Justice Surya Kant pending cases and promoting mediation be a priority | जस्टिस सूर्यकांत बोले- पेंडिंग केस निपटाना प्रायोरिटी होगी: विवाद सुलझाने में मीडिएशन गेम चेंजर होगा; 24 नवंबर को CJI पद की शपथ लेंगे

Actionpunjab
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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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देश के अगले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि देश में 5 करोड़ से ज्यादा पेंडिंग केस न्यायपालिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने कहा कि इन बैकलॉग से निपटना और विवाद सुलझाने के लिए मीडिएशन को बढ़ावा देना, उनकी दो प्रायोरिटी होंगी।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग केस की संख्या 90 हजार को पार कर चुकी है। मेरी पहली और सबसे बड़ी चुनौती ये पेंडिंग केस हैं। मैं इस बात में नहीं जा रहा कि यह कैसे हुआ, कौन जिम्मेदार है। हो सकता है लिस्टिंग बढ़ गई हो।

उन्होंने उदाहरण दिया कि दिल्ली के लैंड एक्विजिशन विवाद से जुड़े करीब 1,200 मामले उनके एक फैसले से निपटे थे। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि दूसरा मुद्दा मीडिएशन है। यह विवाद सुलझाने के सबसे आसान तरीकों में से एक है और यह सच में गेम चेंजर हो सकता है।

जस्टिस कांत 24 नवंबर को जस्टिस बीआर गवई की जगह देश के 53वें CJI के रूप में शपथ लेंगे। उन्हें 30 अक्टूबर को प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू ने CJI के तौर पर अपॉइंट किया था।

मीडिएशन को लेकर जागरूकता बढ़ी

जस्टिस कांत ने कहा कि देश में मीडिएशन को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में भारत की बड़ी प्राइवेट कंपनियों, बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के लिए मीडिएशन ट्रेनिंग की मांग की है, ताकि वे लंबे मुकदमों से बच सकें।

देशभर के कोर्ट से पेंडेंसी रिपोर्ट मंगाएंगे

उन्होंने कहा कि वे हाईकोर्ट और देशभर की ट्रायल कोर्ट से भी पेंडेंसी की डिटेल रिपोर्ट मंगवाएंगे। हाईकोर्ट से उन पेंडिंग केस के बारे में पूछा जाएगा जिन पर टॉप कोर्ट की बड़ी कॉन्स्टिट्यूशन बेंच फैसला सुनाएंगी।

दिल्ली-NCR के बढ़ते प्रदूषण पर प्रश्न पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे प्रतिदिन लगभग 50 मिनट मॉर्निंग वॉक करते हैं और मौसम जैसा भी हो यह आदत नहीं छोड़ते।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि AI पर सावधानी सॉल्यूशन के साथ उसकी बीमारी भी समझनी होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्यायिक संस्थानों के लिए बड़ा समाधान दे सकता है, लेकिन इसके जोखिमों को समझकर ही इसका उपयोग बढ़ाना होगा।

जस्टिस सूर्यकांत के यादगार फैसले

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत कई कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच का हिस्सा रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वे संवैधानिक, मानवाधिकार और प्रशासनिक कानून से जुड़े मामलों को कवर करने वाले 1000 से ज्यादा फैसलों में शामिल रहे। उनके बड़े फैसलों में आर्टिकल 370 को निरस्त करने के 2023 के फैसले को बरकरार रखना भी शामिल है।

  • पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की फुल बेंच का हिस्सा थे जिसने 2017 में बलात्कार के मामलों में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को लेकर जेल में हुई हिंसा के बाद डेरा सच्चा सौदा को पूरी तरह से साफ करने का आदेश दिया था।
  • जस्टिस सूर्यकांत उस बेंच का हिस्सा थे जिसने कॉलोनियल एरा के राजद्रोह कानून को स्थगित रखा था। साथ ही निर्देश दिया था कि सरकार की समीक्षा तक इसके तहत कोई नई FIR दर्ज न की जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन समेत समस्त बार एसोसिएशनों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाने का निर्देश देने का श्रेय भी जस्टिस सूर्यकांत को दिया जाता है।
  • जस्टिस सूर्यकांत सात जजों की बेंच में शामिल थे जिसने 1967 के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के फैसले को खारिज कर दिया था। यूनिवर्सिटी के संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खुल गया था।
  • वे पेगासस स्पाइवेयर मामले की सुनवाई करने वाली बेंच का हिस्सा थे, जिसने गैरकानूनी निगरानी के आरोपों की जांच के लिए साइबर एक्सपर्ट का एक पैनल बनाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में खुली छूट नहीं मिल सकती।

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