Rahu-Ketu effects in new year 2026, 2026 rashifal, rahu ketu ka rashifal, astrological prediction of rahu ketu | इस साल कैसी रहेगी राहु-केतु की स्थिति?: 5 दिसंबर को राहु-केतु बदलेंगे राशि, हमेशा वक्री रहते हैं ये दोनों ग्रह, जानिए सभी 12 राशियों पर असर

Actionpunjab
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14 घंटे पहले

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राहु-केतु 2026 में 11 महीनों के बाद 5 दिसंबर को राशि बदलेंगे। ये दोनों ग्रह हमेशा वक्री रहते हैं यानी पीछे की ओर चलते हैं। राहु अभी कुंभ राशि में है और केतु सिंह राशि में है। 5 दिसंबर को राहु कुंभ से पीछे वाली राशि मकर में प्रवेश करेगा और केतु सिंह से पीछे वाली राशि कर्क में प्रवेश करेगा।

राहु-केतु को छाया ग्रह माना जाता है। छाया ग्रह का अर्थ ये है कि इन दोनों का भौतिक अस्तित्व नहीं है, लेकिन कुंडली में इनका बहुत गहरा असर रहता है। छाया ग्रह हमारे जीवन के अदृश्य, लेकिन शक्तिशाली क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं- जैसे इच्छाएं, भय, कर्म और आध्यात्मिकता। इन ग्रहों की शुभ-अशुभ स्थिति का सीधा असर इन क्षेत्रों पर होता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा से जानिए इस साल सभी 12 राशियों के लिए राहु-केतु का कैसा असर रहने वाला है…

2026 में राहु इस राशि के ग्यारहवें भाव में रहेगा, जिससे इनकी इच्छाओं, लाभ और सामाजिक दायरे में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। नए मित्र, प्रभावशाली संपर्क बनेंगे और अचानक लाभ के योग भी हैं। वहीं केतु पंचम भाव में होने से प्रेम संबंध में भ्रम, संतान पक्ष से चिंता हो सकती है। पढ़ाई में मन न लगने की स्थिति बनेगी। ये साल आपको लाभ और भावनाओं के बीच संतुलन रखने का संदेश दे रहा है।

  • वृषभ राशि

राहु इस राशि के दशम भाव में है। राहु करियर को नई दिशा देगा। नौकरी में प्रमोशन, नई जिम्मेदारियां या अलग पहचान मिलने के योग हैं। हालांकि, केतु चतुर्थ भाव में है, जो कि घर-परिवार, माता के स्वास्थ्य या मानसिक शांति में कमी करेगा। 2026 आपके लिए मिलाजुला फल देने वाला रहेगा।

  • मिथुन राशि

इस साल राहु नवम भाव में रहेगा, इस कारण भाग्य, उच्च शिक्षा, लंबी यात्राओं और विदेश से जुड़े अवसर मिलेंगे। इन लोगों की सोच पहले से अधिक स्पष्ट होगी, लेकिन केतु तृतीय भाव में होने से भाई-बहनों से दूरी बढ़ सकती है। झिझक और आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। इन लोगों को ज्ञान बढ़ाने के साथ संबंध निभाने पर ध्यान देना होगा।

  • कर्क राशि

राहु इन लोगों के लिए अष्टम भाव में रहेगा। राहु की वजह से जीवन में बड़े परिवर्तन आ सकते हैं। अचानक लाभ-हानि, रिसर्च, नए विषयों या आध्यात्मिक क्षेत्र में रुचि बढ़ेगी। केतु द्वितीय भाव में है, इस कारण इन लोगों को धन और वाणी के मामले में संयम रखना होगा, वर्ना विवाद हो सकते हैं। ये साल आपको भीतर से मजबूत बनाने वाला साबित होगा।

  • सिंह राशि

2026 में राहु सप्तम भाव में रहेगा। ये स्थिति साझेदारी, विवाह और बिजनेस के लिए सकारात्मक है। नए अवसर मिलेंगे। नए लोग आपके जीवन में आएंगे। दूसरी ओर केतु लग्न भाव में यानी इसी राशि में है। केतु भ्रम, अकेलापन बढ़ाएगा। ये साल आपको दूसरों के साथ जुड़कर खुद को समझने की सीख देगा।

  • कन्या राशि

राहु षष्ठम भाव में है। ये ग्रह प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाएगा और स्वास्थ्य में सुधार करेगा। कार्यक्षेत्र में पकड़ मजबूत होगी। दूसरी ओर, केतु द्वादश भाव में होने से एकांत, नींद की समस्या या आध्यात्मिक झुकाव बढ़ेगा। इस साल काम और जीवन में संतुलन बनाए रखेंगे।

  • तुला राशि

राहु पंचम भाव में है। ये ग्रह प्रेम, रचनात्मकता, मनोरंजन और प्रसिद्धि पाने के अवसर देगा। कला, मीडिया जैसे क्षेत्रों की ओर आकर्षण बढ़ेगा। केतु एकादश भाव में होने से मित्रों से दूरी बढ़ सकती है। 2026 आपको सिखाएगा कि खुशी बाहर नहीं, बल्कि अपने मन में ही खोजी जाती है।

  • वृश्चिक राशि

राहु चतुर्थ भाव होने से घर, वाहन या प्रॉपर्टी से जुड़े कामों में बदलाव हो सकता है, लेकिन अशांति भी बनी रहेगी। केतु दशम भाव में होने से कामकाज में मन नहीं लग पाएगा। काम में दिशा बदलने की इच्छा होगी। वरिष्ठ लोगों से दूरी बढ़ सकती है।

तृतीय भाव में राहु है, इस कारण छोटे-छोटे प्रयासों से ही बड़ी सफलता मिल सकती है। लेखन, मीडिया, मार्केटिंग या यात्राओं से जुड़े कामों से लाभ होगा। केतु नवम भाव में होने से गुरु, पिता या धार्मिक विश्वासों को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है।

राहु द्वितीय भाव में है। ये ग्रह धन कमाने की इच्छा तीव्र करेगा। आमदनी बढ़ भी सकती है, लेकिन वाणी की कठोरता से बचना होगा, वर्ना बने बनाए काम बिगड़ सकते हैं। केतु अष्टम भाव में है, इसलिए स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें, अनजाना डर बना रहेगा।

  • कुंभ राशि

राहु इसी राशि में है। ये ग्रह अलग पहचान, आत्मविश्वास और महत्वाकांक्षा देगा। इन राशि के लोगों के व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव होगा, लेकिन केतु सप्तम भाव में होने से रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है। वैवाहिक जीवन और साझेदारी से जुड़े कामों में असंतोष हो सकता है।

राहु द्वादश भाव में है। इस कारण यात्रा, आध्यात्मिक साधना और एकांत से जुड़े भाव बढ़ेंगे। खर्च बढ़ सकते हैं, लेकिन अनुभव भी अच्छे होंगे। केतु षष्ठम भाव में होने से पुराने रोगों से मुक्ति मिल सकती है।

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