मनरेगा में बदलाव के खिलाफ ज्ञौपन सौंपते वामपंथी नेता
करनाल में वामपंथी दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। नेताओं ने इस मौके पर नए कानून का
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इससे ग्रामीण गरीबों, किसान मजदूरों और जरूरतमंद लोगों का रोजगार छिन जाएगा। उन्होंने इस कानून को तुरंत रद्द करने और मनरेगा को बहाल कर मजबूत करने की मांग की। नेताओं ने कहा कि कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाना वैचारिक संकीर्णता को दर्शाता है और यह उनका अपमान है। उन्होंने कहा कि वामपंथी पार्टियां वी बी जी राम जी एक्ट का पुरजोर विरोध करती हैं।

मनरेगा को लेकर विरोध प्रदर्शन करते वामपंथी नेता
जानिए– नेताओं ने क्या लगाए आरोप, क्यों है विरोध
- बिना बहस पारित किया गया बिल: प्रदर्शन में शामिल जगपाल राणा, जयनारायण, बिजनेश राणा, जगमाल सिंह, सावित्री सहित अन्य नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन यानी वीबी जीरामजी बिल को न तो संसदीय स्टेंडिंग कमेटी के पास भेजा गया और न ही इस पर संसद में पर्याप्त बहस कराई गई। शीतकालीन सत्र के दौरान तानाशाही रवैये और बहुमत की धक्काशाही के जरिए इसे पारित कर दिया गया।
- मनरेगा खत्म करने का प्रयास : वामपंथी नेताओं ने आरोप लगाया कि नए कानून में रोजगार को अधिकार का संवैधानिक दर्जा खत्म कर दिया गया है। जबकि मनरेगा कानून को पहले व्यापक बहस और सभी दलों की सहमति के बाद संसद में पारित किया गया था। उनका कहना है कि मनरेगा को समृद्ध करने की बजाय सरकार ने उसे खत्म करने का रास्ता अपनाया है।
- ग्रामीण गरीबों को रोजगार से वंचित करेगा नया कानून: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नया वीबी जी राम जी एक्ट न तो सार्वभौमिकता की गारंटी देता है और न ही मांग आधारित काम सुनिश्चित करता है। पीक सीजन में 60 दिन तक काम न देना, राज्यों पर वित्तीय बोझ डालना और केंद्र सरकार का जिम्मेवारी से बचना ग्रामीण गरीबों को रोजगार से वंचित करेगा।

पुतला जलाते वामपंथी नेता
ये रखी गई प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से वीबी जीरामजी कानून को रद्द करने, मनरेगा को बहाल कर मजबूत करने, मनरेगा मजदूरों को 200 दिन काम और 600 रुपए दिहाड़ी देने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों किसान मजदूरों के आक्रोश को समझते हुए वामपंथी दल मनरेगा बहाली के आंदोलन के साथ मजबूती से खड़े हैं।