होली पर दुर्लभ संयोग: भद्रा और चंद्र ग्रहण एक साथ:ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू; ज्योतिषी बोले– सिर्फ सूखे रंग से खेलें होली

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इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसको लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है। 2 मार्च की रात होलिका दहन किया जाएगा, जबकि अगले दिन 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा। ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा, जिसमें शुभ कार्य और मंदिर दर्शन वर्जित माने जाते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार, 2 मार्च को शाम 5:55 बजे भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा। इस वर्ष भद्रा भूलोक में और सिंह राशि में मानी जा रही है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ रहेगा। उन्होंने बताया कि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर होलिका पूजन का विशेष महत्व होता है। भद्रा काल में दान-पुण्य भी किया जा सकता है।
17 मिनट तक पूर्ण खग्रास की स्थिति
धुलेंडी के दिन 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण दोपहर 3:19 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। यह उदित चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें लगभग 17 मिनट तक पूर्ण खग्रास स्थिति बनी रहेगी। सूतक काल के दौरान आमतौर पर शुभ कार्यों पर रोक मानी जाती है। पानी से होली खेलने से बचने की सलाह
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण के दिन केवल गुलाल यानी सूखे रंग से होली मनाई जा सकती है। इससे पर्व की धार्मिक मान्यता प्रभावित नहीं होती और किसी भी प्रकार का ग्रहण दोष नहीं लगता। इस दौरान जल से होली खेलने से बचने की सलाह दी गई है। शास्त्रीय नियमों और सावधानी के साथ होली मनाने से परंपरा और आस्था दोनों सुरक्षित रहती हैं। साधना का विशेष समय
पंडित डिब्बेवाला ने बताया कि ग्रहण काल साधना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान इष्ट देव या गुरु मंत्र की माला जाप करने से मंत्र सिद्धि का लाभ मिलता है।

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