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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चाइनीज मांझे से होने वाली मौतों और चोटों पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने सरकार से पूछा कि चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की गई है। न्यायालय ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि वह चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग को रोकने के साथ-साथ पीड़ितों को उनके मेडिकल खर्च सहित मुआवजा देने पर भी विचार करें। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने अभिभावकों और बच्चों में खतरनाक चाइनीज मांझे के प्रति जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया। चाइनीज मांझे पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने पारित किया। यह आदेश स्थानीय वकील एम.एल. यादव द्वारा 2018 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया। याचिकाकर्ता ने हाल की घटनाओं का हवाला देते हुए चाइनीज मांझे पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। न्यायालय में समाचार पत्रों की रिपोर्टें भी प्रस्तुत की गईं, जिनमें चाइनीज मांझे से लगभग 10 लोगों के घायल होने और कुछ मौतों का जिक्र था। सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने न्यायालय को बताया कि सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है और हाल ही में चाइनीज मांझे की बिक्री व इस्तेमाल रोकने के आदेश जारी किए हैं। इस पर, न्यायालय ने सवाल किया कि जब लोग चाइनीज मांझे से घायल होते हैं या मर जाते हैं, तभी राज्य सरकार हरकत में क्यों आती है। कोर्ट ने सरकार को ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए एक उचित व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया।
चाइनीज मांझे से मौतों पर लखनऊ हाईकोर्ट सख्त:राज्य सरकार को घटनाओं पर रोक लगाने के लिए नियम बनाने का निर्देश
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