Haryana Hisar FIR against RTA inspector Panipat company MD | हिसार में RTA इंस्पेक्टर और कंपनी MD पर FIR: डुप्लीकेट चाबी से ट्रक और माल गायब किया; कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई – Hisar News

Actionpunjab
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हिसार में आरटीए इस्पेक्टर और कंपनी मालिक पर केस दर्ज हुआ है। (AI जनरेटेड फोटो)

हिसार की जिला कोर्ट ने एक सनसनीखेज मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरटीओ (RTA) विभाग के इंस्पेक्टर और एक निजी कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। आरोप है कि विभाग ने जब्त किए गए एक ट्रक को फर्जी चाबी लगवाकर और दस्तावेजों

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यह आदेश एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) अनुराधा की कोर्ट ने जारी किए हैं। सदर थाना पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद RTA इंस्पेक्टर हरमिंदर खैरा और पानीपत की इनोवेटिव सोध कंपनी के एमडी वासु गुप्ता के खिलाफ धारा 316(2) BNS (अमानत में ख्यानत) के तहत केस दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी एसआई संदीप के अनुसार अदालत के आदेश पर मामला दर्ज कर लिया गया है। रिकॉर्ड कब्जे में लेकर जांच की जा रही है।

अब जानिए पूरा मामला

दरअसल, राजस्थान के कोटपुतली निवासी परहुराम गुज्जर ने कोर्ट में दी शिकायत में बताया कि उनका ट्रक (नंबर RJ14GH-2001) माल लेकर हिसार आया था। 31 जुलाई 2025 को RTA इंस्पेक्टर हरमिंदर खैरा ने ट्रक को इंपाउंड (जब्त) कर लिया। जब्ती के बाद ड्राइवर पवन कुमार ट्रक की ‘असली चाबियां’ लेकर मालिक के पास चला गया।

रसीद फर्जी, चाबी नकली और ट्रक गायब

पीड़ित परहुराम गुज्जर के अनुसार, जब वह 11 अगस्त को जुर्माना भरने आरटीए दफ्तर पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। इंस्पेक्टर ने कथित तौर पर पानीपत की कंपनी ‘इनोवेटिव सोध’ के एमडी वासु गुप्ता के साथ मिलीभगत की।

दस्तावेजों में दिखाया गया कि ड्राइवर पवन कुमार ने पैसे जमा कराए और ट्रक ले गया, जबकि असली ड्राइवर उस वक्त राजस्थान में था। ट्रक की असली चाबी मालिक के पास थी, इसके बावजूद आरोपियों ने ‘फर्जी चाबी’ बनवाकर ट्रक को माल समेत मौके से गायब कर दिया।

केस से जुड़े 3 बड़े सवाल

  • असली चाबी बिना ट्रक कैसे चला: जब ट्रक की चाबियां मालिक के पास थीं, तो विभाग ने किसे और कैसे ट्रक हैंडओवर कर दिया?
  • ड्राइवर के नाम का गलत इस्तेमाल: जिस ड्राइवर ने ट्रक छुड़ाया ही नहीं, उसके नाम की रसीद किसने और किसके कहने पर काटी?
  • पुलिस की चुप्पी: पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से लेकर सीएम विंडो तक गुहार लगाई, लेकिन एफआईआर के लिए कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ा?

कोर्ट ने 7 दिन में FIR दर्ज करने के दिए थे आदेश

सुनवाई के दौरान वकील अमित गार्शा ने दलील दी कि यह सीधा-सीधा अमानत में ख्यानत और धोखाधड़ी का मामला है। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत पुलिस को आदेश दिया कि 7 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जाए।

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