India China trade Lipulekh pass Nepal protests | भारत-चीन लिपुलेख दर्रे से फिर व्यापार करेंगे: नेपाल ने सीमा विवाद को लेकर विरोध जताया, भारत बोला- यहां से 1954 से ट्रेड हो रहा

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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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भारत दौरे के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की। - Dainik Bhaskar

भारत दौरे के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की।

भारत और चीन ने लिम्पियाधुरा के पास स्थित लिपुलेख दर्रे के रास्ते फिर से व्यापार शुरू करने का समझौता किया है। लिम्पियाधुरा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में मौजूद है, लेकिन नेपाल इसे अपना इलाका मानता है।

यह फैसला चीनी विदेश मंत्री वांग यी की 18-19 अगस्त को भारत यात्रा के दौरान हुआ था। वे भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के निमंत्रण पर आए थे।

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वांग यी और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर की बातचीत में लिपुलेख, शिपकी ला और नाथु ला दर्रों से व्यापार फिर शुरू करने पर सहमति बनी है।

नेपाल ने भारत-चीन से यहां एक्टिविटी न करने को कहा

नेपाल ने इस समझौते पर नाराजगी जताई है। नेपाल सरकार का कहना है कि लिम्पियाधुरा, लिपुलेख, और कालापानी उसके इलाके का हिस्सा हैं। उसने भारत और चीन से इस इलाके में कोई एक्टिविटी न करने की अपील की है।

भारत ने जवाब में कहा कि लिपुलेख के रास्ते 1954 से व्यापार हो रहा है, जो हाल के सालों में कोरोना और अन्य वजहों से रुका था। अब दोनों देशों ने इसे फिर शुरू करने का फैसला किया है।

भारत का कहना है कि नेपाल के क्षेत्रीय दावे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और एकतरफा दावे मान्य नहीं हैं। भारत ने नेपाल के साथ सीमा विवाद को बातचीत और डिप्लोमेसी से हल करने की इच्छा जताई है।

नेपाल ने 10 साल पहले भी विरोध जताया था

भारत और चीन ने 10 साल में पहली बार लिपुलेख के रास्ते व्यापार पर चर्चा की है। इससे पहले 2015 में पीएम मोदी की चीन यात्रा के दौरान उन्होंने और तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग ने लिपुलेख के रास्ते व्यापार बढ़ाने का समझौता किया था।

नेपाल ने उस समय भी इसका विरोध किया था, क्योंकि यह फैसला नेपाल से बिना सलाह के लिया गया था। नेपाल ने तब भारत और चीन को डिप्लोमेटिक नोट भेजे थे।

पीएम मोदी 2015 में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ली केकियांग के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए।

पीएम मोदी 2015 में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ली केकियांग के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए।

नेपाली PM अगले महीने भारत दौरे पर आएंगे

भारत और चीन 2020 की गलवान झड़प के बाद संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल लिपुलेख, कालापानी, और लिम्पियाधुरा को अपना इलाका मानता है। नेपाल ने 2020 में अपना नया नक्शा जारी किया था, जिसमें ये इलाके उसके हिस्से में दिखाए गए थे। 2023 में चीन ने अपने नक्शे में इन्हें भारत का हिस्सा दिखाया था, जिससे विवाद और बढ़ गया था।

भारत और चीन के बीच लिपुलेख को लेकर समझौता नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की चीन और भारत यात्राओं से पहले हुआ है। वे 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में हिस्सा लेंगे और फिर 16 सितंबर को भारत यात्रा पर आएंगे।

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