Haryana former power minister HERC serious allegations, Haryana new electricity rate HERC hearing update | संपत सिंह बोले- HERC सरकार के निर्देश मान रहा: बिजली लॉस का उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा; फिक्स्ड चार्ज, बढ़े एनर्जी चार्ज को खत्म किया जाए – Haryana News

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हरियाणा के पूर्व मंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो संपत सिंह ने शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) पर बिजली उपभोक्ताओं के हितों में स्वतंत्र आयोग के ब

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उन्होंने कहा कि एचईआरसी को पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए स्थापित किया गया था, लेकिन अब यह आयोग उसके उलट सरकार, यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन के पक्ष में काम कर रहा है।

बिजली लॉस का उपभोक्ताओं से वसूली कर रहीं डिस्कॉमस

आयोग पावर वितरण कंपनियों (डिस्कॉमस) द्वारा मनमाने और गैर-तार्किक टैरिफ वृद्धि को रोकने में विफल रहा है। पॉवर वितरण कंपनियां डिस्ट्रिब्यूशन लॉस, लाइन लॉस और बिजली चोरी को रोक नहीं पा रही हैं और उस सारे नुकसान की भरपाई उपभोक्ताओं को करनी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग पूरी तरह से राज्य सरकार के निर्देशों पर काम कर रहा है।

चंडीगढ़ में INLD ऑफिस में पत्रकारों के सवालों के जवाब देते पूर्व बिजली मंत्री संपत सिंह।

चंडीगढ़ में INLD ऑफिस में पत्रकारों के सवालों के जवाब देते पूर्व बिजली मंत्री संपत सिंह।

डिस्कॉम के ARR पर सवाल उठाए

इनेलो नेता ने बताया कि हरियाणा सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19, 2020-21 और 2023-24 में राजनीतिक लाभ पाने के मंसूबे से बिना एचईआरसी के सब्सिडी निर्देशों के कुछ उपभोक्ता वर्गों के लिए टैरिफ रियायतें घोषित की थी, जिससे अन्य निर्दोष उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ गया। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 65 के तहत, सरकार द्वारा निर्देशित किसी भी सब्सिडी का भुगतान पहले से किया जाना आवश्यक है।

आयोग को इस प्रावधान को लागू करना चाहिए था। ये बातें उन्होंने डिस्कॉम द्वारा एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (ARR) दाखिल किए जाने के संदर्भ में कहीं।

एचईआरसी और एपटेल के निर्देशों का नहीं हो रहा पालन

प्रो. संपत सिंह ने कई प्रक्रिया संबंधी चूकों को भी उजागर किया। इनमें एआरआर फाइलिंग में किसी भी टैरिफ प्रस्ताव का अभाव, उपभोक्ता प्रभावों को छिपाने वाले भ्रामक सार्वजनिक नोटिस, पिछले दशक में वोल्टेज-वार तथा उपभोक्ता-श्रेणी-वार कॉस्ट ऑफ सर्विस अध्ययन के लिए एचईआरसी और एपटेल के निर्देशों का अनुपालन न होना शामिल हैं।

स्टेकहोल्डर वही आपत्ति कर सकते हैं जो प्रस्तुत किया गया हो। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो वित्त वर्ष 2026-27 में दोनों डिस्कॉम (डीएचबीवीएन और यूएचबीवीएन)1,605 करोड़ रुपए का राजस्व सरप्लस प्रोजेक्ट कर रहे हैं जबकि दूसरी ओर वे 4,484.85 करोड़ रुपए का राजस्व गैप मांग रहे हैं।

महंगी बिजली खरीद रहीं कंपनियां

उन्होंने बताया कि एचईआरसी द्वारा अनुमोदित औसत पावर लागत 3.12 रुपए प्रति यूनिट है। बावजूद इसके फरीदाबाद गैस पावर प्लांट से 85 रुपए से 153 रुपए प्रति यूनिट (तीन वर्षों में 864 रुपए करोड़ का खर्च) और पानीपत थर्मल से 6.50 रुपए प्रति यूनिट पर महंगी बिजली खरीद रही है और उपभोक्ताओं को 7.29 रुपए प्रति यूनिट पर बेच रहे हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि सुधारों की कमी, अनुशासनहीनता और खराब बुनियादी ढांचे के कारण बिजली उपक्रमों की स्थिति बिगड़ी है, और उपभोक्ता बोझ तले दब रहे हैं।

8000 करोड़ बकाए का केस अनसुलझा

आज तक 22 लाख डिफॉल्टर्स से 8000 करोड़ रुपए बकाया अनसुलझा पड़ा है। 47 पैसे प्रति यूनिट के अतिरिक्त शुल्क (फ्यूल एंड पॉवर कॉस्ट) को जून 2024 के अंत तक पूरी तरह वसूल किया जाना था। परंतु यह अभी भी उपभोक्ताओं पर लगाया जा रहा है, इससे छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं को लगभग 50 प्रतिशत अधिक बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है। वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता भी फिक्स्ड तथा ऊर्जा शुल्क दोनों में भारी वृद्धि का सामना कर रहे हैं।

संपत सिंह ने ये रखीं मांगे

संपत सिंह ने मांग की कि फिक्स्ड चार्ज, बढ़े एनर्जी चार्ज, फ्यूल सरचार्ज, फ्यूल कॉस्ट समायोजन और क्रॉस-सब्सिडाइजेशन को तुरंत समाप्त किया जाए ताकि पावर वितरण को सुव्यवस्थित किया जा सके, टैरिफ को तर्कसंगत बनाया जा सके और पावर उपभोक्ताओं को राहत दी जा सके। एचईआरसी किसानों के 2 लाख लंबित ट्यूबवेल कनेक्शनों को मंजूर करने के लिए डिस्कॉम को आदेश दे। साथ ही 24-घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित करें।

संपत सिंह ने एचईआरसी से प्रदर्शन मानकों को लागू करने के लिए भी कहा। साथ ही उन्होंने कहा कि एचईआरसी को यह भी जांच करनी चाहिए कि डीएचबीवीएन और यूएचबीवीएन कैसे 2020-21 में 800 करोड़ के लाभ से 2023-24 में 4,484 करोड़ रूपए के घाटे तक पहुंच गए। एचईआरसी इस 4,484 करोड़ रूपए के घाटे को उपभोक्ताओं पर न थोपने के निर्देश दे। एचईआरसी को अपने उपभोक्ता-संरक्षण जनादेश को बनाए रखना चाहिए।

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