![]()
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर किसी मुकदमे को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने विवाह विवाद से संबंधित एक मामले में पत्नी की स्थानांतरण याचिका को खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की एकल पीठ ने पारित किया। याचिका में प्रतापगढ़ में चल रहे हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 (तलाक) के तहत एक मुकदमे को रायबरेली स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता पत्नी ने दावा किया था कि पति और उसके परिवार के सदस्य उसे जान से मारने और पीटने की धमकी दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पत्नी ने बताया कि वह एम्स रायबरेली में डॉक्टर है, जिसके कारण उसके लिए प्रतापगढ़ में मुकदमे की तारीखों पर उपस्थित होना अक्सर संभव नहीं हो पाता। पति की ओर से अंतिम बहस हुई पति की ओर से अधिवक्ता चंदन श्रीवास्तव ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने न्यायालय को बताया कि पत्नी द्वारा लगाए गए धमकियों के आरोप झूठे हैं और यदि ऐसी कोई धमकी दी गई होती तो उसकी शिकायत क्यों नहीं की गई। मुकदमा अंतिम सुनवाई पर है अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि मुकदमा अंतिम सुनवाई पर है और पति की ओर से अंतिम बहस भी हो चुकी है। ऐसे में मुकदमे का स्थानांतरण करने से उसके निस्तारण में अनावश्यक देरी होगी, जो न्यायहित में नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि पत्नी ने न्यायालय को यह जानकारी नहीं दी कि मुकदमा अंतिम सुनवाई पर है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायालय ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि केवल आरोपों के आधार पर किसी मुकदमे का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ, न्यायालय ने पत्नी की याचिका को खारिज कर दिया।
सिर्फ आरोप मात्र से मुकदमे का नहीं हो सकता स्थानांतरण:पत्नी की याचिका खारिज, तलाक का केस ट्रांसफर करने से इनकार
Leave a comment