पंजाब के लुधियाना जिले के 20 से 25 गांव के करीब 40 हजार लोगों की नींद 10 दिनों से उड़ी हुई है। लोग रात को सो नहीं रहे हैं। क्योंकि हिमाचल में हो रही बारिश की वजह से भाखड़ा डैम से छोड़े जा रहे पानी की वजह से सतलुज का जलस्तर बढ़ा हुआ है। बहाव तेज है।
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इस वजह से ससराली गांव में बांध टूटने का खतरा बन गया है। बांध और दरिया के बीच की मिट्टी वीरवार को खिसक गई। प्रशासन ने सेना और एनडीआरएफ की टीमें बुला ली हैं। क्योंकि अगर यह स्थिति नहीं संभली तो लुधियाना शहर का कुछ हिस्सा पानी की चपेट में आ सकता है।
सूत्रों मुताबिक पता चला है कि धुस्सी बांध से लगभग 500-600 फीट की दूरी पर एक किलोमीटर लंबा और लगभग दस फीट ऊंचा एक रिंग बांध बनाने की तैयारी की जा रही है ताकि पानी धुस्सी बांध को कटाव से बचाया जा सके।

ससराली बांध पर मौजूद डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन और पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा।
बांध पर अधिकारियों ने डाला डेरा
बांध पर अधिकारियों ने दरिया किनारे डेरा डाला है। हर समय सरकार को अपडेट दिया जा रहा है। यह बांध लुधियाना शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर है। इस दरिया के एक तरफ लुधियाना तो दूसरी साइड नवांशहर और जालंधर का कुछ हिस्सा पड़ता है।
लोग 10 दिन से नजर रख रहे थे। लेकिन दो दिन से काफी संख्या में लोग जुटे हुए है। बांध को संभालने के लिए लोग जुटे हुए है। दूसरी तरफ श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ भी चल रहा है। अरदास की जा रही है कि स्थिति में सुधार हो और पानी का जलस्तर घटे।
किनारे से 15 फुट दूर बह रहा था पानी
भास्कर की टीम जब मौके पर पहुंची, तो ससराली गांव में पूरे जोर से बांध को मजबूत करने का काम चल रहा था। लोगों ने बताया अभी तो किनारों से करीब 15 फुट दूरी पर पानी बह रहा है। लेकिन 10 हजार क्यूसेक पानी आज सतलुज में छोड़ा जाना है। जो कि जैसे ही इस एरिया में पहुंचेगा तो नुकसान पहुंचा सकता है।

बूथगढ़ गांव के सरपंच प्रतिनिधी पलविंदर सोनू जानकारी देते हुए।
10 दिनों से बांध पर मौजूद लोग
बूथगढ़ गांव के सरपंच प्रतिनिधी पलविंदर सोनू ने बताया कि 10 दिन से 3 पंचायतें लगातार बांध को मजबूत करने में लगी हुई हैं। हजार नौजवान लगे हुए हैं। अगर स्थिति ऐसी रही तो 15 गांवों के साथ लुधियाना शहर भी डूब जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन आज जागा, जब खतरा सिर पर खड़ा हो गया।
वहीं डीसी और कमिश्नर लगातार इलाके में जुटे हुए हैं। हालात बस से बाहर हो गए हैं। आज प्रशासन क्या करेगा, जब हमारे हाथों से जुगाड़ निकल गया। गांव पंचायत की तरफ से रेगुलेशन भी बनाया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां पर माइनिंग होती थी। अगर माइनिंग रोकी होती तो यह हालत न बनते। माइनिंग इस जगह पर दिन रात होती रही है।

सतनाम सिंह जानकारी देते हुए।
बांध को मजबूत करने में जुटे लोग
नामधारी समुदाय के सतनाम सिंह ने बताया कि काफी दिनों से हमारी टीम भी लगी हुई है। प्रशासन बहुत हेल्प कर रहा है। हमने लोगों को जागरूक किया है। प्रशासन के आने से हमें बहुत विश्वास हुआ है। गुरुवार शाम को 3-4 बजे के बाद पानी बढ़ गया है। बड़ी संख्या में फसलों को नुकसान हुआ है। यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। हमने गुरु श्री ग्रंथ साहिब का पाठ रखा हुआ है। सेना भी आ गई। अभी तक बांध को मजबूत करने में सभी जुटे है।

ग्रामीण हरपाल सिंह जानकारी देते हुए।
बांध से 15 फुट दूर पानी
ग्रामीण हरपाल सिंह ने बताया कि पानी बांध से 15 फुट रह गया है। लोग जुटे हुए हैं। हजारों लोग यहां पर आए हैं। अगर बांध टूटता है तो गांव ही नहीं, शहर का काफी हिस्सा डूब जाएगा। लोगों का कहना था कि पिछले कई दिनों से अधिकारी नहीं दिख रहे हैं। लोग खुद जुटे हुए थे। लोगों के अंदर डर नहीं है। उनकी कोशिश किसी तरह बांध को मजबूत करना लक्ष्य है। आज जरूर अधिकारी यहां पहुंचे है।

वीरपाल सिंह जानकारी देते हुए।
फसल खराब होने से किसान परेशान
वीरपाल सिंह ने बताया कि हालात बहुत नाजुक हैं। बताया कि 20 से 25 फुट तक बांध के पास आ गया है। फसल खराब हो गई। किसान परेशान हैं। हमारी प्रशासन से विनती है कि बढ़-चढ़कर सहयोग करे।

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन जानकारी देते हुए।
अनाउंसमेंट करा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा
डीसी हिमांशु जैन ने बताया कि ससराली में 3 प्वाइंट हैं। उनमें से एक प्वाइंट पर हालात खराब हैं। उसी स्थान पर हमारा काम चल रहा है। मिलिट्री, गांववासी और प्रशासन की टीमें वहां पर तैनात हैं। गांव के लोग अलर्ट करने के लिए गुरुद्वारों से अनाउंसमेंट करवा रहे हैं कि अपना कीमती सामान ऊंची जगह पर रख दें और अपने पशुओं को भी सुरक्षित करने की कोशिश करें।
पीछे से पानी आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह हिमाचल में होने वाली बारिश और भाखड़ा डैम से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर करता है। यदि भाखड़ा में मार्जिन कम रह जाता है तो पानी छोड़ा भी जा सकता है। फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है।

बीमारियों के खतरे से निपटने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन
नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण बीमारियों के फैलने के बढ़ते खतरे को देखते हुए डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक विशेष समिति का गठन किया। इस समिति की अध्यक्षता ग्लाडा के मुख्य प्रशासक संदीप कुमार है। समिति में अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) अमरजीत बैस, सहायक कमिश्नर (प्रशिक्षण) डॉ. प्रगति रानी और डीएमसीएच के डॉ. विश्व मोहन शामिल हैं।
इस समर्पित समिति को जरूरत के अनुसार मेडिकल कैंप लगाने और बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है। इसके अलावा, समिति को दवाइयों की खरीद और जरूरत के अनुसार मेडिकल टीमों को तैनात करने के लिए निजी और सरकारी अस्पतालों के साथ समन्वय स्थापित करने का अधिकार दिया गया है।
समिति और मेडिकल टीमें स्वास्थ्य कैंप आयोजित करने, दवाइयां वितरित करने और प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए लगातार काम करेंगी।

पंजाब के भाजपा प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ।
बीजेपी प्रवक्ता बोले- माइनिंग के कारण ये हालात बने
पंजाब के भाजपा प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने कहा कि मैंने 18 अप्रैल को राज्यपाल को मांग पत्र दिया था कि ससराली इलाके में माइनिंग काफी होती है। उनके हस्तक्षेप के बाद यहां माइनिंग कुछ समय के लिए रुक गई थी। फिर कुछ अन्य दूरी पर माइनिंग होने लगी। माइनिंग के कारण ही आज यह हालात बन गए है कि दरिया में बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके है। अब जितना पानी बह कर आ रहा है वह जमीन के नीचे कटाव पैदा कर रहा है।
धरती खोखली हो रही है जिस कारण आज जगह-जगह से मिट्टी खिसक रही है। यदि ससराली बांध टूटता है तो बड़ा नुकसान हो जाएगा। करीब 15 से 20 गांवों इसकी चपेट में आ जाएगा। नूरवाला रोड तक पानी आना आम बात है। प्रमुख तौर पर ससराली कालोनी, ससराली रोड, बूथगढ़, गोंसगढ़, मांगट, सीड़ा,ढेरी, कनिजा, चूहड़वाल, बाजड़ा,राहों रोड़ है जहां पानी भरेगा। इसके इलावा शहर के भी काफी हिस्सा पानी की चपेट में आ जाएगा। करीब 1 लाख तक की आबादी को इसका असर पड़ेगा।