Teachings to the disciples of the saint, life management tips in hindi, how to get success in life, peace of mind | संत की शिष्यों को सीख: जब तक हम ज्ञान को अपने जीवन में लागू नहीं करते, तब तक उसका कोई लाभ नहीं मिलता

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8 घंटे पहले

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एक प्रचलित लोक कथा है। पुराने समय में एक संत अपने आश्रम में दो शिष्यों के साथ रहते थे। संत अत्यंत विद्वान और अनुभवी थे। लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास आते और संत उनका समाधान बता देते थे। पूरे क्षेत्र में वे बहुत प्रसिद्ध हो गए थे। संत के दोनों शिष्यों की शिक्षा पूरी हो गई थी। एक दिन संत ने दोनों शिष्यों को बुलाया और एक-एक डिब्बा दिया, जिसमें गेहूं भरा हुआ था। संत ने कहा कि अब मैं एक साल के लिए धार्मिक यात्रा पर जा रहा हूं। जब मैं वापस आऊं, तब तुम दोनों ये गेहूं मुझे लौटा देना। ध्यान रखना, गेहूं खराब नहीं होना चाहिए। दोनों शिष्यों ने गुरु की आज्ञा को सिर झुकाकर स्वीकार कर लिया और संत यात्रा पर निकल गए। संत के जाने के बाद दोनों शिष्यों ने गेहूं को संभालने के अलग-अलग तरीके अपनाए। पहले शिष्य ने गेहूं से भरे डिब्बे को अपने घर के मंदिर में रख दिया। उसने डिब्बे को पवित्र मानकर रोज उसकी पूजा शुरू कर दी। उसका विश्वास था कि पूजा-पाठ से गेहूं सुरक्षित रहेंगे और वह गुरु की अमानत को पूरी श्रद्धा से लौटा पाएगा। दूसरे शिष्य ने अलग रास्ता चुना। उसने डिब्बे से गेहूं निकाले और उन्हें अपने खेत में बो दिया। वह रोज मेहनत करता, खेत की देखभाल करता और धैर्यपूर्वक फसल के तैयार होने का इंतजार करता रहा। कुछ ही महीनों में गेहूं की अच्छी फसल तैयार हो गई और उसके पास पहले से कहीं अधिक गेहूं हो गए। एक वर्ष पूरा होने पर संत वापस लौटे और दोनों शिष्यों से गेहूं मांगे। पहले शिष्य ने गर्व से डिब्बा आगे बढ़ाया और कहा कि उसने गुरु की अमानत की पूरी रक्षा की है, लेकिन जब संत ने डिब्बा खोला तो देखा कि गेहूं सड़ चुके थे और उनमें कीड़े लग गए थे। शिष्य शर्मिंदा हो गया। दूसरा शिष्य एक बड़ा थैला लेकर आया, जिसमें ताजे और अच्छे गेहूं भरे थे। संत ये देखकर बहुत प्रसन्न हुए और बोले कि तुम मेरी परीक्षा में सफल हुए। तुमने ज्ञान को जीवन में उतारा और उसका सही उपयोग किया। फिर संत ने दोनों को समझाया कि ज्ञान वही सार्थक है, जो प्रयोग में लाया जाए। संत की शिष्यों को सीख ज्ञान को व्यवहार में उतारें केवल किताबें पढ़ लेना या जानकारी इकट्ठा करना पर्याप्त नहीं है। जब तक हम ज्ञान को अपने जीवन में उतारते नहीं हैं, तब तक उसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलता है। डर और आलस से बाहर निकलें पहला शिष्य डर और भ्रम में रहा कि कहीं गेहूं खराब न हो जाएं, इसलिए उसने कोई प्रयोग नहीं किया। जीवन में आगे बढ़ने के लिए जोखिम लेना और प्रयास करना जरूरी है, तभी सकारात्मक परिवर्तन जीवन में आ पाता है। निरंतर प्रयास और धैर्य रखें दूसरे शिष्य ने खेत में गेहूं बोए और नियमित मेहनत की। सफलता तुरंत नहीं मिली, लेकिन धैर्य और परिश्रम से परिणाम कई गुना बेहतर मिला। हमें भी धैर्य के साथ काम करते रहना चाहिए, तभी समय आने पर लाभ मिलता है। संसाधनों का सही उपयोग करें हमारे पास समय, ज्ञान और ऊर्जा जैसे संसाधन सीमित हैं। उनका सही उपयोग करने से ही जीवन में प्रगति संभव है। संसाधनों के सही इस्तेमाल से ही जीवन में सफलता मिलती है। सीख को साझा करें ज्ञान को दूसरों के साथ बांटने से वह और बढ़ता है। जैसे बीज बोने से फसल बढ़ती है, वैसे ही ज्ञान बांटने से समझ और अनुभव गहरा होता है, इसलिए अपने अनुभव अन्य लोगों से भी शेयर करना चाहिए। परिवर्तन को अपनाएं जीवन में परिस्थितियां बदलती रहती हैं। जो व्यक्ति बदलाव के अनुसार खुद को ढाल लेता है, वही आगे बढ़ता है। पूजा से ज्यादा कर्म को महत्व दें केवल सोचने या चाहने से कुछ नहीं होता। सही कर्म और प्रयास ही जीवन को सफल बनाते हैं। भविष्य के लिए सोच विकसित करें तात्कालिक सुरक्षा से ज्यादा भविष्य में विकास पर ध्यान देना जरूरी है। दूसरे शिष्य ने भविष्य की संभावनाओं को समझा और उसके अनुसार काम किया। इसके परिणाम में उसे सफलता मिल गई।

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