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पंजाब सरकार ने राज्य में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी और ‘डॉग बाइट’ की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए एक योजना तैयार की है। अब प्रदेश के बड़े जिलों में डॉग सेंक्चुरी बनाई जाएंगी, जहां आवारा कुत्तों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाएगा। इस फैसले को आम जनता की सुरक्षा के साथ-साथ पशु कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हाल के वर्षों में पंजाब के शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्ट्रीट डॉग्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। आए दिन बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई जिलों में रोज बड़ी संख्या में डॉग बाइट के मामले आ रहे हैं, जिससे न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ा है, बल्कि लोगों में डर और नाराजगी का माहौल भी बन रहा है। सरकार के स्तर पर यह महसूस किया गया कि केवल नसबंदी इस समस्या को पूरी तरह नियंत्रित करने में नाकाफी हैं। क्यों जरूरी था यह फैसला 2025 की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में करीब 3 लाख आवारा कुत्ते हैं। नसबंदी के पुराने तरीके नाकाफी साबित हो रहे थे, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में डर का माहौल था। डॉग लवर्स भी लंबे समय से एक मानवीय समाधान की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि आवारा कुत्तों को मारना या उन्हें इधर-उधर छोड़ देना समस्या का समाधान नहीं है। इसके बजाय, उनके लिए वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन ही सबसे बेहतर विकल्प है। इन जिलों में जमीन चिह्नित करने का काम शुरू पहले चरण में कुछ प्रमुख जिलों अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, बठिंडा, पटियाला, होशियापुर, मोगा में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर डॉग सेंक्चुरी का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद इस योजना की सफलता और अनुभव के आधार पर इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। इसके लिए उपयुक्त जमीन चिन्हित करने और बजट प्रावधानों पर भी काम शुरू कर दिया गया है।
‘डॉग बाइट’ की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए योजना:पंजाब में खुलेंगी 52 डॉग सेंक्चुरी, 3 लाख डॉग्स का होगा प्रबंधन
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