Faridkot Agniveer Family Facing Difficulties Martyr Status Akashdeep Singh Martyr News Update | फरीदकोट में अग्निवीर को शहीद का दर्जा दिलाने की मांग: सीएम से मिलने की कोशिश नाकाम, श्रीनगर में ड्यूटी के दौरान हुई थी मौत – Faridkot News

Actionpunjab
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अग्निवीर के पिता बलविंदर सिंह और माता कर्मजीत कौर किसानों संग अधिकारियों से मिलने पहुंचे।

पंजाब में फरीदकोट में अग्निवीर आकाशदीप सिंह को शहीद का दर्जा दिलाने की मांग जारी है। गांव कोठे चहिल निवासी अग्निवीर आकाशदीप सिंह का परिवार अपने बेटे को शहीद का दर्जा दिलवाने के लिए सरकारी दफ्तरों में चक्कर काट रहा है।

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परिवार ने हाल ही में स्वतंत्रता दिवस पर फरीदकोट में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में पहुंचे सीएम भगवंत सिंह मान से भी मुलाकात करने का प्रयास किया था। लेकिन उस दिन प्रशासन ने परिवार को 19 अगस्त को चंडीगढ़ में सीएम के साथ बैठक करवाने का भरोसा देकर टाल दिया था।

इस भरोसे के चलते मंगलवार को जब अग्निवीर के पिता बलविंदर सिंह व माता कर्मजीत कौर समेत भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधि, जिला प्रशासन के पास पहुंचा तो उन्हें एक बार फिर खामोशी का ही सामना करना पड़ा।

आकाशदीप सिंह की फाइल फोटो।

आकाशदीप सिंह की फाइल फोटो।

जानकारी के अनुसार महज 20 वर्षीय अग्निवीर आकाशदीप सिंह की इसी साल 15 मई को जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में ड्यूटी के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी। लेकिन तीन माह बीत जाने के बावजूद अभी तक ना तो केंद्र और ना ही राज्य सरकार ने उसे शहीद का दर्जा दिया है और ना ही उसके परिवार को सुविधाएं दी हैं। इसके रोष में परिवार ने अभी तक अग्निवीर आकाशदीप सिंह की अस्थियों को भी जल प्रवाह नहीं किया है।

14 व 15 अगस्त को भी इधर से उधर घुमाया था-पिता इस मौके पर अग्निवीर के पिता बलविंदर सिंह ने कहा कि 14 और 15 अगस्त को भी प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें सीएम से मुलाकात करवाने के नाम पर इधर से उधर कई चक्कर लगवाए थे। अब एक बार फिर जल्द बैठक का भरोसा देकर लौटा दिया।

इस मौके पर बीकेयू सिद्धपुर के जिला महासचिव इंद्रजीत सिंह ने अग्निवीर के परिवार प्रति प्रशासन व सरकार के रवैए की सख्त शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि आकाशदीप ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहादत दी, लेकिन उसकी शहादत को मान्यता नहीं दी जा रही। यदि सरकार ने परिवार की मांग को पूरा ना किया तो किसान संगठन संघर्ष को मजबूर होंगे।

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