Diwali 2025, Deepawali 2025, diwali dates, diwali kab hai, Significance of diwali | दीपोत्सव 5 नहीं 6 दिनों का: 20 अक्टूबर की रात में होगी लक्ष्मी पूजा और 21 अक्टूबर को रहेगी स्नान-दान की कार्तिक अमावस्या

Actionpunjab
4 Min Read


7 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

18 अक्टूबर को धनतेरस है, इसके साथ दीपोत्सव शुरू हो जाएगा। इस साल दीप पर्व 5 नहीं 6 दिनों का रहेगा, क्योंकि कार्तिक अमावस्या 20 और 21 अक्टूबर को दो दिन रहेगी। 20 तारीख की रात लक्ष्मी पूजा होगी और 21 को स्नान-दान की कार्तिक अमावस्या रहेगी। 22 तारीख को गोवर्धन पूजा और 23 को भाई दूज मनेगी।

इस बार दीपावली की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं, क्योंकि कार्तिक मास की अमावस्या दो दिन है। अधिकतर ज्योतिषियों का मत है कि दीपावली 20 अक्टूबर को मनाना ज्यादा शुभ है।

20 अक्टूबर को दीपावली क्यों मनाएं

ज्योतिषियों का कहना है कि कार्तिक अमावस्या की रात में लक्ष्मी पूजन का विधान है, 20 अक्टूबर की रात में कार्तिक अमावस्या रहेगी, लेकिन 21 अक्टूबर की शाम को ये तिथि खत्म हो जाएगी। इसलिए 20 तारीख की रात में लक्ष्मी पूजा करना चाहिए।

20 तारीख को अमावस्या तिथि दोपहर 2.25 बजे शुरू हो जाएगी और अगले दिन शाम 4 बजे तक रहेगी। 20 तारीख को ही अमावस्या का संध्या काल (प्रदोष काल) रहेगा और लक्ष्मी पूजा करने के लिए ये दिन श्रेष्ठ रहेगा।

  • 18 अक्टूबर को धनतेरस- इस दिन भगवान धनवंतरि की जयंती भी मनाते हैं। धनतेरस की रात में यमराज के लिए दीपक जलाने की परंपरा है। धनतेरस पर देवी लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। धनतेरस पर घर के नए बर्तन भी खरीदते हैं।
  • 19 अक्टूबर को रूप चौदस- रूप चौदस को नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के दैत्य का वध किया था। इसी वजह से इस पर्व को नरक चतुर्दशी कहते हैं। रूप चौदस पर उबटन लगाकर स्नान की परंपरा है।
  • 20 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा- मान्यता है कि देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था और इस मंथन से कार्तिक अमावस्या पर देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। देवी ने भगवान विष्णु का वरण किया था। इस वजह से इस दिन लक्ष्मी पूजा की जाती है। दीपावली की रात भगवान गणेश, महालक्ष्मी, भगवान विष्णु के साथ शिव, देवी सरस्वती, कुबेर देव की भी पूजा की जाती है।
  • 21 अक्टूब को स्नान-दान की कार्तिक अमावस्या- इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करना चाहिए। दोपहर में पितरों के लिए धूप-ध्यान भी करें। इस दिन शाम करीब 4 बजे कार्तिक अमावस्या तिथि खत्म हो जाएगी और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि शुरू होगी।
  • 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा- कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर मथुरा स्थित गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परंपरा है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने ब्रज के लोगों से कंस की नहीं, गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा था, तब से ही इस पर्वत की पूजा की जा रही है।
  • 23 अक्टूबर को भाई दूज- ये पर्व यमुना और यमराज से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इस तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आते हैं। यमुना यमराज को भोजन कराती हैं। मान्यता है कि इस तिथि पर जो भाई अपनी बहन के घर भोजन करता है, यमराज-यमुना की कृपा से उसकी सभी परेशानियां दूर होती हैं और भाग्य का साथ मिलता है।

खबरें और भी हैं…
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *