नई दिल्ली42 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

मद्रास हाईकोर्ट के जज जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ 9 दिसंबर को महाभियोग प्रस्ताव को लेकर विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी।
मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ विपक्षी सांसदों के महाभियोग प्रस्ताव का देश के 56 पूर्व जजों ने विरोध किया है। पूर्व जजों ने खुले पत्र में कहा कि यह कदम जजों पर राजनीतिक-वैचारिक दबाव बनाने और डराने की कोशिश है।
पूर्व जजों ने कहा कि सांसदों के आरोप मान भी लिए जाएं, तब भी किसी जज को उसके विचारों या फैसलों के आधार पर महाभियोग की धमकी देना न्यायपालिका की आजादी पर हमला है। उन्होंने कहा कि आज एक जज को निशाना बनाया गया तो कल पूरी न्यायपालिका पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने याद दिलाया कि इमरजेंसी में भी कुछ जज राजनीतिक असहमति के कारण निशाने पर आए थे लेकिन न्यायपालिका ने तब भी स्वतंत्रता बनाए रखने की लड़ाई लड़ी थी। जजों को सिर्फ संविधान और अपनी शपथ के मुताबिक काम करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दबाव में।
दरअसल, जस्टिस स्वामीनाथन ने 4 दिसंबर को मंदिर और दरगाह से जुड़े मामले में हिंदुओं के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद 9 दिसंबर को प्रियंका गांधी वाड्रा समेत इंडिया गठबंधन के 100 से ज्यादा सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था।

जस्टिस स्वामीनाथन जून 2017 में मद्रास हाईकोर्ट के एडिशनल जज बने और बाद में वे परमानेंट जज बने।
56 पूर्व जजों के लेटर की 4 प्रमुख बातें…
- महाभियोग न्यायपालिका की ईमानदारी की रक्षा करने के लिए है, न कि जजों पर दबाव डालने या बदला लेने के लिए इस्तेमाल करने।
- महाभियोग और सार्वजनिक आलोचना को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
- हाल के सालों में कई पूर्व CJI दीपक मिश्रा, रंजन गोगोई, एसए बोबडे और डीवाई चंद्रचूड़ साथ ही मौजूदा CJI सूर्यकांत भी तब निशाने पर आए, जब उनके फैसले कुछ राजनीतिक दलों को पसंद नहीं आए।
- पूर्व जजों ने सभी संस्थानों, सांसदों, वकीलों और आम लोगों से अपील की कि वे इस कदम का विरोध करें और इसे आगे न बढ़ने दें।
मंदिर के फैसले से शुरू हुआ विवाद
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक राइट-विंग एक्टिविस्ट की याचिका पर 4 दिसंबर को सुनवाई करते हुए एक मंदिर और दरगाह से जुड़े मामले में हिंदुओं के पक्ष में फैसला दिया था। जस्टिस स्वामीनाथन ने सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के अधिकारियों को दूसरे पक्ष के विरोध के बावजूद दीपथून पर शाम 6 बजे तक दीपक जलाने का आदेश दिया था।
इस आदेश के बाद तमिलनाडु सरकार काफी भड़क गई थी और आदेश मानने से ही इनकार कर दिया। इसी के बाद से ही विरोध शुरू हुआ था।
जस्टिस स्वामीनाथन के आदेश को तमिलनाडु सरकार ने लागू करने से मना कर दिया। सरकार ने इसके पीछे कानून-व्यवस्था बिगड़ने का हवाला दिया था। इसी को आधार बनाकर महाभियोग लाने का तर्क दिया गया। अपने फैसले में जज ने स्पष्ट कहा था कि दीपथून पर दीप जलाने से दरगाह या मुसलमानों के अधिकारों पर कोई असर नहीं होगा।
जानें पूरा विवाद
तिरुपरनकुंद्रम तमिलनाडु राज्य के मदुरै शहर से 10 किमी दूर दक्षिण में स्थित भगवान मुरुगन के छ: निवास स्थानों में से एक है। थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित सुब्रमण्यस्वामी मंदिर का इतिहास छठी शताब्दी तक जाता है।
यहां की ऊपरी चोटी पर लंबे समय से कार्तिगई दीपम जलाया जाता जा रहा है। ऐसा कहा जाता है कि अंग्रेजी शासन के समय इस पर कुछ लोगों ने कब्जा करने की कोशिश की थी। 17वीं शताब्दी में सिकंदर बधूषा दरगाह का निर्माण हो गया। इसके बाद से ही विवाद शुरू हो गया।
————————————-
ये खबर भी पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट बोला- मद्रास हाईकोर्ट में कुछ तो गड़बड़, करूर भगदड़ पर SIT कैसे बनाई

करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में कुछ सही नहीं हो रहा है, कुछ तो गड़बड़ है। मद्रास हाईकोर्ट ने SIT जांच का आदेश कैसे दे दिया, जबकि मामला मदुरै बेंच के क्षेत्र में आता है, यह समझना जरूरी है। पूरी खबर पढ़ें…