Organically cultivated cucumber, now earning lakhs | दोगुनी साइज का खीरा उगाया, अब लाखों की कमाई: 20 दिन तक खराब नहीं होता; यूट्यूब से खाद और कीटनाशक बनाना सीखा – Bali News

Actionpunjab
5 Min Read


यूट्यूब पर वीडियो देखकर आधुनिक तकनीक और ऑर्गेनिक खेती से पाली के किसान ने ऐसा मॉडल बनाया, जो अब दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। बिना फर्टिलाइजर और कीटनाशक के 18 से 20 दिन खराब नहीं होने वाला खीरा तैयार किया।

.

हर दूसरे दिन खेत से 1500 किलो खीरे तोड़े जा रहे हैं, जो सामान्य से ज्यादा है। जैविक खाद और जैविक कीटनाशक खेत पर ही बनाया जाता है। जैविक खेती से लागत एक चौथाई रह गई।

चार महीने की खेती में उन्हें 9 से 10 लाख रुपए का मुनाफा होने की उम्मीद है। अभी किसान हर दूसरे दिन 25 से 30 हजार रुपए का खीरा बाजार में बेच रहे हैं।

म्हारे देस की खेती में आज बात पाली के सोनाणा के किसान मुकेश सिंह राजपुरोहित की…

किसान मुकेश ने बताया कि खेत से 500 से 600 ग्राम तक का खीरा मिल रहा है।

किसान मुकेश ने बताया कि खेत से 500 से 600 ग्राम तक का खीरा मिल रहा है।

11 लाख रुपए की लागत से लगाया पॉली हाउस

किसान मुकेश सिंह राजपुरोहित ने बताया- पहले हम पारंपरिक खेती (गेहूं, चना, राहिड़ा) करते थे। इसी वर्ष मैंने 4 हजार स्क्वायर मीटर क्षेत्र में 11 लाख रुपए की लागत से पॉली हाउस लगवाया। साथ ही 4 हजार स्क्वायर मीटर में ही 2.5 लाख रुपए की लागत से नेट हाउस लगाया।

हमने जानकारी ली तो खीरे की खेती में अधिक मुनाफा नजर आया। अधिकांश किसान पॉलीहाउस में कीटनाशक और अंग्रेजी खाद का इस्तेमाल कर खीरे का उत्पादन कर रहे थे। लेकिन मैंने कुछ अलग करने की सोची और ऑर्गेनिक खीरा उगाने का निर्णय लिया।

मुकेश सिंह राजपुरोहित हर दूसरे दिन खेत से 1500 किलो खीरे तोड़ रहे हैं। इससे 25 से 30 हजार रुपए की इनकम हो रही है।

मुकेश सिंह राजपुरोहित हर दूसरे दिन खेत से 1500 किलो खीरे तोड़ रहे हैं। इससे 25 से 30 हजार रुपए की इनकम हो रही है।

यूट्यूब से जैविक खाद और जैविक कीटनाशक बनाना सीखा

मुकेश सिंह राजपुरोहित ने बताया- मैंने यूट्यूब पर ऑर्गेनिक खेती की समझ रखने वाले कुछ अच्छे लोगों को सुना और सीखा। पॉलीहाउस में फसल की देखरेख के लिए दो व्यक्ति रखे। खेत पर जैविक खाद और कीटनाशक बनाया। पॉलीहाउस में गोबर खाद डालकर मिट्टी तैयार की। ड्रिप लगाकर जमीन के ऊपर प्लास्टिक (मल्चिंग) बिछाई। इससे खरपतवार नहीं उगती है। 23 सितंबर को खीरे के बीज लगाए।

जैसे-जैसे पौधे बढ़ना शुरू हुए, रस्सी की सहायता से उन्हें 6-7 फीट ऊंचे तारों पर लपेटा गया। करीब 37 दिन बाद 30 अक्टूबर को पहली बार खीरे की तुड़ाई की। 30 अक्टूबर के बाद से हर दूसरे दिन 1500 किलो खीरे का उत्पादन हो रहा है, जिससे रोजाना 25 से 30 हजार रुपए का मुनाफा हो रहा है।

जैविक खाद और कीटनाशक बनाने के लिए सामग्री को मिलाकर पीसा जाता है। पीसने के बाद कुछ दिन उसे छाया में रखा जाता है। इसे छानकर छिड़काव और ड्रिप माध्यम से फसल में दिया जाता है।

जैविक खाद और कीटनाशक बनाने के लिए सामग्री को मिलाकर पीसा जाता है। पीसने के बाद कुछ दिन उसे छाया में रखा जाता है। इसे छानकर छिड़काव और ड्रिप माध्यम से फसल में दिया जाता है।

18 से 20 दिन खराब नहीं होता खीरा

मुकेश सिंह ने बताया- कीटनाशक वाला खीरा तोड़ने के कुछ दिनों में ही खराब होने लग जाता है। उसे छीलने के बाद कुछ ही समय में पानी छोड़ना शुरू कर देता है। साथ ही उसका वजन 200 से 300 ग्राम और साइज 6 से 7 इंच होती है।

वहीं हमारा ऑर्गेनिक खीरा 500 से 600 ग्राम का होता है। ऑर्गेनिक खीरे की चमड़ी मोटी होने कारण यह 18 से 20 दिन खराब नहीं होता है। साथ ही छीलने के लंबे समय बाद तक एक्स्ट्रा पानी नहीं छोड़ता है। इसकी लंबाई 13 इंच तक पहुंच जाती है।

जीवामृत (खाद) और जैविक कीटनाशक को ड्रम में भरकर रखा जाता है।

जीवामृत (खाद) और जैविक कीटनाशक को ड्रम में भरकर रखा जाता है।

बाहर भेजने से बढ़ जाती है लागत

मुकेश सिंह ने बताया- सरकार द्वारा ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रोत्साहन राशि तो दी जाती है। लेकिन सबसे बड़ी दुविधा यह है कि ऑर्गेनिक फसलों के लिए कोई मंडी नहीं है। ऑर्गेनिक खीरे को जोधपुर, गुजरात और मुंबई भेजना पड़ता है। किराया ज्यादा लगने से मुनाफा कम हो जाता है।

स्थानीय बाजार में ऑर्गेनिक खीरे और सामान्य खीरे को लेकर जागरूकता कम है, जिसके कारण दोनों खीरों के दाम लगभग बराबर मिलते हैं।

……..

खेती किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें..

3 महीने में गाजर से 100 करोड़ का कारोबार:बिहार, पंजाब सहित कई राज्यों में डिमांड; रोजाना 20 क्विंटल से ज्यादा की मंडी में सप्लाई

देशभर में मशहूर राजस्थान के श्रीगंगानगर की गाजर डिमांड में है। श्रीगंगानगर की साधुवाली मंडी में रोजाना 20 क्विंटल गाजर बिकने को आ रही है। (पढ़ें पूरी खबर)

​​​​​

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *