Former MLA had a plan B ready in Jhansi | झांसी में पूर्व विधायक का तैयार था प्लान-B: सरेंडर अर्जी स्वीकार न होती तो जमानत वापस लेकर जाना था जेल, आज हाईकोर्ट में सुनवाई – Jhansi News

Actionpunjab
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झांसी में जज के सामने सरेंडर करने वाले सपा के पूर्व विधायक दीपनारायण यादव ने प्लान-बी भी तैयार किया था। कोर्ट में सरेंडर अर्जी खारिज होते ही पुलिस उनको गिरफ्तार कर सकती थी। इससे बचने के लिए जिन केस में दीपनारायण यादव जमानत पर हैं।

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उनके जमानतदार को कोर्ट में बुलाया गया था। अर्जी खारिज होते ही जमानतदार अपनी जमानत वापस ले लेता और उन्हें पहले के मुकदमे में जेल जाना पड़ता। 20 नवंबर को पूर्व विधायक व अन्य के खिलाफ मोंठ थाने में डकैती एवं रंगदारी के आरोप में केस दर्ज हुआ था।

तेज तर्रार अधिकारियों की 3 टीमें गिरफ्तारी के लिए दबिश देती रह गई और पूर्व विधायक ने चकमा देकर गुरुवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। जहां से उनको जेल भेज दिया गया।

आज हाईकोर्ट में सुनवाई है

13 दिसंबर को पूर्व विधायक दीपनारायण यादव की 20 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति कुर्क की गई।

13 दिसंबर को पूर्व विधायक दीपनारायण यादव की 20 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति कुर्क की गई।

पूर्व विधायक दीपनारायण यादव ने FIR निरस्त करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें आज यानी शुक्रवार को सुनवाई होनी है। इधर, उन्होंने कोर्ट में आत्म समर्पण की अर्जी प्रस्तुत कर दी थी। उनको 15 दिसंबर को कोर्ट में सरेंडर करना था।

मगर, उनके वकील ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया कि 19 दिसंबर को हाईकोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद है। आत्मसमर्पण की तारीख 20 दिसंबर करने की गुहार लगाई। पुलिस भी मान चुकी थी कि 19 दिसंबर के बाद ही पूर्व विधायक सरेंडर करेंगे। इसलिए गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही थी।

बाइक से मुंह पर मास्क लगाकर पहुंचे

वकीलों ने बताया- कोर्ट खुलने से पहले ही गुरुवार सुबह लगभग 9:45 बजे पूर्व विधायक बुलेट बाइक से कोर्ट पहुंचे। वे हेलमेट और मुंह पर मास्क लगाए थे। तब पुलिस का इतना सख्त पहरा नहीं था। यहां पहुंचते ही वकीलों ने उनको घेर लिया और सीधे अपर सत्र न्यायाधीश एवं एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जितेंद्र यादव की कोर्ट में ले गए।

यहां उनके वकील ने सरेंडर की अर्जी दाखिल की। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर ली। दोपहर लगभग दो बजे कोर्ट ने पूर्व विधायक दीपनारायण यादव को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

अब जानिए आगे क्या होगा

वकीलों का कहना है- अब पुलिस कोर्ट से अनुमति लेकर जेल जाकर पूर्व विधायक दीपनारायण यादव से पूछताछ करेगी। जो अज्ञात 3 आरोपी है, वो कौन थे? 32 हजार रुपए की डकैती के पैसे कहां है? आदि सवाल पूछे जा सकते हैं। इसके बाद पुलिस रिकवरी के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर पूर्व विधायक का पुलिस रिमांड भी मांग सकती है। उधर, पूर्व विधायक भी अपनी जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सकते हैं।

दीपनारायण पर दर्ज हैं 63 मुकदमें

दीपनारायण यादव, समाजवादी पार्टी की टिकट पर गरौठा विधानसभा से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। उन पर करीब 63 मुकदमें दर्ज हैं।

ढाई साल पहले ही जेल से छूटे थे

पूर्व विधायक दीपनारायण यादव ढाई साल पहले ही जेल से रिहा हुए थे। उनके खिलाफ 16 सितंबर 22 को झांसी कोर्ट में पेशी पर आए कुख्यात अपराधी लेखराज यादव को पुलिस कस्टडी से छुड़ाने की कोशिश का आरोप था। पुलिस ने 26 सितंबर 2022 को उन्हें अरेस्ट कर जेल भेज दिया था। 3 महीने के दरिम्यान पूर्व विधायक पर 7 केस दर्ज हुए थे। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पूर्व विधायक दीपनारायण यादव जेल से रिहा हो गए थे। अब दोबारा उनको जेल जाना पड़ा है।

टाइम लाइन

  • 20 नवंबर को भुजौंद के रहने वाले प्रेम सिंह पालीवाल ने मोठ थाने में पूर्व विधायक दीपनारायण सिंह यादव, मोठ के मोहल्ला अखाड़ापुरा निवासी अनिल यादव व 3 अन्य के खिलाफ रंगदारी मांगने व 32 हजार की डकैती के आरोप में बीएनएस की धारा 310(2), 126(2), 308(5), 119(1), 352, 351(3), 317(3) में केस दर्ज कराया।
  • 24 नवंबर को दीपनारायण के करीबी अशोक गोस्वामी को मोठ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से पुलिस ने 35 लाख रुपए व चार-पहिया वाहन बरामद किया।
  • 11 दिसंबर को पूर्व विधायक के जमानतदार मोठ निवासी ऋषि यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
  • 11 दिसंबर को उनके मकान पर कुर्की का नोटिस चस्पा किया गया।
  • 12 दिसंबर को 25 हजार के इनामी और इस मुकदमे के आरोपी अनिल यादव ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।
  • 13 दिसंबर को पूर्व विधायक दीपनारायण यादव की 20 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पत्ति कुर्क की गई। इसमें करगुवांजी, भगवंतपुरा स्थित मून सिटि, बनगुवां गांव की सम्पत्ति शामिल थी।
  • न्यायालय में दायर याचिका के आधार पर 15 दिसंबर को पूर्व विधायक को आत्मसमर्पण करना था, मगर वह न्यायालय नहीं पहुंचे। इसलिए न्यायालय में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को निर्धारित की थी।
  • 18 दिसंबर की सुबह बुलेट पर सवार पूर्व विधायक कोर्ट पहुंच गए। कोर्ट खुलते ही उन्होंने एमपी-एमएलए न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। यहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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