MPs embroiled in controversy over Martyrdom Day seminar Malwinder Singh Kang Chandigarh Univercity | शहीदी पर्व के सेमिनार विवाद में उतरे सांसद: सांसद कंग ने PU की वाइस चांसलर को पत्र लिखकर मांगी इजाजत, स्टूडेंट आग्रेनाइजेशन सथ ने करना है सेमिनार – Chandigarh News

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पंजाब यूनिवर्सिटी PU में श्री गुरु तेग बहादुर के शहीदी पर्व पर सेमिनार को मंजूरी नहीं देने के विवाद में अब सांसद मालविंदर कंग की एंट्री हुई है। फतेहगढ़ साहिब से सांसद और PU के एलूमिनी कंग की तरफ से वाइस चांसलर रेनू विज को पत्र लिखा है।

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सांसद मालविंदर कंग की तरफ से लिखा गया पत्र

सांसद मालविंदर कंग की तरफ से लिखा गया पत्र

उनकी तरफ से लिखा गया है कि छात्र संगठन ने मुझसे संपर्क किया है और मेरा ध्यान श्री गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ को समर्पित एक सेमिनार की अनुमति देने से अनुचित रूप से इनकार करने की ओर दिलाया है। 27 अक्टूबर, 2025 को आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम गुरु की अद्वितीय विरासत का सम्मान करना चाहता है।

सांसद कंग ने जताई यूनिवर्सिटी प्रबंधन से निराशा

सांसद मालविंदर कंग ने कहा कि वह इस बात का लेकर निराश हैं कि प्रशासन ने इस सेमिनार के लिए अनुमति नहीं देने का फैसला किया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एक सम्मानित सिख राजनीतिक विश्लेषक और विद्वान सरदार अजमेर सिंह की भागीदारी को लेकर कथित चिंताओं का हवाला दिया गया है। यह तर्क कि सरदार अजमेर सिंह अपने अतीत के कारण एक “विवादास्पद व्यक्ति” हैं, यह सही नहीं है। तीन दशकों से अधिक समय से सरदार अजमेर सिंह जनता के बीच खुलेआम जा रहे हैं और उनके खिलाफ कोई कानूनी मामला लंबित नहीं है।

सिख विद्वत्ता में उनके योगदान को व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है और उन्हें पंजाब और उसके बाहर के विश्वविद्यालयों सहित कई प्रतिष्ठित मंचों पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया है।

ऐसे व्यक्ति को विश्वविद्यालय के दर्शकों को संबोधित करने के लिए अयोग्य करार देना न केवल शैक्षणिक स्वतंत्रता का अपमान है, बल्कि बौद्धिक विमर्श की उस भावना के साथ भी घोर अन्याय है, जिसका पंजाब विश्वविद्यालय लंबे समय से समर्थन करता रहा है।

पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की तस्वीर।

पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की तस्वीर।

सेमिनार को मंजूरी देने का किया आग्रह

सांसद ने सेमिनार पर तत्काल पुनर्विचार करने और उसे स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया है। यह न केवल छात्र समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने का विषय है, बल्कि स्वतंत्र विचार और सांस्कृतिक गौरव के गढ़ के रूप में विश्वविद्यालय की विरासत की रक्षा का भी विषय है। आइए, हम नौकरशाही के अतिक्रमण या संकीर्ण विचारों को श्री गुरु तेग बहादुर की उज्ज्वल विरासत पर छाया न डालने दें।

इस तरह समझें क्या है पूरा मामला

स्टूडेंट आर्गेनाइजेशन सथ के स्टूडेंट श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350 वे शहीदी पर्व पर PU में सेमिनार करवाने का ऐलान कर चुके हैं। लेकिन PU प्रशासन की तरफ से इसे मंजूरी नहीं दी गई है। इस सेमिनार में सिख हिस्टोरियन अजमेर सिंह मुख्य वक्ता के तौर पर आ रहे हैं, उनके साथ जसवंत सिंह खालड़ा के भाई अमरजीत सिंह खालड़ा आ रहे हैं। इसके लिए ऑडिटोरियम मांगने पर यह नहीं दिया गया है।

आर्गेनाइजेशन नेता और पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट आर्गेनाइजेशन के उपाध्यक्ष अशमीत सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्हें यहां पर सेमिनार नहीं करने दिया जा रहा है। यूनिवर्सिटी के डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर DSW अमित चौहान का कहना है कि जिस वक्ता को बुलाया गया है कि वह विवादित शख्सियत हैं। इसलिए उन्हें यहां संबोधन की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

कौन हैं अजमेर सिंह, जिन्हें लेकर विवाद

अजमेर सिंह बठिंडा के मंडी कलां में पैदा हुए। 1984 में श्री हरिमंदिर साहिब पर हुए हमले के बाद वह दिल्ली चले गए और वहां से अखबार निकालने लगे थे। उनका ज्यादा समय अंडर ग्राउंड गुजरा है।

वह लेखक हैं और पंजाब के काले दौर के दौरान पंजाबियों पर हुए अत्याचार की बात करते हैं। उनकी विचारधारा से काफी संख्या लोग सहमत नहीं होते हैं। उनके द्वारा पंजाब के हालातों पर चार किताबें भी लिखी गई हैं।

हमने सेमिनार करवाने से मना नहीं किया- DSW

यूनिवर्सिटी के डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर DSW अमित चौहान का कहना है कि हमने सेमिनार करवाने पर रोक नहीं लगाई है। बल्कि उनसे पूछा है कि क्या वक्ताओं की उक्त सेमिनार के बारे में रेलिवेंस है। अगर वह इस संबंधी कागजात लेटर के साथ लगाकर देते हैं, तो प्रबंधन को कोई अपत्ति नहीं होनी चाहिए। वैसे इनकी तरफ से ऑडिटोरियम नहीं मांगा है बल्कि गोल्डन जुबली हाल मांगा गया था।

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