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- Husband And Wife Should Worship Shiva Parvati Together On Hartalika Teej, Hartalka Teej Vrat On 26th August, Shiv Parvati Puja Tips
9 घंटे पहले
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कल (मंगलवार) भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया है, इसे हरतालिका तीज कहते हैं। हरतालिका तीज व्रत महिलाएं अपने जीवन साथी की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सौभाग्य की कामना से करती हैं। ये सबसे कठिन व्रतों में से एक है, क्योंकि ये व्रत निर्जल रहकर यानी अन्न-जल का त्याग करके किया जाता है। पूरे दिन महिलाएं पानी भी नहीं पीती हैं, इसलिए ये व्रत तपस्या के समान फल देने वाला माना जाता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, हरतालिका तीज पर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से पत्नी के साथ ही पति को भी शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए। पति-पत्नी एक साथ पूजा करते हैं तो एक-दूसरे के लिए प्रेम और सम्मान बढ़ता है, आपसी तालमेल बना रहता है और वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।
पूजा करते समय कई ऐसी विधियां होती हैं, जिन्हें पति-पत्नी एक साथ करते हैं। इन विधियों की वजह से पूजा के समय आपसी तालमेल बनाए रखने की भावना बढ़ती है। पूजा-पाठ के बाद पति-पत्नी को एक साथ किसी जरूरतमंद महिला को सुहाग का सामान जैसे लाल साड़ी, लाल चूड़ियां, कुमकुम, बिंदिया आदि भी दान करना चाहिए।
गणेश पूजा के साथ शुरू करें शिव-पार्वती का अभिषेक
- शिव-पार्वती के पुत्र भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं। इनकी पूजा से शिव-पार्वती बहुत प्रसन्न होते हैं। हरतालिका तीज की पूजा गणेश पूजन से ही शुरू करें। गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं। मोदक का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। गणेश जी के बाद शिव-पार्वती का अभिषेक करें।
- शिव-पार्वती को गंगाजल, पंचामृत और स्वच्छ जल चढ़ाएं। बिल्व पत्र, दूर्वा, आंकड़े के फूल, धतूरा, गुलाब, चंदन, चावल, अबीर, गुलाल आदि पूजन सामग्री अर्पित करें। देवी मां को लाल चुनरी, लाल फूल, चूड़ियां, कुमकुम आदि सुहाग का सामना अर्पित करें। विधिवत पूजा करें।
- धूप-दीप जलाकर आरती करें। ऊँ नम: शिवाय, ऊँ पार्वतीयै नमः, ऊँ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव, ऊँ गौरीशंकराय नमः जैसे मंत्रों का जप करें।
- हरतालिका व्रत दिनभर निराहार रहकर किया जाता है। कुछ महिलाएं तो इस व्रत में पानी भी नहीं पीती हैं। तीज पर दिनभर पूजा-पाठ, मंत्र जप, ध्यान, भजन-कीर्तन, दान-पुण्य आदि शुभ काम करना चाहिए। ये व्रत करने वाली महिलाओं को शिव-पार्वती की कथाएं पढ़नी-सुननी चाहिए।
देवी पार्वती ने भी किया था हरतालिका तीज व्रत
- तीज यानी तृतीया तिथि की स्वामी देवी पार्वती हैं। मान्यता है कि देवी पार्वती ने भी हरतालिका तीज व्रत किया था। पार्वती जी भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं और इसी कामना को पूरा करने के लिए देवी तप कर रही थीं। तप के दिनों में जब भाद्रपद शुक्ल तृतीया आई तो देवी ने उस दिन निर्जल रहकर व्रत किया था। देवी के तप से शिव जी प्रसन्न हुए और देवी को मनचाहा वर दिया था। इसके बाद पार्वती और शिव जी का विवाह हुआ था।
- हरतालिका तीज व्रत करने वाली महिलाएं बालू रेत या मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाती हैं और फिर पूजा करती हैं। तीज तिथि पर पूरे दिन शिव-पार्वती की भक्ति की जाती है, मंत्र जप किए जाते हैं। शिव-पार्वती की कथाएं पढ़ी-सुनी जाती हैं। तीज के बाद चतुर्थी की सुबह-सुबह बालूरेत से बने शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। पूजा के बाद नदी-तालाब या किसी अन्य जलस्रोत में इन मूर्तियों का विसर्जित किया जाता है। तीज व्रत करने वाली महिलाएं दान-पुण्य करती हैं।
- तीज पर शिव-पार्वती के मंदिरों में दर्शन-पूजन करना चाहिए। मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक करें। बिल्व पत्र चढ़ाएं। चंदन का लेप शिवलिंग पर करें। हार-फूल से श्रृंगार करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें। मिठाई का भोग लगाएं।