Diwali 2025, Deepawali 2025, Jupiter and Saturn in diwali, shani and guru yog on diwali, diwali on 20 october | दीपावली पर दुर्लभ योग: 676 साल बाद गुरु-शनि के शुभ योग में मनेगी दीपावली, इस साल के 2085 में बनेगा ऐसा संयोग

Actionpunjab
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14 घंटे पहले

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सोमवार, 20 अक्टूबर को दीपावली है। इस साल गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि कर्क में है। इसके साथ ही गुरु की दृष्टि शनि पर रहेगी। शनि गुरु की राशि मीन में है। गुरु का उच्च राशि में होना और उसकी शनि पर दृष्टि, शनि का मीन राशि में होना, एक शुभ योग है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, ऐसा योग 2025 से 676 साल पहले 20 अक्टूबर 1349 को बना था। उस दिन भी सोमवार ही था। तारीख, वार एक जैसे होने की साथ ही उच्च के गुरु की दृष्टि, गुरु की राशि में शनि है। अब 2025 के 60 बाद फिर ऐसा योग बनेगा। उच्च के गुरु के साथ, 18 अक्टूबर 2085 को दीपावली मनेगी और गुरु की दृष्टि मीन राशि में स्थित शनि पर रहेगी।

कर्क, वृश्चिक, मकर और मीन के शुभ रहेगा समय

गुरु पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा, इसका स्वामी गुरु ही है और शनि पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा, इसका स्वामी भी गुरु ही है। गुरु उच्च राशि कर्क में है, शनि भी गुरु की राशि में है, गुरु की दृष्टि भी शनि पर है। इन शुभ योगों की वजह से देश में व्यापार की स्थिति बहुत मजबूत होगी। शत्रु देशों को बड़ी हानि हो सकती है। सोना और चांदी के दाम बढ़ते रहेंगे। कर्क, वृश्चिक, मकर और मीन राशि वालों को लाभ मिलने की संभावना है।

दीपावली का पर्व क्यों मनाया जाता है?

भविष्य, स्कंद एवं पद्म पुराण में दीपावली मनाने के कई कारण बताए गए हैं। कहानियों के अनुसार समुद्र मंथन से धन्वंतरि की उत्तपत्ति कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को हुई थी। इसके बाद कार्तिक अमावस्या को भगवती महालक्ष्मी का अवतार समुद्र से हुआ। उनके स्वागत के लिए मंगल उत्सव मनाया गया तथा दीप मालिकाएं जलाई गई थीं। इस मान्यता की वजह से दीपावली मनाई जाती है।

एक अन्य कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने नरक चौदस के दिन नरकासुर का वध किया तथा सोलह हजार राजकन्याओं को उसकी कैद से स्वतंत्र करा कर अमावस्या पर द्वारिका में प्रवेश किया था, लोगों ने भगवान के स्वागत के लिए दीप मालिकाओं से द्वारिका को सजाया था।

रावण का वध करके जब भगवान राम ने अयोध्या में प्रवेश किया, तब कार्तिक मास की अमावस्या थी और उस दिन नगरवासियों ने भगवान के स्वागत के लिए अयोध्या को दीपों से सजाया था।

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