Enforcement Directorate Freezes Probo’s ₹117 Cr Over Illegal Betting | गुरुग्राम में प्रोबो की 117.41 करोड़ की संपत्ति कुर्क: गेमिंग प्लेटफॉर्म पर लोगों को फंसाया; ‘हां या ना’ के जवाबों से करोड़ों कमाए – gurugram News

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ईडी ने गुरुग्राम बेस्ड ऑनलाइन गेमिंग कंपनी प्रोबो की 117 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुग्राम स्थित प्रोबो मीडिया टैक्नोलॉजीज कंपनी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने कंपनी और उसके निदेशकों के परिवार के सदस्यों की करीब 117.41 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप स

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प्रोबो ऐप और वेबसाइट ‘ऑनलाइन गेमिंग’ के नाम पर ऑनलाइन जुआ चलाती थी। कंपनी खुद को स्किल-बेस्ड गेमिंग प्लेटफॉर्म बताती थी, लेकिन जांच में पता चला कि यह यूजर्स को ‘हां या ना’ वाले सवालों के जरिए जुए में फंसाती थी। इससे यूजर्स को धोखा दिया जाता था और कंपनी को भारी मुनाफा होता था।

ईडी ने गुरुग्राम बेस्ड ऑनलाइन गेमिंग कंपनी प्रोबो की 117 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है।

ईडी ने गुरुग्राम बेस्ड ऑनलाइन गेमिंग कंपनी प्रोबो की 117 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है।

हरियाणा और उत्तर प्रदेश में एफआईआर

यह जांच हरियाणा के गुरुग्राम, पलवल और उत्तर प्रदेश के आगरा में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने उन्हें आसानी से पैसे कमाने का लालच देकर ठगा। ईडी की जांच से पता चला कि कंपनी के निदेशकों व प्रमोटर्स की आपराधिक गतिविधियों से करीब 1,245.64 करोड़ रुपए के ‘क्राइम से इनकम’ हुई।

तीन प्वाइंट से समझे प्रोबो ने कैसे यूजर्स को ठगा…………

स्किल-बेस्ड गेमिंग का झूठा दावा: कंपनी ने खुद को ओपिनियन ट्रेडिंग या स्किल-बेस्ड प्लेटफॉर्म बताया, जहां ज्ञान और एनालिसिस से पैसे कमाए जा सकते हैं। लेकिन, असल में सभी सवाल सिर्फ हां या ना वाले थे, जिनके सिर्फ दो आउटकम होते थे। यह पूरी तरह जुए (गेम्बलिंग) पर आधारित था, न कि स्किल पर। इससे यूजर्स को लगता था कि यह लीगल और सुरक्षित है, जबकि यह धोखा था।

पैसे का लालच और भ्रामक विज्ञापन: भ्रामक एड और आसान पैसे कमाने के वादों से यूजर्स को लुभाया गया। शुरू में छोटी जीत दिखाकर या ज्यादा रिटर्न का लालच देकर लोगों को ज्यादा निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था। इससे यूजर्स बार-बार पैसे डालते और लंबे समय में ज्यादातर हार जाते, जबकि कंपनी को भारी मुनाफा होता।

पहुंच आसान बनाई: ऐप में प्रॉपर KYC नहीं था, नाबालिगों को रोकने का कोई सिस्टम नहीं था। इससे कोई भी आसानी से रजिस्टर कर जुआ खेल सकता था। प्लेटफॉर्म का इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐसा था कि लंबे समय में यूजर्स पैसे हारते रहते, जिससे उनकी मेहनत की कमाई कंपनी के पास चली जाती।

अगस्त में गेमिंग एक्टिविटीज बंद की

कुर्क की गई संपत्तियों में कंपनी के नाम पर फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर्स में निवेश, डिमांड ड्राफ्ट, बैंक बैलेंस और निदेशकों के परिवार के सदस्यों के नाम पर फ्लैट और अपार्टमेंट शामिल हैं। नए ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025 लागू होने के बाद प्रोबो ने अगस्त 2025 में अपना ऑपरेशन बंद कर दिया था। ईडी की तरफ से बताया गया है कि अभी जांच जारी है और आगे भी कार्रवाई हो सकती है।

284.5 करोड़ रुपए पहले फ्रीज किए थे

इस मामले में, प्रोबो मीडिया टैक्नोलॉजीज और उसके प्रवर्तकों से संबंधित परिसरों पर पीएमएलए, 2002 के तहत 8 और 9 जुलाई, 2025 को तलाशी अभियान चलाया गया था। तब ईडी ने 284.5 करोड़ रुपए के निवेश को फ्रीज किया था।

3 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का दावा

प्रोबो की आधिकारिक वेबसाइट और ऐप स्टोर लिस्टिंग के अनुसार उनके ऐप पर 3 करोड़ से अधिक यूजर्स थे। कंपनी द्वारा भारत का सबसे बड़ा ओपिनियन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होने का दावा किया जाता था। मई 2025 के एक ब्लॉग पोस्ट में कंपनी ने दावा किया कि ऐप पर 4.7 करोड़ से अधिक यूजर्स एक्टिव हैं।

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