US India LPG Import Deal Update; Donald Trump Tariff | IOC BPCL HPCL | टैरिफ के बाद भारत-अमेरिका के बीच पहली डील: जरूरत की 10% गैस US से खरीदेगा भारत, इससे हमारी एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी

Actionpunjab
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नई दिल्ली30 मिनट पहले

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भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल कंज्यूमर है। हम अपनी जरूरत का करीब 88% तेल दूसरे देशों से ही खरीदते हैं। - Dainik Bhaskar

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल कंज्यूमर है। हम अपनी जरूरत का करीब 88% तेल दूसरे देशों से ही खरीदते हैं।

टैरिफ विवाद के बीच भारत और अमेरिका ने पहली डील साइन की है। इस डील के तहत भारत अमेरिका से करीब 2.2 मिलियन टन (MTPA) LPG खरीदेगा। ये भारत की सालाना जरूरत का 10% है। यह डील केवल एक साल यानी 2026 के लिए है।

ये डील भारत की सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) ने अमेरिकी एनर्जी सप्लायर्स- चेवरॉन, फिलिप्स 66 और टोटल एनर्जीज ट्रेडिंग के साथ की है।

भारत दुनिया का दूसरा बड़ा LPG उपभोक्ता है। अभी भारत अपनी LPG जरूरतों का 50% से ज्यादा आयात करता है और ज्यादातर सप्लाई पश्चिम एशिया के बाजारों से आती है।

भारत की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी

  • ये डील भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करेगी।
  • ट्रेडिशनल सोर्सेज पर निर्भरता कम होगी, जिससे सप्लाई चेन ज्यादा स्टेबल बनेगी।
  • दुनियाभर में बदलती कीमतों का असर कम होगा।
  • ये US के साथ ट्रेड बैलेंस करने में मदद करेगा।

सिलेंडर की कीमतें कंट्रोल में रखने में मदद मिलेगी

पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने इस डील को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा- दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते LPG मार्केट्स में से एक अब US सप्लाई के लिए खुल गया है।

भारत के लोगों को सुरक्षित और सस्ता LPG उपलब्ध कराने के हमारे प्रयास में, हम अपनी सोर्सिंग को डाइवर्सिफाई कर रहे हैं। यह डील उस दिशा में एक अहम कदम है।

अमेरिका से बड़ी मात्रा में सोर्सिंग करने का यह कदम नई दिल्ली की रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद पारंपरिक सप्लायर्स पर निर्भरता कम करना, सप्लाई की स्थिरता बढ़ाना और ग्लोबल मार्केट में तेज कीमतों के उछाल से बचाव करना है।

पुरी ने बताया कि पिछले साल ग्लोबल LPG कीमतें 60% से ज्यादा बढ़ गईं, फिर भी सरकार ने उज्ज्वला लाभार्थियों को सिर्फ ₹500-550 प्रति सिलेंडर ही चुकाना पड़ा, जबकि असली लागत ₹1,100 तक पहुंच गई थी। सरकार ने बाकी बोझ खुद उठाया और उपभोक्ताओं को कीमत के झटके से बचाने के लिए ₹40,000 करोड़ से ज्यादा खर्च किए।

मंत्री ने इस US डील को भारतीय घरों के लिए ‘सुरक्षित, सस्ता और विश्वसनीय LPG सप्लाई’ सुनिश्चित करने की दिशा में एक और कदम बताया।

क्या गैस सिलेंडर के दाम घट सकते हैं?

इस डील में सीधे तौर पर सिलेंडर की कीमतें कम करने का कोई वादा नहीं किया गया है। कोई आधिकारिक स्टेटमेंट नहीं आया है कि यह डील सीधे सिलेंडर सस्ता करेगी। हालांकि, सप्लाई के स्थिर और डायवर्सिफाई होने से अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुंचा सकती है।

यह लॉन्ग-टर्म डील भारत को कीमतों में वैश्विक उतार-चढ़ाव से बचाव में मदद करेगी। इससे 2026 में 2.2 मिलियन टन LPG की स्थिर सप्लाई मिलेगी (भारत की 10% जरूरत), जो ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाएगी। स्थिर आयात का फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है।

भारत पर अमेरिका ने 50% टैरिफ लगाया है

ट्रम्प ने रूस से तेल खरीदने के चलते भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है। इसमें 25% रेसीप्रोकल और रूसी तेल खरीद पर 25% पेनल्टी है। इसके अलावा भारत का US के साथ ट्रेड सरप्लस है। अब एनर्जी खरीद बढ़ाकर ट्रेड डील फाइनल करने की कोशिश है।

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