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Actionpunjab
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प्रयागराज माघ मेले में 5 दिन से धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ गई है। उन्हें तेज बुखार है। शिष्यों ने बताया, अविमुक्तेश्वरानंद सुबह 10 बजे वैनिटी वैन में चले गए। डॉक्टरों के कहने पर दवा खाई, आराम किया।

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वसंत पंचमी के चलते बड़ी संख्या में शिष्य शंकराचार्य का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे थे। हालांकि, जब उनको पता चला कि अविमुक्तेश्वरानंद वैनिटी वैन से बाहर नहीं आए तो वैन के बाहर भीड़ लग गई। करीब 5 घंटे बाद शंकराचार्य वैनिटी वैन से बाहर आए और पालकी पर बैठ गए हैं।

इधर, माघ मेला प्रशासन से शंकराचार्य विवाद पर उनका टकराव खत्म खत्म नहीं हो रहा है। वसंत पंचमी पर उन्होंने संगम स्नान भी नहीं किया।

अविमुक्तेश्वरानंद ने कल भास्कर से कहा था- जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, तब तक मैं स्नान नहीं करूंगा। प्रशासन नोटिस-नोटिस खेल रहा है। अभी मेरा मौनी अमावस्या का स्नान नहीं हुआ है, तो मैं वसंत का स्नान कैसे कर लूं? हालांकि, दो नोटिस भेजने के बाद से प्रशासनिक अफसर इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हैं।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद दोपहर 3 बजे वैनिटी वैन से बाहर निकलकर पालकी पर बैठे।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद दोपहर 3 बजे वैनिटी वैन से बाहर निकलकर पालकी पर बैठे।

5 दिन से अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बने इसी सिंहासन पर धरने पर बैठे हुए थे। वसंत पंचमी पर उनकी तबीयत बिगड़ी तो वे सुबह 10 बजे वैनिटी वैन में चले गए थे।

5 दिन से अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बने इसी सिंहासन पर धरने पर बैठे हुए थे। वसंत पंचमी पर उनकी तबीयत बिगड़ी तो वे सुबह 10 बजे वैनिटी वैन में चले गए थे।

सवा लाख शिवलिंग लाए थे अविमुक्तेश्वरानंद अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में सवा लाख मिट्‌टी के शिवलिंग स्थापित करने के लिए लेकर आए थे। हालांकि, मौनी अमावस्या को हुए विवाद के बाद वह स्थापित नहीं कर पाए हैं। इससे पहले, गुरुवार को सीएम योगी ने अविमुक्तेश्वरानंद का नाम लिए बिना कहा था कि किसी को परंपरा बाधित करने का हक नहीं। ऐसे तमाम कालनेमि हैं, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। वहीं, डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने आजमगढ़ में कहा था कि मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं। प्रार्थना है कि वे स्नान कर इस विषय का समापन करें।

विवाद की वजह से अविमुक्तेश्वरानंद मेले में अपने शिविर लाए गए सवा लाख शिवलिंग भी स्थापित नहीं कर पाए।

विवाद की वजह से अविमुक्तेश्वरानंद मेले में अपने शिविर लाए गए सवा लाख शिवलिंग भी स्थापित नहीं कर पाए।

मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था, जानिए 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे। प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे में दो नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में उनके शंकराचार्य की पदवी लिखने पर सवाल पूछे थे, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या को लेकर हुए बवाल पर सवाल पूछे गए। प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए? अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिस के जवाब भेज दिए थे।

शंकराचार्य विवाद और माघ मेले से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

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