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- Ganesh Utsav From 27th August, Significance Of Ganesh Chaturthi, Story Of Ganesh Utasav, Clay Idol Of Lord Ganesh
7 घंटे पहले
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बुधवार, 27 अगस्त को भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी से गणेश उत्सव शुरू हो रहा है। इस दिन गणेश जी की मिट्टी से बनी प्रतिमा घर में विराजित करनी चाहिए। ग्रंथों में पार्थिव और मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को ज्यादा शुभ माना जाता है। मिट्टी से बनी प्रतिमा आसानी से पानी घुल जाती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है।
जानिए भगवान गणेश की प्रतिमा से जुड़ी खास बातें, इन बातों का ध्यान रखेंगे तो पूजा-पाठ जल्दी सफल हो सकते हैं…
- उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा कहते हैं कि घर में बैठे हुए गणेश जी की मूर्ति रखनी चाहिए। घर में ऐसी मूर्ति रखने से बचना चाहिए, जिसमें गणेश जी खड़े हुए दिखाई देते हैं।
- घर के मंदिर में गणपति जी की मूर्तियों की संख्या 3, 5, 7 या 9 जैसी विषम संख्या में नहीं होनी चाहिए। गणेशजी की 2, 4 या 6 जैसी सम संख्या में मूर्तियां रख सकते हैं।
- गणेश जी के साथ ही भगवान शिव, देवी पार्वती और मूषक राज की भी मूर्तियां रखनी चाहिए। इनके साथ ही भगवान गणेश की पत्नियां रिद्धि-सिद्धि और पुत्र शुभ(क्षेम)-लाभ की प्रतिमाएं रखेंगे तो बहुत शुभ रहेगा। अगर इनकी मूर्तियां न हो तो पूजा करते समय में गणेश जी के साथ ही इनका भी ध्यान करना चाहिए।
- गणेश जी को किसी भी साफ-स्वच्छ जगह स्थापित किया जा सकता है, क्योंकि भगवान गणेश स्वयं शुभता के प्रतीक हैं, जहां गजानंद विराजित होते हैं, वहां सब शुभ ही शुभ होता है।
- घर में स्थापना के लिए गणेश जी की सूंड दायीं तरफ (सीधे हाथ की ओर) होनी चाहिए। ऐसी प्रतिमा को सिद्धिविनायक गणेश कहते हैं। जबकि व्यापारिक स्थानों पर बायीं तरफ की सूंड शुभ मानी जाती है।
- गणेश जी की पूजा की शुरुआत स्वास्तिक बनाकर करनी चाहिए। स्वास्तिक को गणेश जी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी काम की शुरुआत में स्वास्तिक बनाने से हमारे सभी काम भगवान की कृपा से जल्दी सफल होते हैं।
- गणेश पूजा में दूर्वा अनिवार्य रूप से रखनी चाहिए। दूर्वा के बिना गणेश पूजा अधूरी रहती है। दूर्वा, जिसे दूब घास भी कहा जाता है, गणेश जी को अत्यंत प्रिय है। यह एक औषधीय पौधा है और विभिन्न बीमारियों में राहत देने का काम करता है। धार्मिक मान्यता अनुसार, जब गणेश जी ने अनलासुर नामक दैत्य को निगल लिया था, तब पेट में उत्पन्न जलन को शांत करने हेतु उन्होंने दूर्वा का सेवन किया था। तब से दूर्वा उन्हें अत्यंत प्रिय है। दूर्वा को जोड़ों में चढ़ाना चाहिए।
- घर में जिस जगह गणेश जी की मूर्ति स्थापित है, वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। गणेश जी के आसपास पवित्रता बनाए रखनी चाहिए। भगवान की रोज सुबह-शाम विधिवत पूजा जरूर करें। घर में क्लेश न करें। अधार्मिक कामों से बचें।
- घर में किसी ऐसी जगह गणेश प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए, जहां दिनभर में कभी भी कुछ देर के लिए सूर्य की सीधी रोशनी आती हो। सूर्य देव की रोशनी की वजह से मूर्ति के आसपास सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। ऐसी जगह पूजा करने से भक्त का मन एकाग्र रहता है।
- गणेश जी की मूर्ति के साथ ही कलश की भी स्थापना करनी चाहिए। भगवान के साथ ही कलश भी पूजा करें। कलश सभी तीर्थों और नदियों का प्रतीक माना जाता है। इसकी पूजा से घर में सुख-शांति बनी रहती है, ऐसी मान्यता है।
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