झज्जर में कार्यवाहक सरपंच पर 6 लाख गबन का आरोप:कागजों में करवाया गली का निर्माण; पंचायती खाते से निकाली राशि

Actionpunjab
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झज्जर जिले के बख्तावरपुर (रईया) गांव में कार्यवाहक सरपंच पर गबन का आरोप लगाया गया है। कार्यवाहक सरपंच पर बिना गली बनवाए ही उसी गली के नाम से 6 लाख रुपए पंचायत खाते से निकलवा गबन करने का आरोप लगा है। सिर्फ करीब 30 मीटर की लंबाई की गली को कागजों में बनवाने का आरोप लगा है जबकि गली आज भी कच्ची है। हालांकि अभी विभागीय जांच मामले में जारी है। जिले की एक ग्राम पंचायत में सीसी सड़क निर्माण के नाम पर 6 लाख रुपए के कथित गबन का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता वजीर ने बीडीपीओ को लिखित शिकायत सौंपकर कार्यवाहक सरपंच मुकेश देवी एवं सचिव सुरेंद्र सिंह के खिलाफ जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। निकाली गई राशि गली बनाने की थी- वजीर शिकायतकर्ता वजीर ने बताया कि गांव में खजान के मकान से लेकर श्मशान घाट तक सीसी (सीमेंट कंक्रीट) सड़क निर्माण के नाम पर 6 दिसंबर 2024 को पंचायत के बैंक खाते से पीएनबी झज्जर शाखा से 6 लाख रुपए निकाले गए। शिकायत में आरोप है कि उक्त राशि सड़क निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत की गई थी, लेकिन आज तक मौके पर कोई सड़क निर्माण कार्य नहीं कराया गया। कार्यवाहक सरपंच पर कार्रवाई की मांग वजीर का कहना है कि जिस स्थान पर सीसी सड़क बननी थी, वहां अब तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। इसके बावजूद पंचायत खाते से पूरी राशि निकाले जाने से गांव में रोष है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यवाहक सरपंच ने सचिव के साथ मिलकर पंचायत निधि का दुरुपयोग किया है, जिससे ग्राम पंचायत को आर्थिक नुकसान पहुंचा है। पंचायत खजाने में भरपाई कराने की मांग शिकायतकर्ता ने बीडीपीओ से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, पंचायत खाते से निकाली गई राशि के उपयोग का सत्यापन किया जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही ग्राम निधि की भरपाई भी सुनिश्चित करने की मांग की गई है। सरपंच ने सभी आरोपों को बताया झूठा कार्यवाहक सरपंच पर लगे आरोप को लेकर उन्होंने कहा कि सब झूठ है और सारे आरोप निराधार हैं। उन्होंने ऐसी कोई गली नहीं बनवाई और न ही गली के नाम कोई पैसे निकाले और जिस गली की बात कर रहे हैं, उस गली के लिए हमने तो प्रस्ताव भी नहीं किया। बाकि मामले को लेकर विभागीय जांच चल रही है और हमने जवाब और सारे सबूत दे दिए हैं। 2022 में लगे प्रस्ताव, 2024 में निकाली राशि वहीं गली को बनवाने के लिए 2022 में तत्कालीन पंचायत में प्रस्ताव लगाया गया था। जिसके बाद वजीर के अनुसार व ऐप पर दिखाए जा रहे रिकॉर्ड के अनुसार गली के नाम से दिसंबर 2024 को पंचायत से निकाले गए हैं। वहीं इस गली को बनाने की तैयारी यहां रहने वाले लोगों के पैसे खर्च कराकर की गई थी। इस गली के पास दो तीन परिवार ही रहते हैं। मिट्‌टी भरत के खर्च के 50 हजार ग्रामीणों ने दिए जयप्रकाश ने बताया 2018 में तत्कालीन पंचायत में सरपंच की ओर से गली बनवाने के मिट्‌टी डलवाई, लेकिन मिट्‌टी डालने और मजदूरी व मशीनरी का जो खर्च आया, वह उन परिवारों को करीब 50 हजार रुपए की राशि देनी पड़ी थी।

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