पुणे28 मिनट पहले
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को पुणे में कहा कि आज दुनिया भारत को पहले से ज्यादा पॉजिटिव नजरिए से देखती है। उन्होंने कहा कि भारत की इमेज में आया यह बदलाव एक सच्चाई है, जिसे नकारा नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक रैंकिंग में बड़ा बदलाव आया है। अब दुनिया में ताकत और असर के कई सेंटर बन गए हैं। कोई भी देश चाहे वह कितना ही ताकतवर क्यों न हो, सभी मामलों पर अपनी मर्जी नहीं थोप सकता।
जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया भारत को पहले से ज्यादा पॉजिटिव और गंभीरता से देखती है। इसकी वजह भारत का मजबूत नेशनल ब्रांड और हमारी पर्सनल रेप्युटेशन दोनों हैं, जिनमें काफी सुधार हुआ है।
जयशंकर ने बताया कि अब तक ज्यादातर देशों ने ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और सर्विसेज के जरिए दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। भारत ने भी यही रास्ता अपनाया है और हर पैमाने पर आगे बढ़ा है, लेकिन भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका ह्यूमन रिसोर्स यानी लोग हैं।

जयशंकर की स्पीच की 4 प्रमुख बातें…
- आज भारत को सबसे ज्यादा उसके स्किल और टैलेंट की वजह से पहचाना जाता है। यही चीज भारत के नेशनल ब्रांड को मजबूत बना रही है। आज भारतीय दुनिया से ज्यादा आत्मविश्वास और ज्यादा कैपेबिलिटी के साथ मिलते हैं।
- आज भारतीयों को मेहनती, टेक्नोलॉजी समझने वाला और परिवार को अहमियत देने वाला माना जाता है। विदेश यात्राओं में उन्हें सबसे ज्यादा तारीफ भारतीय प्रवासियों की सुनने को मिलती है। भारत में बिजनेस और जीवन आसान होने से देश को लेकर पुरानी सोच पीछे छूट रही है।
- जैसे-जैसे लोगों की आमदनी और मांग बढ़ेगी, वैसे-वैसे समाज की जरूरतें भी बढ़ेंगी। देश को इंजीनियर, डॉक्टर, साइंटिस्ट के साथ-साथ टीचर, आर्टिस्ट और खिलाड़ी भी चाहिए होंगे। पिछले 10 साल में देश के हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। आगे और सुधार की गुंजाइश है।
- मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज को लेकर बहस होती रहती है लेकिन असल में दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर भारत को टेक्नोलॉजी के साथ आगे रहना है तो उसे आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग मजबूत करनी होगी। इससे सर्विस सेक्टर भी और बेहतर होगा।

जयशंकर ने शनिवार को पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में स्पीच दी।
जयशंकर बोले- सही फैसलों से आगे बढ़ा भारत, पश्चिमी देश पीछे हुए
ग्लोबलाइजेशन ने हमारे सोचने और काम करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। आजादी के बाद कई देशों ने तरक्की इसलिए की क्योंकि वे अपने फैसले खुद लेने लगे। सही नीतियों और अच्छे फैसलों ने बड़ा फर्क डाला।
भारत में अलग-अलग दौर में लीडरशिप और गवर्नेंस की वजह से देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदली। सुधारों के बाद के दौर में खासकर पिछले 10 साल में भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
इसके उलट पश्चिमी देशों में यह सोच बढ़ रही है कि उनकी रफ्तार धीमी हो गई है। वहां कंपनियों ने मुनाफे के लिए उत्पादन बाहर शिफ्ट किया, जिससे उनकी ताकत कमजोर हुई। इस दौर में सबसे ज्यादा फायदा सिर्फ चीन को हुआ है।
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