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हरदोई में महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय और यूजीसी-एमएमटीटीसी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘नई शिक्षा नीति-2020: ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसके तीसरे दिन विशेषज्ञों ने बहुविषयक शिक्षा पर विशेष जोर दिया। गूगल मीट के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के 20 राज्यों से 260 से अधिक शिक्षक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के विशेष अतिथि, उच्च शिक्षा के पूर्व संयुक्त निदेशक प्रो. (डॉ.) पी.के. वार्ष्णेय ने नई शिक्षा नीति को उच्च शिक्षा को समग्र और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने शिक्षकों से इस नीति की मूल भावना को समझकर इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की अपील की। कार्यक्रम समन्वयक कैप्टन (डॉ.) प्रवेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया और तीसरे दिन की कार्ययोजना प्रस्तुत की। मुख्य वक्ता जोधपुर विश्वविद्यालय के प्रो. राजेश दुबे ने ‘समग्र एवं बहुविषयक शिक्षा’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम में लचीलापन, कौशल-आधारित शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा का एकीकरण छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। प्रो. दुबे ने इस बात पर जोर दिया कि यह नीति छात्रों में आलोचनात्मक चिंतन और रचनात्मकता विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी। कार्यक्रम का संचालन और तकनीकी सहयोग डॉ. गुलशन कुमार एवं मज़हर ज़ैदी की टीम ने किया। अंत में डॉ. सुनीति लता और डॉ. सतीश ने सभी प्रतिभागियों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित करेगी:हरदोई में प्रो. राजेश दुबे ने बहुविषयक शिक्षा पर दिया जोर
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