![]()
बिहार और अंता उप चुनाव के परिणाम के ठीक बाद राजस्थान के जिलाध्यक्षों की सूची जारी होने जा रही है। संभवना है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनकी टीम 15 नवंबर तक सूची जारी कर दे। चर्चा है कि राजस्थान के कांग्रेस के 50 जिले हैं, उनमें से 40
.
80 प्रतिशत जिलों के अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी होने की सूचना है। दिल्ली से मिल रही इन सूचनाओं से पार्टी के जिलाध्यक्ष की दौड़ में शामिल कई विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों व युवाओं की धड़कनें तेज हो रखी है। सभी को बेसब्री से सूची का इंतजार है। इसके अलावा पीसीसी चीफ भी 4 राज्यों में बदले जाने की चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि बिहार चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार थमने के साथ ही राहुल गांधी और उनकी टीम ने 3 दिन जिलाध्यक्षों के नाम फाइनल करने के लिए एआईसीसी वार रूम में कसरत की। फाइनल सूची लगभग तैयार है। अंतिम रूप देने से पहले दिग्गज नेताओं से राय भी ली जा रही है।
पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट क्रॉस चेक होने बाद ही जिलाध्यक्षों की सूची जारी की जाएगी। 15 नवंबर या इसके बाद कभी जिलाध्यक्षों की सूची जारी हो सकती है। गौरतलब है कि राजस्थान में 30 केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने 1 से 15 अक्टूबर तक कार्यकर्ताओं और नेताओं से वन टू वन संवाद किया था। उसके बाद 6-6 नाम के पैनल बनाकर पिछले महीने पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री कृषि वेणुगोपाल को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
कई युवा 5-5 बार दिल्ली के चक्कर काट चुके
जिला अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल कई नेता दिल्ली में बड़े नेताओं से अप्रोच लगाने के लिए 5-5 चक्कर काट चुके हैं। अपने नाम पर मुहर लगाने के लिए हर संभव प्रयास जारी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बिहार के मतदान के बाद राहुल गांधी की उपस्थिति में एआईसीसी की बैठक होगी। इसमें सभी रिपोर्टों का मिलान कर जिलाध्यक्षों के नाम फाइनल किए जाएंगे।
19 जिलों में 6-6 दावेदार नहीं मिले जिला अध्यक्ष बनने के लिए हुई रायशुमारी में 19 जिले तो ऐसे रहे, जिनमें 6-6 दावेदार ही नहीं मिले। उनमें 2 से 5 नाम ही पर्यवेक्षकों ने रिपोर्ट में आईसीसी को सौंपे। ऐसे जिलों में सीनियर नेताओं की राय पर लिस्ट से बाहर के किसी नाम पर मुहर लगना भी संभव है।
8 जिलों में विरोध- एआईसीसी को भेजे नामों की लिस्ट को लेकर 8 जिलों में कांग्रेस में भारी विरोध है। इसमें जयपुर ग्रामीण जैसे बड़े जिले भी शामिल हैं। ऐसे में 40 जिलों के अध्यक्ष बदले गए तो पार्टी में भारी विरोध देखने को मिल सकता है।