नई दिल्ली2 दिन पहले
- कॉपी लिंक

लोकपाल ने 7 BMW खरीदने के लिए 16 अक्टूबर को टेंडर निकाला था।
भारत के लोकपाल कार्यालय के 7 हाई-एंड BMW 330 Li लॉन्ग व्हील बेस लग्जरी कारें खरीदने के फैसले की कांग्रेसी नेताओं ने आलोचना की है।
पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने बुधवार को कहा, ‘जब सुप्रीम कोर्ट के जज साधारण सेडान कारों का इस्तेमाल करते हैं, तो लोकपाल के अध्यक्ष और 6 सदस्यों को बीएमडब्ल्यू जैसी महंगी कारों की क्या जरूरत है?
वहीं, अभिषेक सिंघवी ने X पर लिखा, ‘भ्रष्टाचार विरोधी इस संस्था को अब अपने सदस्यों के लिए बीएमडब्ल्यू कारें खरीदते देखना दुखद है। यह ईमानदारी के रखवाले कम, विलासिता के पीछे भागने वाले ज्यादा लगते हैं।’
लोकपाल कार्यालय ने 16 अक्टूबर को 7 BMW खरीदने के लिए एक टेंडर जारी किया था। टेंडर के अनुसार, हर कार की कीमत 70 लाख रुपए से अधिक है, और कुल 7 कारों की लागत 5 करोड़ रुपए से ज्यादा होने की उम्मीद है।

सिंघवी बोले- लोकपाल पालतू जानवर लगता है
अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उनके पिता डॉ. एलएम सिंघवी ने 1960 के दशक में लोकपाल की अवधारणा प्रस्तुत की थी, और वह खुद लोकपाल पर संसदीय समिति के अध्यक्ष रहे हैं। सिंघवी ने बताया कि 2019 में स्थापना के बाद से लोकपाल को 8,703 शिकायतें मिलीं, जिनमें से केवल 24 की जांच हुई और 6 मामलों में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘ऐसी स्थिति में 70 लाख की बीएमडब्ल्यू कारें! यह भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था कम, पालतू जानवर ज्यादा लगता है।’

लोकपाल के टेंडर के अनुसार हर कार की कीमत 70 लाख रुपए से अधिक है।
BMW लोकपाल ड्राइवरों को ट्रेनिंग देगी
कारें डिलीवर होने के बाद BMW लोकपाल के ड्राइवरों और स्टाफ को सात दिन की ट्रेनिंग देगी, जिसमें गाड़ियों के सिस्टम और उनके सही इस्तेमाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
भारतीय बाजार के लिए डिजाइन किया गया BMW 330Li
BMW 330Li M Sport, 3 सीरीज का लॉन्ग व्हील-बेस (LWB) वेरिएंट है। यह खासतौर पर भारतीय बाजार के लिए डिजाइन किया गया है। यह चेन्नई प्लांट में असेंबल होती है और 2025 मॉडल में लॉन्च हुई है।
इसकी शुरुआती कीमत लगभग ₹62.60 लाख (एक्स-शोरूम) है, जो इसे प्रीमियम सेडान सेगमेंट में मर्सिडीज और ऑडी A4 जैसे प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करने लायक बनाती है।
रियर सीट की बेहतरीन कम्फर्ट: LWB वर्जन की वजह से रियर पैसेंजर्स को लेग रूम (पैरो के लिए जगह) और हेडरूम मिलता है। यह अमीर परिवारों या एक्जीक्यूटिव्स के लिए परफेक्ट है, जहां रियर सीट ‘बिजनेस क्लास’ जैसी फील देती है।
पावरफुल और रिफाइंड परफॉर्मेंस: 258 hp इंजन स्मूथ और रेस्पॉन्सिव है, जो सिटी क्रूज से लेकर हाईवे ओवरटेकिंग तक सब आसान बनाता है। सॉफ्ट सस्पेंशन सेटअप भारतीय सड़कों पर कम्फर्टेबल राइड देता है। बॉडी रोल कंट्रोल्ड है, जो LWB होने के बावजूद बैलेंस बनाए रखता है।

चेन्नई के बीएमडब्ल्यू प्लांट में BMW X5 और अन्य मॉडल (जैसे 7 सीरीज, 3 सीरीज, 2 सीरीज ग्रैन कूप, 5 सीरीज, 6 सीरीज ग्रैन टूरिस्मो और M340i) असेंबल किए जाते हैं।
भ्रष्टाचार से जुड़े शिकायतों की जांच के लिए बना लोकपाल
लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 में बना और 2014 में लागू हुआ। यह पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है।
लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य होते हैं, जिनमें से आधे न्यायिक पृष्ठभूमि से होते हैं। अध्यक्ष आमतौर पर भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश होते हैं।
सदस्यों की नियुक्ति प्रधानमंत्री वाली समिति करती है
लोकपाल के सदस्यों की नियुक्ति एक चयन समिति करती है, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रख्यात व्यक्ति शामिल होते हैं।
भारत का पहला लोकपाल 2019 में नियुक्त किया गया, जिसमें जज (सेवानिवृत्त) पिनाकी चंद्र घोष को अध्यक्ष बनाया गया। लोकपाल के वर्तमान अध्यक्ष जज (सेवानिवृत्त) अजय मणिकराव खानविलकर हैं। उन्हें फरवरी 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नियुक्त किया था, उन्होंने मार्च 2024 से पदभार संभाला।

वर्तमान में लोकपाल के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस अजय मणिकराव खानविलकर हैं।
लोकपाल की नियुक्ति पर सवाल उठते रहे हैं
लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत तंत्र के रूप में देखा गया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसके गठन, कार्य और प्रभावशीलता पर लगातार आलोचना की है।
कांग्रेस पार्टी इसे हमेशा राजनीतिक प्रभाव से ग्रस्त और कमजोर बताती रही है। विपक्ष आरोप लगाता आया है लोकपाल की नियुक्ति समिति में सत्ताधारी दल का वर्चस्व रहता है, जिससे लोकपाल की स्वतंत्रता प्रभावित होती है।
अधिनियम 2013 में पारित होने के बाद भी 2019 तक लोकपाल की नियुक्ति न होने पर विपक्ष (कांग्रेस, AAP आदि) ने NDA सरकार पर इच्छाशक्ति की कमी का आरोप लगाया था।
संसाधनों और स्टाफ की कमी
2019 में गठन के बाद लोकपाल को पर्याप्त स्टाफ, बजट और कार्यालय की कमी का सामना करना पड़ा। पूर्व सदस्य जस्टिस दिलीप भोंसले ने 2021 में इस्तीफा देते हुए कहा कि संसाधनों की कमी से जांच प्रभावित हो रही है।
2022 में संसदीय समिति ने रिपोर्ट में उल्लेख किया कि शिकायतों का निपटारा धीमा है, क्योंकि लोकपाल के पास केवल 30-40% स्टाफ है।
—————————————
ये खबर भी पढ़ें…
मोदी बोले- ऑपरेशन सिंदूर में अन्याय का बदला लिया: दीपावली पर ‘देश के नाम लेटर’ में श्री राम से प्रेरणा लेने की बात कही

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के नाम अपने ‘पत्र’ में लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा- यह दीपावली अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद दूसरी दीपावली है। पूरी खबर पढ़ें…