story about Swami Vivekananda’s memory, life management tips of swami vivekanand in hindi, Birth Anniversary of swami vivekanand 12th January | स्वामी विवेकानंद की याददाश्त का किस्सा: स्वामी जी ने लाइब्रेरियन को बताया कैसे एक दिन में मोटी-मोटी किताबें पढ़ लेते हैं

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14 घंटे पहले

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आज (12 जनवरी) स्वामी विवेकानंद की जयंती है। स्वामी जी का जीवन एक पाठशाला की तरह था। उनकी स्मरण शक्ति से जुड़े किस्से आज भी प्रचलति हैं। स्वामी जी ने अपने जीवन में अनुशासन और एकाग्रता हमेशा बनाए रखी। इनके किस्सों की सीख को जीवन में उतार लेने से हमारी सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। यहां जानिए स्वामी जी की स्मरण शक्ति से जुड़ा एक किस्सा…

ये किस्सा उन दिनों का है, जब स्वामी विवेकानंद देश के अलग-अलग हिस्सों में घूम रहे थे। उनके साथ उनके एक गुरु भाई भी रहते थे। स्वामी जी का जीवन स्वाध्याय, सत्संग और कठोर तप से भरा हुआ था। जहां भी जाते, वहां का वातावरण नहीं, बल्कि वहां का ज्ञान भी उन्हें आकर्षित करता था। किसी नई जगह पहुंचते ही उनकी पहली खोज होती थी – कोई अच्छा पुस्तकालय।

एक स्थान पर उन्हें एक पुस्तकालय मिला, वहां पहुंचकर विवेकानंद जी ने सोचा कि यहां कुछ दिन रुककर अध्ययन किया जाए। रोज उनके गुरु भाई पुस्तकालय से संस्कृत और अंग्रेजी की मोटी-मोटी किताबें लाते। अगले दिन विवेकानंद जी उन्हें पढ़कर लौटा देते। ये क्रम कई दिनों तक चलता रहा।

इतनी जल्दी-जल्दी किताबों का आना-जाना देखकर पुस्तकालय का अधीक्षक (लाइब्रेरियन) चकित रह गया। उसे लगा कि शायद ये किताबें केवल देखने के लिए ले जाई जाती होंगी। एक दिन उसने स्वामी जी के गुरु भाई से कहा कि इतनी भारी किताबें रोज क्यों ले जाते हैं? अगर देखनी ही हैं तो यहीं देख लीजिए।

गुरु भाई ने शांत स्वर में उत्तर दिया कि आप गलत समझ रहे हैं। स्वामी विवेकानंद इन पुस्तकों को पूरी गंभीरता से पढ़ते हैं।

ये सुनकर लाइब्रेरियन और भी हैरान हुआ और उसने विवेकानंद जी से मिलने की इच्छा जताई। अगले दिन जब भेंट हुई, तो स्वामी जी ने कहा कि महाशय, मैंने न केवल इन पुस्तकों को पढ़ा है, बल्कि इन्हें याद भी कर लिया है। ये कहकर उन्होंने कुछ किताबों के अंश शब्दशः सुना दिए।

लाइब्रेरियन हैरान रह गया। उसने पूछा कि इतनी अद्भुत स्मरण शक्ति का रहस्य क्या है?

स्वामी विवेकानंद मुस्कराए और बोले कि जब मन पूरी तरह एकाग्र होता है, तो ज्ञान स्वयं मन पर अंकित हो जाता है। ध्यान और निरंतर अभ्यास से मन की धारण शक्ति बढ़ती है।

किस्से की सीख

  • एकाग्रता को जीवन का आधार बनाएं

आज हमारा मन मोबाइल, सोशल मीडिया और अनावश्यक सूचनाओं में बंटा रहता है। विवेकानंद जी सिखाते हैं कि जब तक मन एक जगह टिकता नहीं, तब तक ज्ञान स्थायी नहीं होता। रोज कम से कम 15–20 मिनट एकाग्र होकर किसी एक कार्य पर ध्यान केंद्रित करें, ऐसा करने से एकाग्रता बढ़ेगी।

  • ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं

ध्यान यानी मेडिटेशन केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि मानसिक प्रशिक्षण है। नियमित रूप से ध्यान करने से मन शांत होता है, स्मरण शक्ति बढ़ती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। सुबह या रात का समय ध्यान के लिए सबसे अच्छा होता है।

  • गहराई से पढ़ने की आदत बनाएं

आज हम बहुत कुछ पढ़ते हैं, लेकिन याद कुछ नहीं रहता। कारण है— ऊपरी पढ़ाई। विवेकानंद जी की तरह पढ़ते समय मन पूरी तरह उसी विषय में डुबो दीजिए, जब पूरी एकाग्रता के साथ कुछ पढ़ेंगे तो पढ़ी हुई बातें हमेशा याद रहेंगी।

  • अनुशासन को बोझ नहीं, शक्ति समझें

स्वामी जी का जीवन कठोर अनुशासन से भरा था। सही समय पर उठना, पढ़ना, सोचना और विश्राम करना, ये सब जीवन को सरल बनाता है। अनुशासन से ही आत्मविश्वास जन्म लेता है।

  • ज्ञान को संग्रह नहीं, साधना बनाएं

सिर्फ जानकारी इकट्ठा करना काफी नहीं है। जो पढ़ें, उस पर मनन करें, उसे जीवन में उतारें। यही सच्चा लाइफ मैनेजमेंट है।

  • मन की धारण शक्ति बढ़ाएं

ध्यान, स्मरण अभ्यास, रिपिटेशन और शांत मन, ये चार बातें स्मरण शक्ति को मजबूत करती हैं। रोज सीखी हुई बातों को संक्षेप में दोहराना चाहिए।

  • लक्ष्य स्पष्ट रखें

विवेकानंद जी का लक्ष्य स्पष्ट था— ज्ञान और आत्मविकास। जब लक्ष्य स्पष्ट होता है, तो मन भटकता नहीं। हमें भी अपना पूरा ध्यान लक्ष्य पर ही लगाए रखना चाहिए, तभी सफलता मिल सकती है।

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