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बारां में नरेश मीणा पर शनिवार शाम को हमला हुआ। कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी पर लाठियों से हमला किया गया, उनकी कार के कांच तोड़ दिए गए। इसके बाद नरेश मीणा समर्थकों के साथ एसपी बारां ऑफिस गए और धरने पर बैठ गए। बाद में उन्होंने भूख हड़ताल की चेतावनी दी, समर्थको
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सबसे पहले तो आज क्या वाकया हुआ, आप कार में सवार थे मैं एक धार्मिक कार्यक्रम में जा रहा था। उससे पहले वहां एक आखेडी गांव पड़़ता है। वहां मैं एक बैठक में गया था। वहां से जब मैं वापस आ रहा था तो मुझे तो अंदेशा ही नही था। अचानक से एक मकान के सामने कुछ लोग आते है और हमला कर देते है। इनमें से एक के पास हथियार पिस्टल भी, हालांकि उसने लाठी से हमला किया। फिर मैं वहीं बैठ गया, पुलिस का इंतजार करता रहा। थोडी देर बाद मेरे समर्थक इकटठा होने लग गए। उसके बाद उसके(आरोपी) के घर के पास गाडी में कहीं आग लगती है, वो खुद ही उसमें तोडफोड करते है। बाद में पुलिसकर्मी आए और पुलिस ने हमला करने वालों को कस्टडी में लिया। अभी तक यह हुआ है कि राजनीतिक सरंक्षण में गुंडागर्दी करने वालों पर पुलिस कार्यवाही नहीं करती, पकड़ लेती है लेकिन थाने लाकर छोड़ देते हैं। हमे ड़र था कि इनको भी न छोड़ दे इसलिए हम एसपी कार्यालय पहुंचे। वहां आश्वसन के बाद कि सख्त से सख्त कार्रवाई होगी हमने धरना वापस ले लिया। लेकिन हम लोग जल्द ही बारां में सटटा जुआ, हथियारों की खेपे पडी है, अपराधी पनप रहे है, किसानों के मुददो पर, थर्मल पर रोजगार के नाम पर ठेकेदार पैसे काट लेते है जैसे तमाम मुददो को लेकर बारां में बड़ा आंदोलन करेंगे।
जब हमला हुआ था क्या स्थिति बनी थी, कितने लोग थे मैं फ्रंट सीट पर था। दस से बारह लोग थे हमलावर। एक ने बिल्कुल मेरे सामने से हमला किया। गाड़ी थोड़ी स्पीड में थी तो उसने ड्राइवर सीट पर लाठी से हमला किया, जिससे उसके कांच टूट गए। इसके बाद वहां से करीब सौ मीटर दूर जाकर मैं बैठ गया। सोशल मीडिया पर मैनें बताया कि मुझ पर हमला हुआ है। जो हमला हुआ था उसमें ज्यादातर बाहर के लोग थे, बारां के लोग थे। ये सब प्लानिंग के तहत किया गया है।
आपका कहना है कि प्लानिंग थी, रंजिश क्या है, कौन थे आरोपी प्रमोद जैन भाया के खास लोग हैं, उसके सरंक्षण में पहले भी गोलियां चलाई है, हत्या तक की है लेकिन प्रमोद जैन भाया के सरंक्षण में हर बार बचते रहे हैं। जेल नहीं गए। मुझ पर हमला करने वालों में तोलाराम है उसके बेटे हैं और उनके गुंडे दोस्त है। अंता के चुनाव के समय मेरे कार्यकर्ता पोस्टर लगा रहे थे तब इन लोगों ने मारपीट की थी। तब मैनें गुस्से में विरोध किया था, इसे गलत बताया था। तब से ये लोग रंजिश पाल कर बैठे थे। हमला करवा दिया है। आगे भी पता नहीं क्या करेंगे। मैं जिस तरह से नेताओं से लड़ रहा हूं, उनको यही है कि इसे कैसे रोका जाए क्योंकि मैं जेल जाने से तो डरता नहीं हूं। अब इन लोगों का यही है कि हमले करके डराओ।
पुलिस प्रशासन से क्या बात हुई है क्या आश्वासन मिला है हमने उनको कहा है कि मेरे ऊपर हमले के अलावा भाया के इर्द गिर्द जो बदमाश लोग है,(कुछ नाम लेते हुए) कई लोग खुले घूम रहे हैं। पुलिस और इनकी मिलीभगत है। मेरे साथ इस तरह की कोई घटना होती है तो पुलिस प्रशासन के साथ साथ मैं प्रमोद जैन भाया और ओम बिरला को दोषी मानूंगा।
आपने खुद को काला सांप कहा था, क्या मंतव्य था देखिए राजनीति में कांग्रेस बीजेपी के नेताओं ने मुझे चुनाव हराने का काम किया है। तो जब मेरा समय आएगा तो मैं भी जैसा को तैसा करूंगा। यहीं मेरा मतलब था।
अभी तीन विधायक भ्रष्टाचार का खेल करते कैमरे में कैद हुए है, आपका क्या मानना है तुरंत सस्पेंड करना चाहिए, जेल में भेजो। जनता में मैसेज जाए कि नेता अगर गलत करेंगे तो जेल जाएंगे। तीन ही नहीं नब्बे फीसदी ऐसे ही है, सांसद तक है जो अपनी निधि से काम करवाने का पैसा लेते है। भ्रष्टाचार फैला हुआ है, सरपंच तक मलाई खा रहे है। चारों तरफ भ्रष्टाचार है।
आपने अंता से चुनाव लड़ा, नतीजे आपके खिलाफ रहे क्या कारण मानते हैं नतीजे मेरे खिलाफ नहीं थे। मैं अचानक से अनजान जगह से चुनाव लड़ रहा था। जहां मुझे लोग जानते नहीं थे। उसके बाद भी उन्होंने मेरी आवाज को सुना, बात को सुना। जिनके दरवाजे पर बीस बीस हजार रखे गए थे उन्होंने नोट ठुकराए और पचपन हजार वोट दिए, मैं तो आभारी हूं जनता का। मैनें हार नहीं मानी है। सामने वाला तो पैसे के दम पर जीत गया। लोग भी पैसे के लोभ में आ गए क्योंकि वहां गरीबी है, नरेगा में काम करने वाले लोग है जिन्हें दो टाइम रोटी नहीं मिल रही है तो क्या करेंगे। भाया के पास तो भ्रष्टाचार का खूब पैसा है। मैनें तो जनता से कहा था कि पैसे ले लो लेकिन उसे वोट मत देना, अब ये ढाई साल जनता के पैसो की ही वसूली करेंगे। लेकिन अब लोगों में जागरूकता आ रही है, हारे के बाद भी गांव गांव जा रहा हूं लोगों का हुजूम आता है। प्रमोद जैन भााया के तो दो चार आदमी नजर नहीं आते।
क्या लडाई प्रमोद जैन भाया से ही है मेरी भाया से कोई व्यक्तिगत लडाई नही है। मेरी तो हाड़ौती के चारों धन्नासेठों से है। ओम बिरला,प्रमोद भाया, शांति धारीवाल, प्रताप सिंघवी ये जो गठजोड़ की राजनीति करते है उसके खिलाफ हूं। पार्टी को धोखा दे रहे हैं, कार्यकर्ताओं को धोखा दे रहे है। बीजेपी के अपने ही कार्यकर्ताओं की मेहनत पर पानी फेरते है और कांग्रेस की मदद करवाते है। कांग्रेस के अपने कार्यकर्ताओं की मेहनत पर पानी फेरकर बीजेपी की मदद करते है। कार्यकर्ताओं की आत्मा दुखती है। ईडी सीबीआई क्यों नहीं आती भाया यहां जांच के लिए। बडे पदो पर बैठे नेताओं का सरंक्षण मिला हुआ है। ये तो वसुंधरा राजे है जो उसे(प्रमोद) को इलाके में घुसने नहीं दे रही है। नहीं तो ये तो चुनाव जीतने के बाद अमित शाह से मिलकर आया है। कोई बडी बात नहीं अगले लोकसभा से पहले बीजेपी ज्वाइन कर ले।
नरेश मीणा का नाम आते ही आक्रामक चेहरा नजर आता है, नाराजगी दिखती है क्या चुनाव के बाद नरमी आई है लहजे में आज देखा नहीं आपने। मैं कितनी नरमी के साथ था। मैनें शांति के साथ पूरे मामले को बैक किया है कंट्रोल किया है। मैनें समर्थकों को भी समझाया कि सामने वाले ने गलती की है उन पर पुलिस कार्यवाही करेगी। और जो गाडी जली है वह हमारे कार्यकर्ताओं ने नहीं जलाई। हम तो उसके घर के पास ही नहीं गए। खुद ने ही तोडफ़ोड़ कर ली। ये वही प्रमोद जैन भाया के लोग है जिसमें उर्मिला पर हमला करवा लिया, खुद की गाडी पर गोली चला ली। मैं अकेला था, हमला हुआ समर्थक आए। इनका तो यही है कि निर्दोष को फंसा दो। मैं तो आपके जरिये ये निवेदन कर रहा हूं मेरे कहने पर अटरू सीओ से पूछे कि सिंघवी का पीएसओ है शंकर विश्नोई उस पर एनडीपीएस का मुकदमा है थानेदार ने आरोपी बना दिया, बार बार क्यों चेज हो रही है जांच। ये भी पता कर लो।