Jhajjar Bahadurgarh Farmers protested Crops lost compensation 90,000 rupees per acre|Haryana news | बहादुरगढ़ में किसानों ने किया प्रदर्शन: लाखों की उपज डूबी, 90 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजे की मांग – bahadurgarh (jhajjar) News

Actionpunjab
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बहादुरगढ़ में प्रदर्शन करते किसान।

हरियाणा प्रदेश को बाढ़ पीड़ित प्रदेश घोषित नहीं करने से किसानों को तिहरी मार झेलनी पड़ रही है। लाखों की कृषि उपज डूब गई है। इसी के चलते बहादुरगढ़ के गांव कुलासी, लडरावण आदि के किसान प्रतिनिधियों ने बाढ़ में डूबे खेतों में सरकार के विरुद्ध नारेबाजी करत

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भूमि बचाओ संघर्ष समिति की टीम डॉ. शमशेर, जोगेंद्र छिकारा, मंजीत दहिया के नेतृत्व में गांव की बदतर व्यवस्था का जायजा लेने पहुंची। पूर्व सरपंच शमशेर खत्री ने कहा कि सत्ता और विपक्ष दोनों के फोकस बिंदु में किसान नहीं हैं। आजादी के 70 वर्षों बाद भी हम वर्षा निकासी सिस्टम विकसित करने में विफल रहे हैं और न ही विदेशों से सीखने की कोशिश की है।

प्राइवेट बीमा कंपनियों ने नुकसान को आंशिक दिखाकर पल्ला झाड़ा

समय पर बरसाती नालों की सफाई प्रबंधन की कमी से राजनेताओं के लिए बाढ़ पीड़ित राशि राजनीतिक लाभ का माध्यम बन गई है। कृषि विभाग जहां नुकसान का आकलन रिपोर्ट पेश कर रहा है, वहीं प्राइवेट बीमा कंपनियों ने नुकसान को आंशिक दिखा कर अपना पल्ला झाड़ लिया है। प्रशासन भी इस मामले पर कोई संज्ञान नहीं ले रहा है।

90 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा मांगा

उन्होंने बताया कि बहुराष्ट्रीय कृषि बीमा निवेशकों को केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संरक्षण के कारण कोई भी क्षतिपूर्ण मुआवजा जारी करने के निर्देशों पर रोक किसानों को मार रही है। आवासीय क्षेत्र चारों तरफ जल भराव से जलजनित महामारियों के फैलने की आशंका है। किसान नेता जोगिंदर सिंह ने तुरंत प्रभाव से 90 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा फसल प्रभावित और जलनिकास के लिए ग्राम सभा को 5 लाख रुपए की राशि मुख्यमंत्री द्वारा जारी करने की अपील की है।

जलभराव से अगली फसल की संभावना भी कम

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में जलनिकास प्रबंधन पर कार्य योजना प्रत्येक जिला गांव में कारगर रूप से लागू की जाए, जिसकी समीक्षा अतिरिक्त उपयुक्त अपनी निगरानी में करें। प्राइवेट कंपनियों को कृषि मौसम विभाग की रिपोर्ट के आधार पर पूर्ण मुआवजे जारी हों ताकि किसानों का लोकतांत्रिक सरकार में विश्वास बहाल रह सके। जलभराव के कारण अगली फसल संभव नजर नहीं आ रही है, जो खाद्यान्न असुरक्षा को आमंत्रण है। इस अवसर पर राजपाल खत्री, रामफल, नरेंद्र, इंदरसिंह, मांगे आदि ने रोष प्रदर्शन किया।

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