Delhi NCR Firecrackers Sale Ban Update; Air Pollution | Supreme Court | दिल्ली-NCR में पटाखे बनाने की इजाजत, बिक्री पर रोक: सुप्रीम कोर्ट बोला- सिर्फ ग्रीन क्रैकर्स बना सकेंगे; बैन का आदेश लागू नहीं हो सका

Actionpunjab
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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट में पटाखे पर बैन मामले में अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी। - Dainik Bhaskar

सुप्रीम कोर्ट में पटाखे पर बैन मामले में अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले शुक्रवार को दिल्ली-NCR में पटाखा बनाने की इजाजत दे दी। कोर्ट ने कहा कि जिन मैन्युफैक्चरर्स के पास ग्रीन पटाखा बनाने के लिए NEERI और PESO का परमिट हैं, सिर्फ वे ही पटाखा बना सकते हैं।

जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक शर्त भी रखी। बेंच ने कहा कि वे कोर्ट के अगले आदेश तक NCR में कोई भी पटाखा नहीं बेचेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों पर पूरी तरह बैन न तो संभव है, न ही यह सही है। कोर्ट ने केंद्र से दिल्ली सरकार, पटाखा बनाने और बेचने वालों सहित सभी हितधारकों से बातचीत के बात पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के फैसले को संशोधित करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा- दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूरी तरह बैन के बावजूद, इसे लागू नहीं किया जा सका। जैसा कि हमने बिहार में भी देखा था कि माइनिंग पर पूर्ण प्रतिबंध के कारण अवैध माफिया खनन के धंधे में लिप्त हो गए थे। इसलिए, इस मामले में एक बैलेंस्ड अप्रोच अपनाने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल 2025 को दिल्ली-NCR में पटाखों पर बैन सिर्फ सर्दियों के मौसम के बजाय पूरे साल तक बढ़ाने का आदेश दिया था। इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसपर अभी सुनवाई चल रही है। 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पटाखे सिर्फ दिल्ली-NCR ही क्यों, देशभर में बैन होने चाहिए।

12 सितंबरः कोर्ट रूम में कई पक्षों की दलील और बेंच की टिप्पणी

  • बेंच ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को इस मामले में नोटिस जारी किया और दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा।
  • न्यायमित्र सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ने कहा कि कुलीन वर्ग अपना ध्यान रखता है। प्रदूषण होने पर वे दिल्ली से बाहर चले जाते हैं।
  • बेंच ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वे प्रदूषण के मामले में CAQM से डिटेल रिपोर्ट लें।
  • लॉ ऑफिसर ने कहा कि नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) जांच कर रहा है कि क्या ग्रीन पटाखों से प्रदूषण कम हो सकता है या नहीं।
  • पटाखा बनाने वाली कंपनियों के वकील ने सुझाव दिया कि NEERI यह बताए कि पटाखों में कौन-कौन से केमिकल कितनी मात्रा में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, ताकि कंपनियां उन्हें अपने पटाखों में शामिल कर सके।
  • कुछ अन्य पक्षों की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील के. परमेश्वर ने चिंता जताई कि पटाखों पर बैन के साथ-साथ अधिकारियों ने उनके मौजूदा लाइसेंस भी रद्द करना शुरू कर दिए हैं।
  • बेंच ने कहा कि फिलहाल पटाखों के लाइसेंस रद्द करने के मामले में स्थिति जैसी है वैसी ही बनी रहेगी।

इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखा बैन मामले पर अप्रैल में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेहद जरूरी बताया था। कोर्ट का कहना था कि प्रतिबंध को कुछ महीनों तक सीमित करने से कोई मकसद पूरा नहीं होगा। लोग पूरे साल पटाखों को इकट्ठा करेंगे और उस समय बेचेंगे, जब बैन लगा होगा।

दिल्ली में 14 अक्टूबर को GRAP-1 लागू किया गया था

दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 पार होने के बाद 14 अक्टूबर को दिल्ली NCR में GRAP-1 लागू कर दिया गया था। इसके तहत होटलों और रेस्तरां में कोयला और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर बैन है। कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने एजेंसियों को पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों (बीएस -III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल) के संचालन पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं।

आयोग ने एजेंसियों से सड़क बनाने, रेनोवेशन प्रोजेक्ट और मेंटेनेंस एक्टिविटीज में एंटी-स्मॉग गन, पानी का छिड़काव और डस्ट रेपेलेंट तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए भी कहा है।

​​​​​​हाई लेवल से ऊपर AQI खतरा

AQI एक तरह का थर्मामीटर है। बस ये तापमान की जगह प्रदूषण मापने का काम करता है। इस पैमाने के जरिए हवा में मौजूद CO (कार्बन डाइऑक्साइड ), OZONE, (ओजोन) NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड), PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) और PM 10 पोल्यूटेंट्स की मात्रा चेक की जाती है और उसे शून्य से लेकर 500 तक रीडिंग में दर्शाया जाता है।

हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, AQI का स्तर उतना ज्यादा होगा। और जितना ज्यादा AQI, उतनी खतरनाक हवा। वैसे तो 200 से 300 के बीच AQI भी खराब माना जाता है, लेकिन अभी हालात ये हैं कि राजस्थान, हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ये 300 के ऊपर जा चुका है। ये बढ़ता AQI सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये आने वाली बीमारियों के खतरे का संकेत भी है।

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