नेपाल से सटे धारचूला की तस्वीर, इस ब्लॉक के कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं आते।
चीन और नेपाल बॉर्डर से सटे पिथौरागढ़ में 15 से ज्यादा गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है। इनमें से कई गांवों में ग्रामीणों को एक कॉल मिलाने के लिए घर से 30-35 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
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हालांकि इनमें से कुछ गांवों में भारतीय संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के टावर एक या दो साल पहले लग चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि कुछ टावर चालू ही नहीं हैं और जो चालू हैं वो 15-15 दिनों तक बंद रहते हैं।
मोबाइल कनेक्टिविटी की इस परेशानी को लेकर हाल ही में लोगों ने जिलाधिकारी से शिकायत की है। जिसमें उन्होंने बताया कि नेटवर्क ना होने से लोगों को सालों से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समस्या का हल नहीं निकला तो अल्मोड़ा में स्थित बीएसएनएल के जीएम कार्यालय का घेराव करेंगे।

धारचूला के गांव जहां आज भी लोग मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी से वंचित हैं।
8 ब्लॉकों में से 3 में ‘नो नेटवर्क’… 1. मुनस्यारी ब्लॉक
एक साल पहले लगा टावर, आज तक चालू नहीं
पिथौरागढ़ के मुनस्यारी ब्लॉक में दाखिम क्षेत्र में संचार सेवा पूरी तरह ठप है। करीब एक साल पहले टावर लगा, लेकिन उसके बाद से हालात जस के तस हैं। भाजपा नेता भगत बाछमी बताते हैं कि अगर यह टावर चालू हो जाता तो दाखिम, सेलमाली, कोटा, खड़िक, राया बजेता, समकोट समेत 9 ग्राम पंचायतों को नेटवर्क मिल सकता था, लेकिन आजतक इसे शुरू ही नहीं किया गया है।
भूख हड़ताल तक कर चुके हैं लोग
दाखिम क्षेत्र में मोबाइल टावर चालू कराने को लेकर स्थानीय लोग भूख हड़ताल तक कर चुके हैं। भाजपा नेता भगत बाछमी बताते हैं कि दूरसंचार विभाग ने पहले समय मांगा था, लेकिन लगातार आश्वासनों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है- “यदि बीएसएनएल टावर जल्द चालू नहीं हुआ तो 28 नवंबर को अल्मोड़ा में जीएम कार्यालय का घेराव, और 29 नवंबर से पिथौरागढ़ मुख्यालय में भूख हड़ताल की जाएगी।”

2. धारचूला ब्लॉक
सुवा, गर्गुवा और तीजम में टावर हैं, लेकिन सेवा गायब
धारचूला ब्लॉक के सुवा गांव में लगा बीएसएनएल टावर दो साल से शोपीस बना हुआ है। जिला पंचायत सदस्य सागर सिंह बिष्ट बताते हैं कि सुवा ही नहीं, बल्कि गर्गुवा और तीजम में भी नेटवर्क 14–15 दिनों तक नहीं आता। जिसके कारण क्षेत्र को लोगों को कनेक्विविटी में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कुछ में अब तक नहीं लग सके टावर
बिष्ट आगे बताते हैं- उमचिया ग्रामसभा के करतो, सुमदुंग और जुम्मा के तोक नाग जैसे इलाकों में तो अभी तक टावर भी नहीं लगे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है की इन इलाकों में भी नेटवर्क की सुविधा दी जाए जिससे ये लोग भी इसका लाभ उठा सकें।

3. मुनाकोट ब्लॉक
मुख्यालय से 20 किमी दूर, लेकिन नेटवर्क नहीं
मुनाकोट ब्लॉक के मड़–मानले गांव का मड़ इलाका जिला मुख्यालय से सिर्फ 20 किलोमीटर दूर है, लेकिन मोबाइल सिग्नल यहां नाम मात्र को भी नहीं आते। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता किशोर धामी बताते हैं-
बीएसएनएल का नेटवर्क घरों के अंदर बिल्कुल काम नहीं करता। नेपाल का नेटवर्क कभी-कभार दिखता है, लेकिन कॉलिंग स्थिर नहीं होती। कई बार लोगों को पेड़ों तक पर चढ़ना पड़ता है।

गांवों में लोगों को नेटवर्क का इंतजार
सीमांत ब्लॉकों के जनप्रतिनिधि बताते हैं कि इन इलाकों के कई युवा सेना में तैनात हैं। संचार की उचित सुविधा नहीं होने से बार्डर में तैनात सैनिक, शहरों में नौकरी पेशा युवा या पढ़ने वाले बच्चाें की भी अपने परिजनों से बातचीत नहीं हो पाती है। इसी तरह से बुजुर्गों को भी अपनों से बातचीत के लिए तरसना पड़ता है।