सोनीपत में ई-समाधान पोर्टल पर शिकायत के नाम पर खेल:बिना कर्मचारी भेजे AI से हटाया कूड़ा; फोटो एडिट कर झूठा समाधान किया अपलोड

Actionpunjab
4 Min Read




सोनीपत में सफाई एजेंसी ने बड़ा कारनामा कर दिखाया है। जहां एक शख्स ने खरखौदा नगर पालिका क्षेत्र के इलाके में गंदगी के फोटो ई-समाधान पोर्टल डालकर शिकायत दर्ज करवाई। जहां आधुनिक तकनीक AI का प्रयोग करके पोर्टल से फोटो डाउनलोड किया गया और उसको एआई से एडिट कर गंदगी को साफ कर दिया। खरखौदा नगर पालिका क्षेत्र में सरकार द्वारा अलॉट की गई सफाई एजेंसी पर गंभीर आरोप लगे हैं। यहां ई-समाधान पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के समाधान में एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल कर कागजों में सफाई दिखाने का मामला सामने आया है। डिजिटल व्यवस्था को पारदर्शी और जनता के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से सरकार जहां एआई आधारित प्रणालियों और ऑनलाइन शिकायत पोर्टलों को बढ़ावा दे रही है, वहीं जमीनी स्तर पर कुछ एजेंसियां इन्हीं तकनीकों का दुरुपयोग कर अपनी लापरवाही छिपाने में जुटी हैं। शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनाए गए ई-समाधान पोर्टल पर सामने आए एक मामले ने न केवल सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि सरकारी निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।​​​​​​​ ई-समाधान पोर्टल से जुड़ी जनता की उम्मीदें
ई-समाधान पोर्टल के माध्यम से सरकार ने नागरिकों को यह सुविधा दी है कि वे अपने इलाके में गंदगी, स्ट्रीट लाइट खराब होने या अन्य समस्याओं की फोटो अपलोड कर सीधे शिकायत दर्ज कर सकें। शिकायत के बाद संबंधित विभाग या एजेंसी द्वारा मौके पर कार्रवाई कर समाधान की फोटो अपलोड की जाती है।
दिल्ली रोड का मामला, 23 दिसंबर की शिकायत
खरखौदा नगर पालिका क्षेत्र के दिल्ली रोड पर 23 दिसंबर को एक व्यक्ति ने डोर-टू-डोर कूड़ा उठान योजना के तहत तसलों में भरी गंदगी की फोटो ई-समाधान पोर्टल पर अपलोड कर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कूड़ा उठवाने की मांग की गई थी। मौके पर सफाई नहीं, पोर्टल पर समाधान
शिकायतकर्ता उस समय हैरान रह गया, जब कुछ समय बाद पोर्टल पर समस्या का समाधान दर्शाते हुए कूड़ा उठाने के बाद की फोटो अपलोड कर दी गई, जबकि हकीकत में न तो कोई सफाई कर्मचारी मौके पर आया और न ही कूड़ा उठाया गया।
AI से फोटो एडिट कर दिखाई सफाई
जांच करने पर सामने आया कि सफाई एजेंसी संत इंद्रमणि के सुपरवाइजर ने शिकायतकर्ता द्वारा अपलोड की गई फोटो को डाउनलोड कर एआई की मदद से केवल कूड़े को इरेज कर दिया और उसी फोटो को दोबारा पोर्टल पर अपलोड कर समाधान दिखा दिया। फोटो में तसले खाली नजर आ रहे थे, जबकि वास्तविकता में वे कूड़े से भरे हुए थे। इस पूरे मामले ने न केवल सफाई एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि बिना भौतिक सत्यापन के शिकायतों को निपटाया जा रहा है। यदि ऐसे ही एआई का दुरुपयोग होता रहा, तो डिजिटल शिकायत प्रणालियों पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
कार्रवाई की उठी मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित सुपरवाइजर और एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में तकनीक का उपयोग जनता को राहत देने के लिए हो, न कि कामचोरी छिपाने के लिए।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *