- Hindi News
- Jeevan mantra
- Dharm
- Kalbhairav Ashtami On 12th November, Significance Of Kalbhairav Ashtami In Hindi, Rituals About Kalbhairav Ashtami
9 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

बुधवार, 12 नवंबर को अगहन कृष्ण अष्टमी है, इस तिथि पर कालभैरव अष्टमी मनाई जाती है। मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी तिथि पर कालभैरव अवतार लिया था। ये शिव जी उग्र स्वरूप है। जो लोग भय और नकारात्मक विचार दूर करना चाहते हैं, उन्हें कालभैरव की पूजा करनी चाहिए।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, जिन लोगों की कुंडली में शनि और राहु-केतु से जुड़े दोष हैं, उन्हें भी कालभैरव की पूजा खासतौर पर करनी चाहिए। कालभैरव अष्टमी पर कालभैरव प्रकट हुए थे। भैरव शब्द का अर्थ है भय को दूर करने वाला। इस तिथि पर भगवान शिव और देवी पार्वती की भी विशेष पूजा करनी चाहिए।
शास्त्रों में बताया गया है कि कालभैरव की पूजा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। शिव जी के इस स्वरूप की पूजा करने से रोगों से भी मुक्ति मिल सकती है।
ऐसे मनाएं कालभैरव अष्टमी
- कालाष्टमी पर सुबह ब्रह्ममुहूर्त में बिस्तर छोड़ देना चाहिए। पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- स्नान के बाद उगते सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें, जल में कुमकुम और फूल भी डालें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं।
- घर के मंदिर में भैरव महाराज और शिव-पार्वती की पूजा का संकल्प लें।
- सबसे पहले प्रथम पूज्य गणपति का ध्यान करें। इसके बाद भैरव, शिव-पार्वती को पंचामृत चढ़ाएं। भैरव को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं। हार-फूल और वस्त्रों से श्रृंगार करें।
- ऊँ भैरवाय नमः मंत्र का जप करें। धूप-दीप जलाएं। पूजा में इमरती का भोग लगाना चाहिए। अंत में भगवान की आरती करें। पूजा के बाद जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा मांगे।
ये है कालभैरव अवतार की कहानी
एक पौराणिक कथा है कि एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश में यह विवाद हुआ कि हम तीनों में सर्वश्रेष्ठ कौन है। इस विवाद को सुलझाने के लिए सभी देवी-देवताओं की सभा बुलाई गई। काफी विचार-विमर्श के बाद निर्णय आया कि शिव जी सर्वश्रेष्ठ हैं, क्योंकि इनकी इच्छामात्र से ही सृष्टि की रचना हुई है और शिव जी ही संहारक भी हैं। शिव और विष्णु, इस बात से सहमत हो गए, लेकिन ब्रह्मा जी इस निर्णय से असंतुष्ट थे।
ब्रह्मा जी ने अहंकार के कारण शिव का अपमान करने का प्रयास किया। इससे क्रोधित होकर शिव ने अपना भयंकर रूप धारण किया और कालभैरव अवतार प्रकट हुआ। काले कुत्ते पर सवार और हाथों में दंड लिए कालभैरव ने ब्रह्मा जी के एक सिर को काट दिया। ब्रह्मा जी ने भयभीत होकर क्षमा मांगी, तब भगवान भैरव शांत हुए। मान्यता है कि ये घटना अगहन मास की कृष्ण अष्टमी को हुई थी। इसी वजह से इस तिथि पर कालभैरव अष्टमी मनाई जाती है।