टोंक में आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज का मंगल प्रवेश:तीन आचार्य संघों का ऐतिहासिक मिलन; जैन समाज के लोग उमड़े

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टोंक शहर में शनिवार को आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज संसंघ मंगल प्रवेश हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरे नगर में धार्मिक उत्साह दिखा। तीन आचार्य संघों का ऐतिहासिक मिलन भी हुआ। जैन समाज के प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया- आचार्य संघ का जुलूस इंदिरा सर्किल छावनी से गाजे-बाजे के साथ रवाना होकर घंटाघर, सुभाष बाजार, पांचबत्ती, काफला बाजार, नौशे मियां का पुल होते हुए बड़ा कुआं पहुंचा। यहां आचार्यश्री इन्द्रनंदीजी महाराज संसंघ और बालाचार्य निपुण नंदीजी महाराज संसंघ के साथ आचार्य प्रसन्न सागर महाराज का मिलन हुआ। इस अवसर पर तीन आचार्य संघों (29 पिच्छिका) का ऐतिहासिक संगम हुआ। पैर धोकर चरण वंदना की मंगल मिलन के दौरान आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने आचार्य इन्द्रनंदी जी महाराज का पाद प्रक्षालन कर चरण वंदना की। तीन प्रदक्षिणाएं देकर विनयपूर्वक श्रद्धा अर्पित की। इसके बाद तीनों आचार्य संघ श्रीआदिनाथ दिगम्बर जैन नसियां पहुंचे। जहां समाजजनों ने पाद प्रक्षालन, आरती एवं हाईटेक मशीनों से पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। नगर में विभिन्न स्थानों पर स्वागत तोरण द्वार सजाए गए और श्रद्धालुओं ने जगह-जगह आरती एवं चरण प्रक्षालन कर अगवानी की। श्रद्धालुओं ने लगाए जयघोष मंगल प्रवेश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने “जैन साधु देख लो, त्याग करना सीख लो” और “स्वागत की है तैयारी, आ रहे हैं पुष्पदंत धारी” जैसे जयघोषों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। जुलूस के नसियां जैन मंदिर पहुंचने पर आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने मूलनायक भगवान आदिनाथ एवं भगवान शांतिनाथ के दर्शन-पूजन कर धर्मसभा को संबोधित किया। धर्मसभा से पूर्व मुनि नेगम सागर महाराज द्वारा मंगलाचरण किया गया तथा उपाध्याय पीयूष सागर महाराज एवं मुनि सहज सागर महाराज ने भी अपने उद्बोधन दिए। राग से राग किया तो दुख होगा अपने प्रवचन में आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने कहा-राग से राग करोगे तो दुख मिलेगा और वीतराग से भी आसक्ति रखोगे तो दुख रहेगा। वीतरागी से वीतराग होना ही सच्चा मार्ग है, जिससे नरक भी स्वर्ग बन सकता है। जो व्यक्ति भगवान की वाणी को श्रद्धा से सुनता है, उसके भीतर भगवान का वास हो जाता है। टोंक धर्मनगरी है, यहां के श्रद्धालु दिगम्बर संत परम्परा और साधु चर्या में गहरी आस्था रखते हैं। रात्रि भोजन का त्याग करना चाहिए, यह महापाप है। जीवन संयमित होना चाहिए। आचार्यश्री का दरबार आयोजित हुआ दोपहर में आचार्य श्री का दरबार आयोजित हुआ, जिसमें आचार्य प्रसन्न सागर महाराज, उपाध्याय पीयूष सागर महाराज, मुनि सहज सागर महाराज एवं मुनि नेगम सागर महाराज के मुखारविंद से संगीतमय पूजा-अर्चना हुई। शाम को आरती, शास्त्र सभा एवं आनंद यात्रा का आयोजन हुआ, जिसमें निवाई, इंदौर एवं लावा सहित विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पूजन किया। कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष पदमचंद आंडरा, भागचंद फूलेता, कमल आंडरा, विमल बरवास, धर्मेंद्र पासरोटिया, राजेश सर्राफ, अनिल सर्राफ, नीटू छामुनिया, कमल सर्राफ, पंकज फूलेता, पंकज छामुनिया, राजेश शिवाड़िया, ओम ककोड़, मुकेश बरवास, अम्मू छामुनिया, राजेश अरिहंत, अशोक छाबड़ा, नेमीचंद बनेठा, मुकेश बनेठा, जीतू बनेठा, सोनू पासरोटिया, पुनीत जागीरदार, अम्मू संघी, मुकेश दतवास, अर्पित पासरोटिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे

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