इस्लामाबाद2 मिनट पहले
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जयशंकर ने 31 दिसंबर को ढाका में पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक से हाथ मिलााया था।
पाकिस्तान संसद के स्पीकर अयाज सादिक ने दावा कि है कि भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर खुद उनसे हाथ मिलाने आए थे। यह मुलाकात 31 दिसंबर को ढाका में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम विदाई कार्यक्रम के दौरान हुई।
अयाज सादिक ने बुधवार रात एक निजी टीवी चैनल को बताया,
वह खुद मेरे पास आए और नमस्ते कहा। मैं खड़ा हुआ, उन्होंने अपना परिचय दिया और मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया। जब मैं अपना परिचय देने ही वाला था, तो उन्होंने कहा, मैं आपको पहचानता हूं, परिचय की जरूरत नहीं।

इस दौरान नेपाल, भूटान और मालदीव के प्रतिनिधि भी वहां मौजूद थे। भारत–पाकिस्तान के बीच मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली बार था, जब दोनों देशों के बड़े नेताओं ने आमने-सामने मुलाकात की और हाथ मिलाया। इसी वजह से इस मुलाकात को कूटनीतिक तौर पर अहम माना गया।

हाथ मिलाने की तस्वीरें पाकिस्तान और बांग्लादेश के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स से शेयर की गईं।
क्रिकेट के मैदान में खिलाड़ियों ने हाथ नहीं मिलाए थे
इस मुलाकात को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले साल सितंबर में एशिया कप के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था। इससे साफ दिखता था कि दोनों देशों के रिश्ते कितने तनावपूर्ण हो चुके हैं।
पिछले साल अप्रैल में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के लिए भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाए थे। सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया। पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया था।
इसके बाद मई में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक संघर्ष हुआ था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहद तल्ख हो गए थे। ऐसे माहौल में ढाका में हुआ यह हाथ मिलाना कई लोगों को चौंकाने वाला लगा।

पाकिस्तान ने हाथ न मिलाने पर भारतीय खिलाड़ियों की शिकायत दर्ज कराई थी।
क्या दोनों देशों के रिश्तों में बदलाव आएगा
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के कई एक्सपर्ट्स ने इसे नए साल से पहले रिश्तों में हल्की नरमी का संकेत बताया। उनका कहना है कि कम से कम राजनयिक स्तर पर सामान्य व्यवहार की वापसी जरूरी है।
इस्लामाबाद के विदेश नीति एक्सपर्ट मुस्तफा हैदर सैयद ने अल जजीरा से कहा, नए साल की शुरुआत में जयशंकर और अयाज सादिक के बीच यह बातचीत एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा,
कम से कम इतना तो होना ही चाहिए कि अधिकारी एक-दूसरे का सम्मान करें और हाथ मिलाएं। दुर्भाग्य से भारत-पाक युद्ध के बाद यह सामान्य शिष्टाचार भी गायब हो गया था।

हालांकि भारत के कुछ जानकारों का मानना है कि इसे ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, एक ही कमरे में मौजूद दो वरिष्ठ नेताओं का हाथ मिलाना सामान्य शिष्टाचार भी हो सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक मई 2025 के संघर्ष के बाद बनी कड़वाहट इतनी गहरी है कि रिश्तों में जल्दी सुधार मुश्किल है। फिलहाल दोनों देशों के बीच आधिकारिक संवाद लगभग ठप है।
पूर्व पाकिस्तानी राजदूत बोले- यह पॉजिटिव कदम
पाकिस्तान के पूर्व अमेरिकी राजदूत सरदार मसूद खान ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा,
यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि भारत के विदेश मंत्री प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की अनुमति के बिना पाकिस्तान के स्पीकर से यूं अचानक हाथ मिलाएं।

उन्होंने याद दिलाया कि मई में युद्धविराम की घोषणा के समय अमेरिका ने दोनों देशों को किसी तटस्थ देश में बातचीत के लिए प्रेरित किया था। हालांकि भारत ने तब यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकियों को भारत में हमले करने से नहीं रोकता, तब तक बातचीत का कोई मतलब नहीं है। भारत दशकों से पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है।
हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने भी भारत पर इसी तरह के आरोप लगाए हैं। दोनों देश एक-दूसरे के आरोपों से इनकार करते हैं। हालांकि पाकिस्तान ने कभी-कभी यह माना है कि 2008 के मुंबई हमलों जैसे कुछ बड़े हमलों के आरोपी पाकिस्तान से ही आए थे।
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