दिनेश फलाहारी ने कहा कि अगर मुस्लिम मथुरा से मस्जिद हटाते हैं तो वह मुस्लिम समाज को मेवात में दस एकड़ जमीन देने को तैयार हैं
ASI के पूर्व रीजनल डायरेक्टर के के मोहम्मद ने कहा कि मुस्लिमों को मथुरा और ज्ञानवापी की जगह छोड़ देनी चाहिए। मथुरा श्री कृष्ण जन्म भूमि है वहीं ज्ञानवापी जो भगवान शिव से जुड़ी है। ASI के पूर्व रीजनल डायरेक्टर के के मोहम्मद के इस बयान का मथुरा में हिं
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न्यूज एजेंसी से बात करते हुए के के मोहम्मद ने कहा कि ये जगहें मुसलमानों को हिंदू समुदाय के लिए छोड़ देनी चाहिए। मथुरा काशी हिंदुओं के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी मुस्लिमों के लिए मक्का मदीना। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदुओं को अयोध्या,मथुरा और काशी के अलावा अन्य मस्जिदों के पीछे नहीं जाना चाहिए।
पढ़े लिखे मुस्लिम अधिकारी हैं के के मोहम्मद
के के मोहम्मद के इस बयान के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस के पक्षकार दिनेश फलाहारी ने कहा कि वह उनके बयान का समर्थन करते हैं। क्योंकि वह वह एक पढ़े-लिखे मुस्लिम अधिकारी हैं। वह ASI में पहले डायरेक्टर रहे हैं ,उनको मालूम है कि यहां पहले मंदिर था। मंदिर को तोड़कर के मस्जिद बनी थी, जब अंग्रेजों का शासन काल था, उस समय भी जब जांच हुई थी तो यहां मस्जिद के नीचे मंदिर पाया गया था।

श्री कृष्ण जन्मस्थान के पक्षकार ने बयान का समर्थन किया
मुस्लिम समाज को देंगे 10 एकड़ जमीन
दिनेश फलाहारी ने बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यदि मुस्लिम समाज मथुरा से अपनी मस्जिद को हटा लेता है तो हम उसके बदले में श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास की तरफ से 10 करोड रुपए और 10 एकड़ जमीन मेवात में देने को तैयार हैं। दिनेश फलाहारी का कहना है कि वहां मेवात में मुसलमानों की जनसंख्या ज्यादा है और ब्रजभूमि में हिंदुओं की। मुस्लिम मेवात में अपने अल्लाह को याद कर सकते हैं ,हम अपने मथुरा में कृष्ण कन्हैया को जय श्री कृष्णा बोलेंगे। उनका कहना है कि जिस प्रकार मुसलमान के लिए मक्का मदीना जरूरी है उसी प्रकार हिंदुओं के लिए काशी और मथुरा जरूरी है।