Read three inspiring stories of Jesus Christ on Christmas, Christmas, 2025, motivational stories of Jesus in hindi | क्रिसमस पर पढ़ें ईसा मसीह के तीन प्रेरक प्रसंग: जो लोग गलत रास्ते पर हैं, उन्हें सबसे ज्यादा मार्गदर्शन की जरूरत है, ऐसे लोगों पर ज्यादा ध्यान दें

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30 मिनट पहले

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आज (25 दिसंबर) ईसा मसीह का जन्मदिन मनाया जा रहा है। ये दिन उनके जीवन और शिक्षाओं को याद करने का अवसर है। ईसा मसीह की कथाएं हमें जीवन में सुख-शांति और सफलता पाने के सूत्र बताती हैं। यहां जानिए ईसा मसीह की तीन कथाएं और उनकी सीख…

पहली कहानी

एक दिन प्रभु ईसा मसीह कुछ ऐसे लोगों के साथ भोजन कर रहे थे, जिन्हें अच्छा नहीं माना जाता था। वे लोग बुरी आदतों में फंसे हुए थे और धर्म के मार्ग से भटक चुके थे।

प्रभु यीशु को बुरे लोगों के साथ भोजन करते हुए देखकर उनके शिष्यों को अच्छा नहीं लगा। शिष्यों ने सोचा कि प्रभु ऐसे लोगों के साथ समय क्यों बिता रहे हैं। बाद में शिष्यों ने प्रभु यीशु से इस बारे में बात की।

शिष्यों की बात सुनकर प्रभु यीशु ने शांत भाव से एक प्रश्न पूछा। उन्होंने पूछा कि आप मुझे बताएं कि स्वस्थ व्यक्ति को वैद्य की अधिक जरूरत होती है या बीमार व्यक्ति को?

शिष्यों ने एक स्वर में उत्तर दिया कि बीमार व्यक्ति को वैद्य की ज्यादा जरूरत होती है।

प्रभु यीशु ने समझाया कि वे स्वयं एक वैद्य की तरह हैं। जो लोग बुराई में फंसे हैं, जो गलत रास्ते पर चल रहे हैं, वे रोगी की तरह हैं। ऐसे लोगों को प्रेम, मार्गदर्शन और सही दिशा की सबसे अधिक आवश्यकता है। मेरा उद्देश्य अच्छे लोगों की प्रशंसा पाना नहीं, बल्कि भटके हुए लोगों को सही रास्ते पर लाना है।

प्रभु यीशु ने शिष्यों को समझाया कि किसी को उसके वर्तमान व्यवहार से नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपी संभावना से देखना चाहिए। यदि समाज बुरे कहे जाने वाले लोगों को भी अपनाने लगे, तो वे भी अच्छे इंसान बन सकते हैं। करुणा, सहानुभूति और प्रेम से ही व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन आ सकता है।

किस्से की सीख

  • लोगों को उनकी गलती से नहीं, उनकी जरूरत से पहचानें।
  • जो गलत रास्ते पर हैं, उन्हें सबसे ज्यादा मार्गदर्शन की जरूरत है।
  • किसी को सुधारने के लिए तिरस्कार नहीं, करुणा अपनाना चाहिए।
  • हर इंसान के भीतर बदलाव की संभावना होती है।
  • अच्छा मार्गदर्शक वही है जो कमजोर व्यक्ति को पहले संभालता है।
  • आलोचना करने से पहले सामने वाले की परिस्थिति समझना चाहिए।
  • दूसरों की गलतियों पर तुरंत निर्णय न दें।
  • सहानुभूति रिश्तों को मजबूत बनाती है।
  • जीवन में शांति पाने के लिए दूसरों को क्षमा करना सीखें।
  • जो व्यक्ति सुधार की कोशिश करता है, उसे अवसर देना चाहिए।
  • समाज में सकारात्मक बदलाव प्रेम से ही संभव है।
  • दूसरों को बेहतर बनाना भी सफलता का एक रूप है।
  • नकारात्मक सोच से तनाव बढ़ता है, करुणा उसे कम करती है।

दूसरी कहानी

एक दिन प्रभु यीशु ने देखा कि एक गडरिया अपनी छोटी सी भेड़ की बहुत अधिक देखभाल कर रहा है। वह उसे नहला रहा था, उसके बाल सुखा रहा था और हरी घास बड़े प्रेम से खिला रहा था।

उस गडरिए को देखकर प्रभु यीशु को आश्चर्य हुआ, क्योंकि बाकी भेड़ें पास ही चर रही थीं, लेकिन गडरिया इस एक भेड़ पर विशेष ध्यान दे रहा था।

ईसा मसीह ने उस गडरिए से पूछा कि तुम इस भेड़ की इतनी अधिक देखभाल क्यों करते हो?

गडरिए ने उत्तर दिया कि ये भेड़ अक्सर जंगल में भटक जाती है। बाकी भेड़ें तो अपने आप वापस आ जाती हैं, लेकिन इसे खोजकर लाना पड़ता है। मैं इस भेड़ पर इसलिए ज्यादा ध्यान देता हूं, ताकि ये मुझसे दूर ही न जाए और अगर कभी चली भी जाए, तो वापस लौट आए।

गडरिए की बात सुनकर ईसा मसीह बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने अपने शिष्यों को समझाया कि समाज में भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो बार-बार गलत रास्तों पर चले जाते हैं। ऐसे लोगों को डांटने या छोड़ देने के बजाय, उन्हें अधिक प्रेम और मार्गदर्शन की जरूरत है।

प्रभु यीशु ने समझाया कि प्रेम और धैर्य से ही भटके हुए व्यक्ति को सही दिशा दिखाई जा सकती है। जो लोग कमजोर हैं, वही सबसे ज्यादा सहारे के पात्र होते हैं। यदि हम उन्हें अपनाएंगे, तो वे जीवन में सही मार्ग आ सकते हैं।

किस्से की सीख

  • कमजोर लोगों को नजरअंदाज न करें।
  • जो बार-बार भटकते हैं, उन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
  • हर व्यक्ति को एक जैसा व्यवहार नहीं चाहिए।
  • धैर्य सफलता का सबसे जरूरी गुण है। धैर्य रखने से विवाद कम होते हैं।
  • जिम्मेदारी से निभाया गया संबंध लंबे समय तक चलता है।
  • बार-बार गलती करने वाला व्यक्ति मदद मांग रहा होता है।
  • प्रेम से समझाया गया संदेश जल्दी असर करता है।
  • जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नुकसान पहुंचा सकता है।
  • सही मार्गदर्शन से व्यक्ति अपनी दिशा बदल सकता है।
  • संवेदनशीलता जरूरी है। कमजोर कड़ी को मजबूत बनाना ही सच्चा नेतृत्व है।
  • दूसरों की सीमाओं को समझना जीवन प्रबंधन का हिस्सा है।
  • समय और ध्यान का सही निवेश भविष्य संवारता है।
  • प्रेम और जिम्मेदारी से किया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

तीसरी कहानी

एक बार प्रभु यीशु अपने शिष्यों के साथ एक गांव से दूसरे गांव जा रहे थे। यात्रा लंबी थी, बीच रास्ते में सभी शिष्यों को भूख लगने लगी। उन्होंने प्रभु यीशु से भोजन करने की इच्छा जताई। प्रभु यीशु ने अनुमति दे दी, लेकिन जब भोजन निकाला गया, तो वह बहुत कम था।

शिष्य चिंतित हो गए कि इतने कम खाने से सबका पेट कैसे भरेगा। तब प्रभु यीशु ने उनसे कहा कि जो कुछ भी उनके पास है, उसे इकट्ठा करें और आपस में मिल-बांटकर खाएं। शिष्यों ने उनकी बात मानी और भोजन साझा करने लगे।

इसी बीच वहां एक और भूखा व्यक्ति आ गया। उसने भी खाना मांगा। शिष्यों ने बिना हिचकिचाए उसे भी अपने साथ बैठा लिया। सभी ने मिलकर खाना खाया। भोजन कम था, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सभी की भूख शांत हो गई और मन भी संतुष्ट हो गया।

खाने के बाद शिष्यों ने प्रभु यीशु से पूछा कि इतना कम भोजन होने के बाद भी सभी को संतुष्टि कैसे मिल गई?

ईसा मसीह ने कहा कि जो लोग पहले दूसरों के बारे में सोचते हैं, वे कमी में भी संतोष पा लेते हैं। जब मन उदार होता है, तो अभाव छोटा लगने लगता है।

किस्से की सीख

  • खुशी साधनों से नहीं, सकारात्मक सोच से मिलती है।
  • मिल-बांटकर काम करने से जीवन आसान हो जाता है।
  • दूसरों की जरूरत समझने से हमारे जीवन में संतोष आता है।
  • संग्रह करने की आदत से जीवन में असंतोष आता है।
  • अपनी चीजों को दूसरों से साझा करने से मन हल्का होता है और प्रसन्नता मिलती है।
  • अभाव में भी खुश रहना सबसे बड़ी संपत्ति है। उदारता से शांति मिलती है।
  • संतोषी व्यक्ति हर परिस्थिति में खुश रहता है। लालच तनाव और डर को बढ़ाता है।
  • संसाधनों का सही उपयोग करने से जीवन सुधारता है।
  • संतोष, सहयोग और उदारता सफल जीवन के मूल मंत्र हैं।

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