गांव उष्मापुर में धरने पर बैठे ग्रामीण, मौके पर पहुंची एसडीएम।
महेंद्रगढ़ जिले के गांव उष्मापुर में ग्रामीणों ने स्टोन क्रेशर संचालकों, ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही और लगातार हो रही ब्लास्टिंग के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। काफी समय बाद मौके पर पहुंची एसडीएम ने ग्रामीणों का मांग पत्र लिया और उन्हें सोमवार को एसडीएम का
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ग्रामीणों ने बताया कि गांव उष्मापुर में लंबे समय से चल रही माइनिंग, स्टोन क्रेशर संचालन और पहाड़ी कटान के कारण उनके जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

लोगों का आरोप- ब्लास्टिंग और क्रेशरों की गतिविधियों से घरों में दरारें आ गई।
ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आ गई
ग्रामीणों का कहना है कि ब्लास्टिंग और क्रेशरों की गतिविधियों से उनके घरों में दरारें आ गई हैं। धूल और शोर के कारण उनका जीवन दूभर हो गया है, भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, और बच्चों व बुजुर्गों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। इसी के विरोध में आज से आंदोलन की शुरुआत की गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि वे कई बार शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने गांव की प्राकृतिक पहाड़ी, जो सामुदायिक संपत्ति है, पर ग्रामसभा की अनुमति के बिना दोबारा लीज प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भी विरोध किया।

धरने के बीच ग्रामीणों का समझाने पहुंचे पुलिस अधिकारी।
ग्रामीणों ने 9 प्रमुख मांगें रखीं
धरने में ग्रामीणों ने अपनी नौ प्रमुख मांगें रखीं। इनमें गांव उष्मापुर के आसपास चल रहे स्टोन क्रेशरों को तुरंत बंद करना, ब्लास्टिंग पर तत्काल रोक लगाना और NGT नियमों के अनुसार जांच कराना शामिल है।
अन्य मांगों में गांव की सड़कों से ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही पर तुरंत रोक लगाना, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गांव में ध्वनि व वायु प्रदूषण का निरीक्षण कराना, और माइनिंग से हुए भूजल दोहन व पर्यावरणीय नुकसान की जांच करना शामिल है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि नई माइनिंग लीज या टेंडर ग्रामसभा की लिखित अनुमति के बिना न किया जाए, पहाड़ी और वन क्षेत्र में हुई कटाई की जांच व कार्रवाई हो, ब्लास्टिंग से हुए घरों के नुकसान का सरकारी मुआवजा दिया जाए, और माइनिंग क्षेत्र में 24×7 CCTV व ड्रोन निगरानी लागू की जाए।
जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों द्वारा अपनी समस्याओं को लेकर दिए जा रहे धरने स्थल पर एसडीएम कनिका गोयल और माइनिंग अधिकारी मनीषा शर्मा मौके पर पहुंचीं। ग्रामीणों ने उन्हें ज्ञापन सौंपा, जिस पर एसडीएम ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।