नई दिल्ली6 मिनट पहले
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दिल्ली ब्लास्ट में जितने भी आरोपियों के नाम सामने आए हैं उन सभी की कड़ी फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ी है। अभी तक 7 डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं। जिनका आपस में किसी न किसी तरह संबंध है।
धमाके का मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी जो ब्लास्ट वाले दिन i10 कार चला रहा था। संभावना है कि वह मारा जा चुका है हालांकि उसकी मां का डीएनए सैंपल लिया गया है। सैंपल मैच होने के बाद ही इसकी पुष्टि हो पाएगी।
वहीं 6 डॉक्टरों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। एक अभी भी फरार है। इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी का चांसलर मध्य प्रदेश से भागकर दिल्ली गया था। वहां उसने कॉलेज खोला और खुद ही चांसलर बन गया।
1. डॉ. उमर उन नबी उमर ने 2023 में श्रीनगर से MBBS और MD की पढ़ाई करके अनंतनाग गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में बतौर सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर जॉइन किया था। वह अपने काम में ध्यान नहीं देता था और आए दिन अस्पताल से गायब रहता था। वहां से निकाले जाने के बाद उमर ने फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी का स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस जॉइन कर लिया। यहां से वह आतंकियों के संपर्क में आया और दिल्ली में कार ब्लास्ट को अंजाम दिया।
2. डॉ. मुजम्मिल शकील मुजम्मिल शकील कश्मीरी मूल का डॉक्टर है। वह अल फलाह यूनिवर्सिटी में फैकल्टी के रूप में काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, मुजम्मिल ने फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में लगभग तीन महीने पहले एक किराए का मकान लिया था। यहां उसने लगभग 350-360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, असॉल्ट राइफल, गोलियां और अन्य विस्फोटक सामग्री इकठ्ठा की थी। 30 अक्टूबर 2025 को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मुजम्मिल को हिरासत में लिया था।
3. डॉ. शाहीन शाहिद शाहीन की कानपुर में कहानी शुरू होती है साल- 2006 में। उस समय शाहीन ने कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (GSVM) में नौकरी शुरू की। उसने GSVM में फॉर्माकोलॉजिस्ट डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर जॉइन किया था। इसके बाद शाहीन 2013 तक GSVM में फॉर्माकोलॉजी की प्रोफेसर रही। फिर साल- 2013 में वह कहां गई, इसका किसी को पता नहीं चला। एक दिन अचानक शाहीन ने अपना बोरिया-बिस्तर समेटा और कानपुर छोड़ दिया। इसके बाद वह फरीदाबाद आ गई। शाहीन डॉक्टर मुजम्मिल की गर्लफ्रेंड है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 10 नवंबर को हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार किया था। शाहीन AK-47 लेकर चलती थी, जो उसकी कार से बरामद हुई। इसके अलावा उसकी कार से जिंदा कारतूस और अन्य संदिग्ध सामान भी मिला।
4. डॉ. आदिल अहमद डॉ. अदील कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपुरा का रहने वाला है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई की। इसके बाद अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर नौकरी करने लगा। हालांकि, उसने 2024 में अनंतनाग सरकारी अस्पताल से इस्तीफा दे दिया और सहारनपुर आ गया। 17 अक्टूबर को मौलवी इरफान ने नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पोस्टर लगवाए। डॉ. अदील पर भी पोस्टर लगवाने का आरोप लगा। 6 नवंबर को यूपी एटीएस की मदद से जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. अदील को सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया।
5. डॉ. परवेज अंसारी परवेज अंसारी महिला डॉ. शाहीन का छोटा भाई है। परवेज भी डॉक्टर है, वह लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। लेकिन उसने ब्लास्ट से दो दिन पहले यानी 7 नवंबर को नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों का कहना है कि आदिल अहमद के गिरफ्तार होते ही परवेज ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नौकरी छोड़ने के बाद वह अपना निजी सामान लेने के लिए भी यूनिवर्सिटी नहीं लौटा।
6. डॉ. निसार उल हसन दिल्ली पुलिस को एक अन्य डॉ. निसार उल हसन की भी तलाश है। निसार दिल्ली ब्लास्ट के बाद से फरार है। निसार फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था। उसे कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के कारण अस्पताल से बर्खास्त कर दिया गया था। निसार पर 2023 में आरोप तय किए गए थे।
अब पढ़िए अल फलाह यूनिवर्सिटी कहानी…
दिल्ली धमाके का एक कनेक्शन मध्य प्रदेश के महू से जुड़ता नजर आ रहा है। ब्लास्ट का मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी फरीदाबाद की जिस अल फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था, उसका चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी मूल रूप से महू का रहने वाला है।
जांच के दौरान पता लगा कि जवाद ने सबसे पहले अल फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी के नाम से कारोबार शुरू किया था। मुनाफे का लालच देकर लोगों से निवेश कराया। फिर 2001 में आर्थिक गड़बड़ी के बाद परिवार समेत दिल्ली भाग गया। फरीदाबाद में कॉलेज की नींव रखी, जो बाद में विश्वविद्यालय में तब्दील हो गई।
महू वाला घर खाली, गेट पर ताला

महू में जवाद के परिवार का मकान कायस्थ मोहल्ले में बना है।
महू के एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी ने कहा- जवाद और उसके परिवार के पुराने रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी गई है। जवाद का परिवार करीब 25 साल पहले महू के कायस्थ मोहल्ले में रहता था। उसके दो भाई भी यहीं पढ़े-लिखे हैं। पिता मोहम्मद हम्माद सिद्दीकी महू के शहर काजी रह चुके हैं। उसका सौतेला भाई अफाम हत्या के मामले में जेल जा चुका है।
एडिशनल एसपी द्विवेदी ने बताया कि जवाद के महू वाले घर में कोई नहीं रहता है। मुख्य गेट पर ताला लगा है।
वहीं, आईजी अनुराग सिंह (ग्रामीण) ने कहा- हमें इस मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। इंक्वायरी कर रहे हैं। संबंधित रिकॉर्ड भी जुटाए जा रहे हैं।
मैप से समझें धमाका कहां हुआ

ग्राफिक से समझिए ब्लास्ट कैसे हुआ

उमर की कार का रूट ऐसा रहा
