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गाजियाबाद में प्रदूषण रेड जोन में है।
गाजियाबाद में प्रदूषण से अभी राहत मिलती नहीं दिख रही। हालांकि आज एक्यूूआई 400 से नीचे आया है। यहां हवा लगातार जहरीली बनी हुई है। पिछले एक सप्ताह से प्रदूषण में गाजियाबाद देश में पहले स्थान पर था, आज हापुड़ की स्थिति सबसे अधिक बिगड़ी है। नोएडा, दिल्ली औ
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गाजियाबाद में डीजल से चलित ऑटो टेंपो बंद हैं, वहीं बीएस 4 वाहन भी प्रतिबंधित हैं। आज सुबह तापमान 8.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन में अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। दिन में हल्की धूप रहेगी।
यूपी के इन शहरों की हवा जहरीली
गाजियाबाद समेत यूपी के 6 शहरों में एक्यूआई रेड जोन में भी भी बहुत अधिक पहुंच गया है, जहां लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी है। शहर में चारों तरफ प्रदूषण ही प्रदूषण है। सुबह के समय हल्की धुंध भी शुरू हो गई है। दिल्ली के अलावा यूपी के गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, नोएडा, बागपत और मुजफ्फरनगर की भी यही स्थिति है। लोगों को सांस लेने में लगातार दिक्कत हो रही है।
दिल्ली और यूपी में इन जिलों का AQI सबसे अधिक
| शहर | AQI |
| हापुड़ | 403 |
| नोएडा | 390 |
| ग्नेटर नोएडा | 382 |
| दिल्ली | 363 |
| गाजियाबाद | 348 |
| मेरठ | 346 |
| बुलंदशहर | 336 |
आंखों में होने लगती है जलन
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुमान अब एक्यूआई बढ़ने की अधिक संभावना नहीं है, यदि बढ़ता है तो ऐसे में सांस संबंधी रोगियों के लिए यह और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और अस्वस्थता जैसी समस्या हो सकती है।
गाजियाबाद के पल्मोनोलोजिस्ट डॉ. शरद जोशी ने बचाव के लिए सभी को बाहरी गतिविधियों के दौरान N95 या डबल सर्जिकल मास्क पहनने की सलाह दी है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। वहीं, प्रशासन ने भी प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।
ये हैं शहरों में पॉल्यूशन के बड़े कारण
- वायु प्रदूषण में पीएम-10 का 86 प्रतिशत उत्सर्जन सड़कों की धूल के कारण हो रहा है। 6% उत्सर्जन वाहनों से निकलने वाले धुएं से हो रहा है। निर्माण कार्य से 5% व इंडस्ट्री की भूमिका 3% है।
- पीएम-2.5 में 72% हिस्सेदारी सड़कों के धूल की है। 20% वाहनों से हो रहा है। 6% उद्योगों व 3% निर्माण कार्यों के कारण यह हो रहा है।
- वायु प्रदूषण के लिए दोषी सल्फर डाइऑक्साइड की सबसे अधिक 58% मात्रा उद्योगों से आ रही है। वाहनों से यह 21% आ रहा है। नाइट्रोजन आक्साइड का सबसे बड़ा कारक वाहन हैं।
प्रदूषण की वजह पराली जलाना उत्तर और मध्य भारत में दिवाली के बाद पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस वजह से प्रदूषण बढ़ने की रफ्तार भी तेज होने लगती है। हरियाणा और पंजाब में सबसे ज्यादा पराली जलाई जाती है। 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पराली जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। इससे किसानों को पराली का सफाया करने में परेशानी होने लगी।
केंद्र सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) अधिनियम 2021 के तहत पराली जलाने पर नियम लागू किए। इसके मुताबिक 2 एकड़ से कम जमीन पर पराली जलाने पर 5,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है। 2 से 5 एकड़ जमीन पर 10,000 रुपए और 5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर पराली जलाने पर 30,000 रुपए का जुर्माना लगता है।