बिल माफी की अफवाह पर सचिवालय पहुंचे लोग
कैथल बिजली बिल माफ होने का एक फर्जी मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके वायरल होने का असर ये रहा कि सैकड़ों की संख्या में जिलेभर से लोग जिला सचिवालय में पहुंच गए। वहां जाकर पता चला कि यह आयोजन बिजली बिल माफ करने के लिए नहीं बल्कि लोक अदालत का था।
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संदेश में लिखा- बिजली के बकाया बिल और बैंक के लोन माफ किए जाएंगे
वायरल संदेश में लिखा गया था कि 13 दिसंबर को लगने वाली लोक अदालत में बिजली के बकाया बिल और बैंक के लोन माफ किए जाएंगे। इस संदेश पर भरोसा कर बड़ी संख्या में लोग जिला सचिवालय कैथल पहुंच गए। जब वहां पर कर्मचारियों द्वारा उनको बताया गया कि ऐसा कोई शिविर या आयोजन किसी विभाग ने नहीं किया तो लोग रोष जताते हुए वापस लौट गए। कुछ लोग भड़क गए और उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों का कहना था कि उन्हें यह सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से मिली कि सरकार लोक अदालत के जरिए बकाया बिजली बिल और बैंक लोन माफ करेगी, इसलिए वे यहां पहुंचे हैं।
नहीं थे ऐसे आदेश
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने साफ किया कि सरकार की ओर से इस तरह का कोई आदेश या दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। इस अफवाह के कारण सचिवालय में लंबी भीड़ लग गई और लोग घंटों परेशान होते रहे। प्रशासन ने अपील की है कि नागरिक किसी भी योजना या छूट संबंधी जानकारी की पुष्टि केवल सरकारी आधिकारिक स्रोतों से ही करें और सोशल मीडिया पर फैल रहे संदेशों पर यकीन न करें।

बिजली बिल माफी के लिए सचिवालय पहुंची पाई निवासी कृष्णा देवी
गांव पाई से बिजली बिल माफ होने की उम्मीद लेकर पहुंची कृष्णा देवी ने कहा कि उनका हजारों रुपए बिजली बिल आया है। उनके मोबाइल पर मैसेज आया था कि बिजली बिल माफी के लिए शिविर लगा है। वे कैथल पहुंच गई। यहां आकर पता चला कि मैसेज फर्जी था।

वायरल मैसेज के बारे में बताते कैथल निवासी कृष्ण
कैथल निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर मैसेज देखा और बिल माफ करवाने के लिए सचिवालय परिसर में पहुंच गया। यहां अधिकारियों और कर्मचारियों ने बताया कि बिल माफ नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में वह निराश है।
कैथल जिला अदालत के वकील अरविंद खुरानिया ने बताया कि लोक अदालत इसलिए लगाई जाती है कि कोर्ट के ऐसे केस जिनका फैसला आपसी सहमति से हो सकता है। इसमें पक्ष अपनी शर्ताें के हिसाब से राजीनामा कर लेते हैं। जहां तक बिजली या पानी के बिल माफ करने की बात है, ये मिथ्या प्रचार किया गया। जिसने ये संदेश वायरल किया वह गलत है। लोगों को ऐसे संदेशों के विश्वास में नहीं आना चाहिए।