडव वनवास और अज्ञातवास पूरा करके लौट आएंगे, तब उन्हें उनका राज्य लौटा दिया जाएगा।

जब पांडव वनवास और अज्ञातवास पूरा करके दुर्योधन के पास पहुंचे तो दुर्योधन ने पांडवों को राज्य देने से मना कर दिया। बहुत समझाने के बाद भी दुर्योधन पांडवों को पांच गांव देने के लिए भी तैयार नहीं हुआ। ऐसे में पांडवों के पास एक ही रास्ता बचा था युद्ध करके अपना राज्य फिर प्राप्त करना।

पांडवों ने जब युद्ध की बात सोची तो सबसे पहले उन्होंने अपने संसाधनों और स्थिति का आकलन किया। कौरवों के पास भीष्म, द्रोणाचार्य, कर्ण जैसे महारथी थे। उनकी सेना बहुत विशाल थी। कौरव की विशाल सेना और बड़े योद्धाओं के सामने पांडव सिर्फ पांच ही थे।

जब पांडवों ने दोनों पक्षों का आकलन किया तो अर्जुन तक ने हार मानने की बात कही, लेकिन उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें मार्गदर्शन दिया।

श्रीकृष्ण ने पांडवों को समझाया कि सही बात के लिए अगर हमें युद्ध लड़ना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए। ऐसा युद्ध हिंसा नहीं है, ये सत्य की रक्षा के लिए होगा। संख्या में कौरव भले ही ज्यादा हैं, लेकिन उनके बीच मतभेद हैं। कर्ण भीष्म को पसंद नहीं करते, द्रोण दुर्योधन को पसंद नहीं करते, दुर्योधन हमेशा भीष्म और द्रोण को अपमानित करता रहता है। तुम भले ही संख्या में पांच हों, लेकिन तुम्हारे बीच मतभेद नहीं है। तुम्हारे बीच एकता है, जो कौरवों में नहीं है। एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए, जिन लोगों के बीच एकता होती है, मतभेद नहीं होते हैं, जीत उन्हीं की होती है। चाहे परिवार हो, कार्यस्थल हो या कोई संगठन, एकता सबसे बड़ी पूंजी होती है।

श्रीकृष्ण की सीख:

  • एकता सबसे बड़ी ताकत है: चाहे परिवार हो या ऑफिस की टीम, जब तक सब मिलकर नहीं चलेंगे, तब तक कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं हो सकता।
  • सही के लिए खड़े होना जरूरी है: यदि आपके साथ अन्याय हो रहा है, तो चुप रहना समाधान नहीं है। पहले शांतिपूर्वक तरीके से समझाएं, लेकिन जरूरत पड़े तो न्याय के लिए संघर्ष करना पड़े तो पीछे न हटें।
  • अपनी कमजोरियों के लिए सावधान रहें: कौरवों की हार का कारण बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि उनके आंतरिक मतभेद थे। जीवन में भी अक्सर हम बाहर के कारण नहीं, अपने विचारों की नकारात्मकता से हारते हैं। इसलिए अपनी कमजोरियों के लिए सतर्क रहना चाहिए।
  • टीम वर्क सबसे जरूरी है: सिर्फ टैलेंट या संसाधन काफी नहीं होते। अगर टीम में तालमेल और विश्वास है, तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है।

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