Agricultural University develops new varieties of plum | कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित की बेर की नई किस्में: बढ़ेगी किसानों की आय, एक हेक्टेयर में 165 से 180 कुंतल तक उपज ले सकते – Ayodhya News

Actionpunjab
3 Min Read


विजय पाठक | अयोध्या5 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज ने बेर की दो नई किस्में ‘नरेंद्र बेर सेलेक्शन-1’ और ‘नरेंद्र बेर सेलेक्शन-2’ विकसित की हैं। इन किस्मों को उच्च गुणवत्ता और अधिक उत्पादन क्षमता के लिए जाना जा रहा है।

किसान 165 से 180 कुंतल प्रति एकड़ में ले सकते हैं उपज।

उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के मुख्य अन्वेषक डॉ. हेमंत कुमार सिंह ने ‘नरेंद्र बेर सेलेक्शन-1’ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसका वृक्ष मध्यम ऊंचाई का और अर्ध-फैला हुआ होता है। इसके फल गोल, आयताकार, शीर्ष पर टेढ़े और आधार पर गोल होते हैं।कच्चे फलों का रंग गहरा हरा होता है, जो पकने पर हरा-पीला हो जाता है।

इस किस्म के फल का गूदा सफेद होता है। इसमें 0.28 प्रतिशत अम्लता और 140-145 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम गूदा एस्कॉर्बिक एसिड पाया जाता है। इसका टीएसएस (कुल घुलनशील ठोस) 140 ब्रिक्स है।

प्रति पौधा 100-110 किलोग्राम और प्रति हेक्टेयर 148-156 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है। इसके फलों का वजन 40-45 ग्राम होता है। यह किस्म भारत के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बताई गई है।

प्रति हेक्टेयर 148-156 क्विंटल तक होती

‘नरेंद्र बेर सेलेक्शन-2’ भी ‘सेलेक्शन-1’ के समान मध्यम ऊंचाई का अर्ध-फैला हुआ वृक्ष है। इसके फल गोल, आयताकार और शीर्ष पर टेढ़े होते हैं। कच्चे फल गहरे हरे और पके फल हरे-पीले रंग के होते हैं। इसका गूदा भी सफेद होता है, जिसमें अम्लता और एस्कॉर्बिक एसिड की मात्रा ‘सेलेक्शन-1’ के समान ही है।

इसकी उपज भी प्रति पौधा 100-110 किलोग्राम और प्रति हेक्टेयर 148-156 क्विंटल तक होती है। यह किस्म भी भारत के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी गई है।

एक हेक्टेयर में 156 पौधे लगा सकते हैं

डॉ. सिंह ने बागवानी करने वाले किसानों को सलाह दी है कि वे एक हेक्टेयर में 156 पौधे लगा सकते हैं। इसके लिए लाइन से लाइन और पौधे से पौधे की दूरी 8×8 मीटर होनी चाहिए। विश्वविद्यालय के फल विज्ञान विभाग में बेर के पौधे 80 रुपए प्रति पौधे की दर से उपलब्ध हैं।

इन पौधों की रोपाई जुलाई से सितंबर के बीच की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि कम लागत में किसान इस बागवानी से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *