Lack of bunker in Jammu and kashmir pakistan border areas operation sindoor | ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी नहीं बने 2000 नए बंकर: जम्मू-कश्मीर के 500 गांव पाक से सटे बॉर्डर से 6 किमी की रेंज में

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श्रीनगर21 मिनट पहलेलेखक: मुदस्सिर कुल्लू

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तस्वीर 1 मई 2025 की है। पाकिस्तानी गोलाबारी से बुरी तरह प्रभावित पुंछ के गगरियां गली गांव के लोग अंडरग्राउंड बने जानवरों के बाड़ों में शिफ्ट हुए थे। - Dainik Bhaskar

तस्वीर 1 मई 2025 की है। पाकिस्तानी गोलाबारी से बुरी तरह प्रभावित पुंछ के गगरियां गली गांव के लोग अंडरग्राउंड बने जानवरों के बाड़ों में शिफ्ट हुए थे।

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8-9 मई की वो रात हम भूल नहीं सकते। पाकिस्तान की गोलीबारी से बचने के लिए बीवी-बच्चों और चुनिंदा सामान को लेकर रातोरात गांव खाली करना पड़ा था। बंकर होते तो उनमें छुप जाते। गांव नहीं छोड़ना पड़ता।’ इतना कहते-कहते पुंछ के मंडी गांव के सरपंच रफीक मदनी रोने लगे। उन्होंने बताया कि हमें 70 बंकर चाहिए। सर्वे हुए 4 महीने हो चुके। लेकिन, नए बंकर का काम शुरू नहीं हुआ। अब फिर युद्ध की बातें चल रही हैं। यदि गोलीबारी हुई तो हमें दोबारा गांव छोड़ना पड़ेगा

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जम्मू-कश्मीर के 8 जिलों के करीब 500 गांव पाक से सटे बॉर्डर से 6 किमी के दायरे में हैं। इनमें से 60 गांव को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान काफी नुकसान हुआ था। 6 हजार से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त हुए थे। 30 हजार लोगों को रातोंरात शिफ्ट करना पड़ा था।

युद्ध रुकने के बाद हुए सर्वे में 2 हजार अतिरिक्त बंकर तुरंत बनाने की बात हुई, लेकिन सिस्टम की लेटलतीफी से अब तक एक भी नया बंकर नहीं बन पाया है। जम्मू के संभागीय आयुक्त राकेश कुमार ने भास्कर को बताया कि निर्माण जल्द ही शुरू होगा।

इनमें भी मंडी, मनकोट, आरएसपुरा, मेंढर, ढाकी, ठंडी कसी, तंगधार, सलामाबाद, उरी, बालकोटे, करनाह, उरूसा, रियासी, नौपोरा, खनेतर, इरविन, कृष्णा घाटी, शाहपुर, लाम, गंभीर, हाजीपीर, फकीरदरा, करमारा और ढंगरी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे।

गृह विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2017 में इन गांवों में 850 बंकर निर्माण के लिए ₹415.73 करोड़ मंजूर किए थे। जून 2025 तक इनमें से 348 करोड़ से 85% काम हो चुका है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस पैसे से एक भी बंकर नहीं बना है।

जम्मू-कश्मीर के बॉर्डर इलाकों के बंकरों की 4 तस्वीरें…

तस्वीर जम्मू-कश्मीर के अरनिया इलाके की है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यहां बंकर की सफाई की गई थी।

तस्वीर जम्मू-कश्मीर के अरनिया इलाके की है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यहां बंकर की सफाई की गई थी।

तस्वीर 13 मई 2025 की है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के तंगधार पहुंचे थे। यहां कम्युनिटी बंकर को निरीक्षण किया था।

तस्वीर 13 मई 2025 की है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के तंगधार पहुंचे थे। यहां कम्युनिटी बंकर को निरीक्षण किया था।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में बंकर बनाए गए थे।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में बंकर बनाए गए थे।

तस्वीर बांदीपोरा की है। इस बंकर को स्थानीय व्यक्ति ने साल 2018 में खुद बनाया था। ताकि हमले के दौरान खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सके।

तस्वीर बांदीपोरा की है। इस बंकर को स्थानीय व्यक्ति ने साल 2018 में खुद बनाया था। ताकि हमले के दौरान खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सके।

3 हजार की आबादी, 1 हजार ही बंकरों में ठहर सके

  • पुंछ के मनकोट निवासी मोहम्मद अमीन ने बताया कि यहां 250 घर हैं और 1 हजार की आबादी। कुछ ही बंकर हैं, इसलिए उस रात हमें पूरा गांव खाली करना पड़ा था। हम अब भी डर में जी रहे हैं, क्योंकि गांव बॉर्डर से महज 2-3 किमी ही दूर है।
  • पुंछ के करमारा के सरपंच मंजूर अहमद ने बताया कि गांव में 3 हजार लोगों के लिए सिर्फ 91 बंकर हैं। पाक से युद्ध के वक्त इनमें सिर्फ 1 हजार लोग आ सके थे। बाकी को गांव छोड़ना पड़ा था। हमें 100 बंकर और चाहिए। सर्वे हो चुका है। पहली बार पाक ने पुंछ शहर को भी निशाना बनाया था। यह सीमा से 8 किमी दूर है। पुंछ के ही चकदबाग गांव में 2 बंकर हैं, जिनमें 6 से 10 मई की रात 400 लोग बारी-बारी से रुके थे।
  • स्थानीय नागरिक जगदीश कुमार ने बताया कि हमें 10 नए बंकर चाहिए। उत्तरी कश्मीर के नौपोरा उरी में पहली बार पाक की तरफ से ज्यादा गोलीबारी हुई। यहां के बशीर अहमद के घर सीधे गोला गिरा था। हमारे गांव में एक भी बंकर नहीं है। जब गोलाबारी तेज हुई, तो हम दीवारों से सटकर खड़े रहे। यहां लगभग सभी 60 घरों को नुकसान पहुंचा। कई मवेशी मारे गए। इसके बावजूद बंकर नहीं बने हैं, जबकि हमें 30 बंकर चाहिए।

बंकरों पर काम अभी शुरू नहीं हुआ ऑल जम्मू एंड कश्मीर पंचायत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष शफीक मीर ने कहा कि नए बंकरों पर काम अभी शुरू नहीं हुआ है। पुंछ के जिला विकास आयुक्त अशोक कुमार ने पुष्टि की कि हमें सर्वे रिपोर्ट दिए काफी वक्त हो गया, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।

राजौरी के डांगरी गांव में भी हताहतों की संख्या और व्यापक तबाही हुई। एक निवासी ने कहा, जब भी गोलीबारी शुरू होती है, हम भाग जाते हैं क्योंकि हमारे बंकर 500 की आबादी में से मुश्किल से 200 लोगों को ही आश्रय दे पाते हैं।

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